बिरवा बभनी गौशाला से पांच कुपोषित बच्चों के परिजनों को दी गयीं गायें
जिले के 4550 कुपोषित बच्चों के परिवारों को दुधारू गाय प्रदान किये जाने का है लक्ष्य
जानकी शरण द्विवेदी
गोण्डा। झंझरी ब्लॉक के बिरवा बभनी गौशाला में गुरुवार को दुधारू गाय वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर पांच कुपोषित बच्चों के परिवारों को पोषण अभियान कार्यक्रम के तहत गोवंशों की पूजा अर्चन कर एक-एक गोवंश व सहजन के पौधे तथा प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। कार्यक्रम के दौरान जिला कार्यक्रम अधिकारी ने सभी को बधाई देते हुए कहा कि समाज में पहले कुपोषण के शिकार काफी बच्चे होते थे लेकिन आज उनकी संख्या काफी हद तक कम हो गयी है। इसकी एक वजह यह भी है कि आशा, एएनएम तथा आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के प्रयास से कुपोषण के शिकार बच्चों को चिन्हित कर उन्हें विभिन्न स्वास्थ्य एवं बाल विकास कार्यक्रमों के तहत लाभान्वित कराया जा रहा है। कई सरकारी योजनाएं धात्री, गर्भवती महिलाओं तथा कुपोषित बच्चों को लाभ दे रही हैं। महिलाओं को गर्भावस्था के बाद विभिन्न प्रकार से लाभ दिलाया जा रहा है। उन्होंने बताया पहले जब शादी होती थी, तो शादी में टीवी, फ्रिज, कूलर नहीं दिया जाता था, बल्कि एक गाय या भैंस दी जाती थी। जब बच्चा पैदा होता था, तो मायके में दहिनोरा के समय भी गाय दी जाती थी। आज यह परंपरा बंद हो गई है, लेकिन शासन ने पुनः पुरानी परम्परा को लागू करके दुधारू गाय देने का कार्य किया है।
गाय के दूध से फायदे
जिला कार्यक्रम अधिकारी मनोज कुमार का कहना है कि गाय का दूध अमृत होता है। तीन वर्ष तक अगर इन देशी गाय का दूध बच्चों को पिलाया जाए, तो उनकी रोगों से लड़ने की शक्ति बढ़ जाती है। गाय की सेवा करो, तो पुण्य मिलेगा। गाय के दूध से कुपोषित बच्चों का कुपोषण दूर होगा। इसके साथ ही परिवार के लोगों को भी लाभ मिलेगा। उन्होंने सभी लोगों से कहा कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का आप लोग अधिक से अधिक लाभ लें। उन्होंने कहा जनपद के सभी विकास खंडों में यह कार्यक्रम आयोजित कर कुपोषित बच्चों के 4550 परिवारों को दुधारू गायें प्रदान किये जाने का लक्ष्य तय किया गया है।
बाल विकास परियोजना अधिकारी धर्मेन्द्र गौतम ने कहा कि बच्चों के खान-पान में कमी के कारण कुपोषण की समस्या अधिक है। ऐसे में गाय का दूध कुपोषण दूर करने के लिए कारगर होगा। अगर कोई गाय को पालना चाहता है, तो अपना नाम समीप के आंगनबाड़ी सेंटर, बाल विकास परियोजिना अधिकारी कार्यालय या जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय में संपर्क कर सकता है। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ रवीन्द्र राठौर ने कहा कि कुपोषण को हल्के में न लें। बच्चे देश के भविष्य हैं, आने वाले समय में वह देश का हिस्सा बनें। इसलिए उन्हें कुपोषण से बचायें। बच्चों को शासन की योजनाओं का भरपूर लाभ दिलाएं तभी कुपोषण दूर होगा। इस अवसर पर ग्राम प्रधान योगेश मिश्र, मुख्य सेविका रेखा देवी राजपूत तथा शालिनी गुप्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता आशा सिंह, चंद्रावती, विजय लक्ष्मी, संजू आदि मौजूद रहे।

