Wednesday, March 18, 2026
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Gonda : स्वास्थ्य कार्यकर्ता बचा रहे जच्चा-बच्चा की जान

जानकी शरण द्विवेदी

गोंडा। केस-एक, सीएचसी काजीदेवर क्षेत्र अंतर्गत संचालित उपकेन्द्र बनघुसरा के भटपुरवा गांव की ममता (24 वर्ष) दूसरी बार गर्भवती हुई। तीसरा माह लगने पर उसने जिला महिला अस्पताल में जांच कराई। 12 ग्राम हीमोग्लोबिन के साथ जांच में सब कुछ सामान्य था। यह सोचकर ममता लापरवाही बरतने लगी। नतीजा यह हुआ कि 7वें महीने में हीमोग्लोबिन 8.7 ग्राम पहुंच गया। 23 जून को तीव्र प्रसव पीड़ा होने पर ममता 102 एम्बुलेंस सेवा से महिला अस्पताल पहुंची। तब तक हीमोग्लोबिन पांच ग्राम पहुंच चुका था। ममता को 23, 25 और 27 जून को कुल तीन बार खून चढ़ा। चिकित्सकों के अथक प्रयास से 27 जून को सामान्य प्रसव से ममता ने बेटी को जन्म दिया। जन्म के समय बच्ची का वजन तीन किलोग्राम था। ममता बताती हैं कि आज मैं व बेटी दोनों स्वस्थ हैं। मैं एएनएम राजदेवी, आशा रीता तिवारी, संगिनी पूनम शुक्ला और बीओसी गुंजन पाण्डेय समेत पूरे अस्पताल टीम के प्रति आभारी हूं। सभी ने मेरा बहुत ध्यान रखा। बस मैंने ही खाने-पीने में लापरवाही कर दी थी।
केस-दो, सीएचसी काजीदेवर के उपकेन्द्र बनघुसरा के ही शीतल पाण्डेयपुरवा की चार माह की गर्भवती रंजना (27 वर्ष) बहुत कमजोर थी। आशा सुनीता पाण्डेय और एएनएम राजदेवी मिश्रा की मदद से रंजना की वीएचएसएनडी सत्र में खून, पेशाब व ब्लड प्रेशर की जांच हुई, तो पता चला हीमोग्लोबिन 6.4 है। साथ ही हाई ब्लड प्रेशर ग्रस्त है। आशा बताती हैं दूसरे महीने में ही गर्भ का पता चल जाने से इलाज के लिए पर्याप्त समय था। जिला महिला अस्पताल में रंजना को चार बार आयरन शुक्रोज़ लगाया गया। दैनिक भोजन के अलावा अतिरिक्त पौष्टिक आहार व साफ़-सफाई रखने की सलाह दी गयी। धीरे-धीरे रंजना के स्वास्थ्य में सुधार होने लगा और 18 सितम्बर 2021 को महिला अस्पताल में सामान्य प्रसव से बच्चे का जन्म हुआ। जन्म के समय बेटे का वजन ढाई किलोग्राम था। रंजना बताती हैं आशा दीदी हमेशा हौसला बढ़ती रहीं। अस्पताल से लौटने के बाद आशा और आशा संगिनी पूनम शुक्ला समय-समय पर घर आकर हमारी और बच्चे की देखभाल करती रहीं। दोनों अब पूरी तरह स्वस्थ हैं। हम आशा, आशा संगिनी और एएनएम दीदी के बहुत शुक्रगुजार हैं। ममता और रंजना तो जिले की सिर्फ बानगी हैं ऐसे कई मामले हैं जो स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की मदद से नया जीवन पा रहे हैं। जिला महिला अस्पताल की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ दीपमाला बताती हैं कि जिले में गर्भवती व धात्री महिलाओं, नवजात, बच्चों और किशोर-किशोरियों के स्वास्थ्य का नियमित देखभाल 3186 आशा कर रही हैं। उन्होंने बताया कि गर्भावस्था में मां व बच्चे के लिए एनीमिया बड़ा खतरा है। इससे जहां शिशु की समय से पहले जन्म लेने की संभावना बढ़ जाती है वहीं मां को रक्तस्राव हो सकता है।
क्या करें :
गर्भावस्था के दौरान कम से कम चार बार जांच जरूर करवाएं। हर गर्भवती दिन में तीन बार मुख्य भोजन और दो बार पौष्टिक नाश्ता अवश्य करें। गर्भवती को गहरे रंग की हरी पत्तेदार सब्जी, विटामिन-सी युक्त आहार, साबुत दालें व फलियां, दूध या उससे बने उत्पाद का सेवन करें। स्वस्थ महिलाएं आयरन फॉलिक एसिड की एक गोली रोजाना यानि कुल 180 गोली व एनीमिक महिलाएं दो गोली रोजाना यानि 360 गोली अवश्य खाएं। गौरतलब हो कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-5 (2019-21) में जिले की 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की 48.8 फ़ीसदी गर्भवती महिलाएं एनीमिक पायी गईं।

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