जानकी शरण द्विवेदी
गोण्डा। जनपद न्यायाधीश संजय शंकर पाण्डेय के निर्देश के अनुपालन में शनिवार को जिला कारागार में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन एवं निरीक्षण जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रभारी सचिव/सिविल जज (सीडि) रवि शंकर गुप्ता द्वारा किया गया। विधिक साक्षरता शिविर में प्रभारी सचिव द्वारा सौदा अभिवाक (प्ली बारगेनिंग) विषय पर जानकारी देते हुए बताया गया कि भारतीय संसद द्वारा दण्ड प्रक्रिया संहिता में नया अध्याय 21(ए), (धारा 265ए से 265एल) जोड़कर दाण्डिक प्रकरणों को शीघ्रता से निपटाने का प्रावधान किया गया है। इसके अन्तर्गत अभियोजन व पीड़ित पक्ष आपस में सामंजस्य पूर्ण तरीके से मामले को निपटाने हेतु न्यायालय की अनुमति से सरल व सुगम रास्ता निकालते हैं, जिसमें अभियुक्त द्वारा अपराध स्वीकार कर लेने पर उसे कम दण्ड से दण्डित किया जाता है। प्ली बारगेनिंग का लाभ गम्भीर अपराधों में नही मिलता है। यह सात साल से कम की सजा वाले मामलों में लाभ देता है। ऐसे मामलों में आरोपी यदि अपराध स्वीकार करते हुए पीड़ित व्यक्ति को मुआवजा देने के लिए तैयार हो जाता है तो उसे कम से कम सजा दिया जाता है। इससे न्यायालय के समय में बचत होती है और पीड़ित व्यक्ति को भी त्वरित उपचार प्राप्त हो जाता है। प्रभारी सचिव श्री रविशंकर गुप्ता द्वारा निःशुल्क विधिक सहायता के सन्दर्भ में सांविधानिक उपबन्ध, दण्ड प्रक्रिया संहिता में वर्णित उपबन्ध व माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिये गये अद्यतन निर्णयों पर भी विस्तृत रूप से जानकारी दिया गया। इस अवसर पर जिला कारागार के वरिष्ठ जेल अधीक्षक शशिकान्त सिंह, जेलर दीपांकर भारती तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के लिपिक मुकेश वर्मा व पीएलवी प्रभूनाथ आदि उपस्थित रहे।
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