संवाददाता
कर्नलगंज, गोंडा। स्थानीय तहसील क्षेत्र के अन्तर्गत पहाड़ापुर की बहुचर्चित भूमि विवाद एक बार फिर तूल पकड़ने लगा है। ग्रामीणों द्वारा अनेक शिकायती पत्र देने के बाद भी सरकारी भूमि पर हुए अवैध निर्माण पर सरकारी बुलडोजर अब तक नहीं चलाया जा सका है। मामला ग्राम पंचायत पहाड़ापुर का है, जहां अपात्रों को आवासीय पट्टा आवंटित कर उस पर निर्माण कार्य कराया गया है। रविंदर कुमार ने आयुक्त देवीपाटन मंडल को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया है कि ग्रामीणों की शिकायत के आधार पर वर्ष 2016 में तत्कालीन राजस्व निरीक्षक दुबहा बाजार व स्वयं उपजिलाधिकारी ने भूमि की भौतिक स्थिति, रिक्तता व पात्रता की जांच की गई थी। इसमें सभी लाभार्थियों अपात्र पाए गए थे। बाद में कुछ राजस्व कर्मियों की सांठगांठ से पत्रावली व जांच रिपोर्ट गायब करा दी गई। साथ ही मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। उपजिलाधिकारी के स्थानांतरण के बाद मामले को गर्म किया गया और नए उपजिलाधिकारी को गुमराह करते हुए गांव सभा की भूमि को हड़पने के उद्देश्य से गायब हुई पत्रावली की स्वीकृति करा ली गई। शिकायत है कि गांव निवासी अनिल कुमार व संतोष कुमार पुत्र द्वारिका अपने समर्थकों को पंचायत चुनाव लड़ाकर स्वयं प्रधानी का कार्यभार संभाल रहे थे। आवासीय पट्टा आवंटन में उपरोक्त लोगों द्वारा अपने व अपने समर्थकों के नाम आवासीय पट्टा करा दिया गया। बाद में उस पट्टे का स्वयं बैनामा करा लिया गया। इस प्रकार से यह नियम विरुद्ध है।
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जानकार बताते हैं कि आवासीय पट्टा आवंटन की तिथि से 10 वर्ष तक उसे अन्तरण करने का कोई अधिकार पट्टा धारक को नहीं है। गाटा संख्या 969 में संतोष कुमार पुत्र द्वारिका को आवासीय पट्टा आवंटन किया गया है, जबकि उसी भूमि में 20 वर्षो से अनसूचित वर्ग के लोगों का मकान व उनका निकास पैठार है। गांव पंचायत में सुचारू रूप से चकबंदी प्रक्रिया प्रभावी होने के बावजूद बिना अभिलेख के भौतिक स्थिति, पात्रता आदि को दरकिनार कर पट्टे का आवंटन किया गया है। गाटा संख्या 927 बंजर भूमि में वर्तमान ग्राम प्रधान द्वारा बिना पैमाइश व उपजिलाधिकारी के रोकने के बावजूद चारो तरफ पक्की दीवार का निर्माण कर लिया है, जिससे पूर्व माध्यमिक विद्यालय के कमरों की खिड़कियां बंद हो गई हैं। बच्चों को पर्यावरण की दृष्टि से खुली हवा व पर्याप्त प्रकाश आदि से वंचित रहना पड़ रहा है, जो बाल अधिकारों का खुला उल्लंघन है। शिकायत कर्ता ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि पट्टा प्रस्ताव दिनाँक चार अगस्त 2016 व स्वीकृति दिनाँक 18 अक्टूबर 2018 का पट्टा रजिस्टर पर अंकना तीन वर्ष बाद यानी एक नवम्बर 2021 को किया गया है। इतने दिनों तक यह पत्रावली कहां और किन परिस्थितियों में थी, इसकी भी जांच होनी चाहिए। आरोप है कि जिन लोगों को आवासीय पट्टा आवंटन हुआ है, वह सभी लाभार्थी अपात्र हैं। केवल वर्तमान प्रधान, प्रधान पति व प्रधान देवर तथा पूर्व प्रधान द्वारा सरकारी संपत्ति हड़पने के उद्देश्य से आवासीय पट्टा का आवंटन कराया गया है। शिकायतकर्ता ने उपरोक्त सभी बिंदुओ की जांच किसी राजपत्रित अधिकारी से कराए जाने की मांग की है।
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महत्वपूर्ण सूचना
जिले के युवा जिलाधिकारी डा. उज्ज्वल कुमार और नवागत सीडीओ गौरव कुमार की अगुवाई में जिले में बड़े बदलाव की कोशिशें शुरू कर दी गई हैं। दोनों युवा अधिकारी Transforming Gonda के नारे के साथ जिले के चाल, चरित्र और चेहरे में आमूल चूल परिवर्तन लाना चाहते हैं। जिले के विकास के लिए शुरू की गई अनेक महत्वपूर्ण योजनाएं इसी दिशा में किए जा रहे कोशिशों का परिणाम है। आगामी 21 जून को जब पूरा विश्व योग दिवस मना रहा होगा, तब योग के प्रणेता महर्षि पतंजलि की जन्म स्थली पर इन दोनों अधिकारियों ने कुछ विशेष करने का निर्णय लिया है। लक्ष्य है कि जिले की बड़ी आबादी को उस दिन योग से जोड़ा जाय। इस क्रम में अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस को सफल बनाने के लिए जनपद के ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ने के लिए YOGA DAY GONDA नाम से एक फेसबुक पेज बनाया गया है। जिला प्रशासन की तरफ से जरूरी सूचनाएं, गतिविधियों आदि की जानकारी व फोटोग्राफ इत्यादि इसी पेज पर शेयर किए जाएंगे। कृपया आप इसका महत्वपूर्ण हिस्सा बनते हुए इससे जुड़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके पेज को LIKE करें तथा अपने परिचितों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करें।
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जानकी शरण द्विवेदी
सम्पादक
www.hindustandailynews.com
