Sunday, March 22, 2026
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Gonda Nesw: खरीफ में प्याज की खेती कर ज्यादा लाभ कमाएं किसान भाई

सीडीओ ने किसानों को दिया खरीफ प्याज का बीज

संवाददाता

गोण्डा। जिला उद्यान अधिकारी मृत्युंजय कुमार सिंह ने बताया है प्याज की उपज का अच्छा मूल्य प्राप्त करने के लिए किसानों को खरीफ प्याज की खेती अपनानी चाहिए। इससे जहां एक ओर किसानों को अधिक आर्थिक लाभ मिलेगा, वहीं दूसरे राज्यों पर उत्तर प्रदेश की निर्भरता में भी कमी आएगी। मंगलवार को मुख्य विकास अधिकारी शशांक त्रिपाठी ने विकास भवन में कई प्रगतिशील किसानों को खरीफ प्याज का बीज प्रदान किया.
जिला उद्यान अधिकारी ने बताया कि भारत में उगाई जाने वाली फसलों में प्याज का महत्वपूर्ण स्थान है. उत्तर भारत में इसको अधिकतर रबी के मौसम में ही उगाया जाता है, जिससे इस समय इसकी अधिकता एवं भंडारण की समुचित अभाव के कारण किसान भाइयों को उचित मुनाफा नहीं मिल पाता है. अक्सर यह देखा जाता है कि नवंबर के बाद रबी की फसल का संग्रहित भंडार समाप्त हो जाता है. इसकी मांग और मूल्यों के उतार-चढ़ाव के कारण ही भारत सरकार को प्याज को आवश्यक वस्तु अधिनियम के अंतर्गत लाना पड़ा. प्याज की खेती मुख्यतः महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात, बिहार, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, हरियाणा आदि राज्यों में की जाती है. नवीनतम प्रजातियों और तकनीको के विकास से अब इसकी खेती खरीफ और पछेती खरीफ में भी की जा रही है. उन्होंने बताया कि खरीफ प्याज का उत्पादन कम होने के कारण दिसंबर और जनवरी में प्याज की आपूर्ति में कमी आ जाती है, इससे इन दो महीनों में प्याज की कीमतों में वृद्धि आ जाती है. खरीफ के मौसम में प्याज उत्पादन लेने से बाजार में इसकी आपूर्ति लगातार बनाए रखने में सहायक होती है तथा अधिक लाभ भी कमाया जाता है.
डीएचओ ने बताया कि प्याज के लिए सम शीतोष्ण जलवायु अच्छी समझी जाती है. पौधों की आरंभिक वृद्धि के लिए ठंडी जलवायु की आवश्यकता होती है, लेकिन अच्छे व बड़े का निर्माण के लिए पर्याप्त धूप वाले बड़े दिन उपयुक्त रहते हैं. इसकी खेती दोमट से लेकर चिकनी दोमट मिट्टी में की जा सकती है, लेकिन अच्छी पैदावार के लिए दोमट मिट्टी उपयुक्त रहती है. भूमि अधिक क्षारीय व अधिक अम्लीय नहीं होनी चाहिए अन्यथा कंदो की वृद्धि अच्छी नहीं हो पाती है. खेत में जल निकास का भी उचित प्रबंधन होना आवश्यक है. उपयुक्त किस्मों के बारे बताते हुए उन्होंने कहा कि हमेशा अपने क्षेत्र के लिए सिफारिश की गई उन्नत किस्मों का चयन करके ही बीजों की बुवाई करें खरीफ फसल हेतु किस्में एग्रीफाउंड डार्क रेड, लाइन 883, एन-53, भीमा सुपर, भीमा रेड, भीमा डार्क रेड, भीमा शुभ्रा, भीमा श्वेता, भीमा सफेद, इत्यादि प्रमुख किस्में हैं. जनपद में एल 883 प्रजाति का बीज उपलब्ध है। यह प्रजाति राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान द्वारा 2015 में विकसित की गई है. यह किस्म देश के विभिन्न प्याज उगाने वाले भागों में खरीफ मौसम में उगाने के लिए उपयुक्त है. इस प्रजाति के शल्क कंद गहरे लाल रंग के गोलाकार होते हैं, शल्के अच्छी प्रकार से चिपकी होती हैं तथा मध्यम तीखापन होता है फसल रोपाई में 80 से 85 दिनों में तैयार हो जाती है पैदावार 300 से 350 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होता है।

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