अंतराल दिवस पर नव विवाहिताओं को दी गयी परिवार नियोजन की जानकारी
जानकी शरण द्विवेदी
गोण्डा। नव विवाहित दम्पती यदि अपना पहला बच्चा जल्दी नहीं चाहते हैं अथवा पहले और दूसरे बच्चे के बीच पर्याप्त अन्तराल चाहते हैं तो इसके लिए उन्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है। इसकी योजना वह खुद बना सकते हैं। सरकार की तरफ से दो बच्चों के जन्म के बीच अन्तराल को बढ़ावा देने के लिए अथवा पहला बच्चा जल्दी न पैदा करने के लिए अनेक प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। हम इनकी मदद से अपने भावी संतान की प्लानिंग कर सकते हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के जिला कार्यक्रम प्रबंधक अमरनाथ बताते हैं कि कि जिले के सीएमएसडी स्टोर में परिवार नियोजन की समस्त सामग्रियां पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। लोग परिवार नियोजन के साधनों को अपनाएं और परिवार की खुशहाली को बनाए रखें।
उल्लेखनीय है कि शासन के निर्देशनुसार परिवार नियोजन के अस्थाई विधि को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक शुक्रवार को अंतराल दिवस का आयोजन किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य मातृ एवं शिशु मृत्यु-दर को कम करना है। अंतराल दिवस के मौके पर लाभार्थियों को अंतराल विधि के बारे में काउंसिलिग के माध्यम से जानकारी दी जाती है। बीते शुक्रवार को बभनजोत ब्लाक में अधीक्षक डॉ तरुण मौर्य के नेतृत्व में अंतराल दिवस मनाया गया। इस मौके पर नव विवाहित दम्पत्तियों एवं दो या दो से अधिक बच्चों वाले माता-पिता को परिवार नियोजन संसाधनों के प्रति जागरुक किया गया। अस्पताल में एक अलग स्टॉल लगाकर सरकार की ओर से प्रदान की जाने वाली परिवार नियोजन की स्थायी व अस्थायी निःशुल्क सामग्रियों का लाभ लेने हेतु लोगों को प्रेरित किया गया। डॉ तरुण मौर्य के अनुसार, परिवार नियोजन के अस्थायी साधनों में प्रसव उपरांत आईयूसीडी (पीपीआईयूसीडी), गर्भपात उपरांत आईयूसीडी (पीएआईयूसीडी), गर्भनिरोधक गोलियां (छाया, माला-एन, ईसीपी), अंतरा इंजेक्शन व कंडोम आदि सुविधाएं दी जाती हैं। उन्होंने कहा कि आईयूसीडी, पीएआईयूसीडी लगवाने पर लाभार्थी को 300 रुपए व अंतरा इंजेक्शन लगवाने पर 100 रूपये प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
डॉ तरुण मौर्य के अनुसार, दो बच्चों के जन्म में कम से कम तीन साल का अंतर जरूरी है। इससे बच्चे का विकास सही तरह से होता है और महिला भी एनीमिया व अन्य कई गंभीर रोगों का शिकार होने से बची रहती है। जिला महिला अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ राम लखन ने कहा कि परिवार को नियोजित रखने से शिशु और मां दोनों का जीवन सुरक्षित रहता है। एक बच्चे के विकास के लिए केवल छह माह तक स्तनपान के बाद बाहरी आहार प्रारंभ करने के बाद भी कम से कम एक साल तक नियमित स्तनपान जरूरी है। यह तभी संभव होगा, जब मां जल्दी दूसरा गर्भधारण न करें। इसके लिए अस्थाई परिवार नियोजन के साधन अपनाना जरूरी है। सीएचसी बभनजोत में तैनात स्टॉफ नर्स प्रतिमा सिंह का कहना है कि अंतराल दिवस के मौके पर लाभार्थियों को बास्केट आप च्वाइस द्वारा आईयूसीडी, अंतरा इंजेक्शन, साप्ताहिक छाया गोली, इमरजेंसी गर्भनिरोधक गोली (ईसीपी), व माला-एन के माध्यम से दो बच्चों के जन्म में कम से कम तीन साल का अंतर रखने के लिए और शादी के कम से कम दो साल बाद बच्चे का प्लान करने की जानकारी दी जाती है। उन्होंने बताया कि 19 फ़रवरी को आयोजित हुए अंतराल दिवस पर एक अंतरा इंजेक्शन, तीन छाया गोली, 5 माला-एन, व 18 कंडोम का वितरण लाभार्थियों को किया गया।
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