संवाददाता
गोण्डा। गायत्री शक्तिपीठ निकट अम्बेडकर नगर चौराहा के प्रथम वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित पवन प्रज्ञा पुराण कथा के तृतीय दिवस पर शुक्रवार से पावन प्रज्ञा पुराण में शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वाधान में आए हुए परिजनों ने टोली नायक विवेक शुक्ला ’आत्मबोध के तत्वबोध साधना’ के विषय पर गुरुदेव के उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रातः उठे तो चिंतन करें कि हम ऋषियों व भगवान के वंशज हैं। इसलिए संकल्प लेकर गायत्री साधना अवश्य करें। रात्रि को सोते समय तत्व बोध व मृत्यु की साधना करें। मरते समय व्यक्तियों को सारे पुण्य एवं पाप कर्म दिखाई देने लगते हैं। यदि कोई गलती हुई हो उसके लिए ईश्वर से क्षमा याचना करते हुए भाव व्यक्त करें कि आगे से ऐसी गलती जीवन में नहीं होगी। प्रक्रिया को शुभम् श्रीवास्तव विधिवत वेद मंत्रोच्चार के साथ सभी मुख्य यजमान भारतीय परिधान में एक साथ नौ यज्ञ कुंडो पर आहुतियां दी। भारतीय संस्कृति की महत्व का वर्णन किया। भारतीय परीधान का यज्ञकर्ता के लिये आवश्यकता पर भी उद्बोधन दिया। मनोरम दृश्य व देवताओं गायत्री महायज्ञ व जप के विषय में परमपूज्य वेद मूर्ति पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा गायत्री मय जीवन जीने लिए विचार परिवर्तन की आवश्यकता पर भी देव मंच से संबोधित किया। यज्ञकर्ता व कथा श्रोताओं से गायत्री परिवार के स्टॉल पर उपलब्ध साहित्य है। प्रज्ञा पुराण का स्वाध्याय करने का अनुरोध किया। गायत्री शक्तिपीठ निकट अंबेडकर नगर चौराहा महाकाल मां गायत्री और सजल श्रद्धा प्रखर प्रज्ञा के दर्शन किये। परिश्रम समय दान अंशदान के कारण प्रातः पारियों में सौ से अधिक लोगों ने यज्ञ प्रक्रिया किया। यज्ञ के उपरांत नवनिर्मित गायत्री शक्तिपीठ के परिसर में मां गायत्री के सामने विभिन्न संस्कार भी सम्पन्न कराये गए महाकाल मां गायत्री और सजल श्रद्धा प्रखर प्रज्ञा व दर्शन कर मंगलकामनाओं की याचना की। आए हुए सभी श्रद्धालुओं ने प्रसाद भी पूर्ण श्रद्धा के साथ ग्रहण किया। गायत्री परिजनों ने अपने द्वारा लिखी हुई गायत्री महामंत्र की पुस्तकों को भी शक्तिपीठ पर जमा की। देव मंच का पूजन व शांतिकुंज हरिद्वार से आई हुई टोली के नायक आचार्य विवेक शुक्ला के निर्देश पर ठाकुर प्रसाद तिवारी, राम तेज मिश्रा द्वारा मंत्रोच्चार व संगीत के माध्यम से दिशा निर्देश के अनुसार संपन्न किया गया। गायत्री परिवार के इस महायज्ञ में अखिल विश्व में शांति की कामना की गई तथा भारतीय संस्कृति उत्थान के लिए मंगल कामना की गई। यज्ञ के उपरांत विशेष आध्यात्मिक प्रयोग दीप यज्ञ व प्रवचन में भी सभी से अधिक से अधिक संख्या में आने का निवेदन किया। वर्ष में कम से कम एक बार शांतिकुंज हरिद्वार गुरुकुल पहुंचकर दर्शन ऊर्जा संकलन करने अवश्य जाना चाहिए। व्याकरण नाथ शुक्ला, पीएन शुक्ला, जयराम दास वाधवानी, जयकरण तिवारी, चंद्र मोहन मिश्रा, विनोद शर्मा, हरगोविंद अग्रवाल, ममता सिंह, राधा शुक्ला, भूपेंद्र आर्य व जसपाल सिंह सलूजा ने अपना विशेष सहयोग दिया। निर्देशों के साथ आयोजन संपन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा यज्ञ में शामिल सभी लोगों को 15 फरवरी को शाम चार बजे से होने वाले विशाल दीप यज्ञ में सपरिवार शामिल होने का भाव भरा आमंत्रण किया।

