जानकी शरण द्विवेदी
गोंडा। कुपोषण मुक्ति के लिए शासन की ओर से कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा बच्चों के साथ-साथ गर्भवती तथा धात्री महिलाओं को पोषण योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। इसी क्रम में गुरुवार को जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषण पाठशाला का आयोजन किया गया। पाठशाला में विभागीय सेवाओं के साथ पोषण प्रबंधन व कुपोषण से बचाव के उपायों पर चर्चा के साथ पोषण सम्बन्धी सवाल-जवाब किये गए। दोपहर 11 बजे से एक बजे तक एनआईसी के माध्यम से वीडियो कांफ्रेंसिंग द्वारा पोषण पाठशाला लगायी गयी। जिला कार्यक्रम अधिकारी धर्मेन्द्र गौतम ने बताया कि पाठशाला में आईआईटी मुंबई की एड्जन्क्ट एसोसियेट प्रोफ़ेसर डॉ रूपल दलाल, एसजीपीजीआई लखनऊ की सीनियर पीडियाट्रिशियन डॉ पियाली भट्टाचार्य, एसएमडीटी महाराष्ट्र की न्यूट्रीशनिस्ट दीपाली फरगड़े तथा पब्लिक हेल्थ ऐंड न्यूट्रीशन से डॉ देवाजी पाटिल समेत विभाग के विभिन्न उच्चाधिकारियों द्वारा ऊपरी आहार के विषय में विस्तृत चर्चा की गयी। पोषण विशेषज्ञों द्वारा प्रतिभागी गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को आहार समूहों से बनने वाले भोजन व उनसे प्राप्त होने वाले पोषण और स्वास्थ्य लाभ के विषय में जानकारी दी गई। जिले की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने गर्भवती महिलाओं विशेषकर अंतिम त्रैमास की गर्भवती, धात्री महिलाओं व उनके अभिभावकों के साथ पोषण पाठशाला में वर्चुअल रूप से प्रतिभाग किया।
चुनौतियों और समाधान पर हुई चर्चा :
सीडीपीओ शहर परियोजना अभिषेक दुबे ने बताया कि पाठशाला में ऊपरी आहार संबंधी चुनौतियों तथा उनके समाधान पर विस्तृत चर्चा की गयी। लाभार्थियों व अन्य द्वारा पूछे गए विभिन्न प्रश्नों जैसे अर्ध ठोस आहार के रूप में बच्चे को क्या-क्या खिला सकते हैं व दिन भर में बच्चे को कितनी बार खिलाएं अदि का उत्तर पोषण विशेषज्ञों द्वारा दिया गया। ऊपरी आहार का अर्थ है अन्य आहार व तरल पदार्थ जो पूरक के तौर पर माँ के दूध के अतिरिक्त दिया जाता है, न कि माँ के दूध के स्थान पर। बच्चे के छः माह की आयु पूरी करने कर लेने पर स्तनपान के साथ ऊपरी आहार देना शुरु कर देना चाहिए। शुरुआत कार्बोहाईड्राट्स यानि चावल या दलिया से करनी चाहिए। फिर प्रोटीन्स (दालें, फलियां और जो मांसाहारी हैं, वह शिशु को चिकन, फिश दे सकते हैं। ज्यादा पानी में उबले हुए चावलों को मसलकर दूध में मिलाकर दे सकते हैं। केले को मसलकर दे सकते हैं। सेब, पपीता, चीकू और नाशपती उबालकर या मसलकर भी दे सकते हैं। बच्चे का ऊपरी आहार ना ज्यादा पतला और ना ही ज्यादा गाढ़ा होना चाहिए। शुरुआत में एक बार में सिर्फ एक आहार शुरू करें। दूसरा आहार शुरू करने से पहले 3-4 दिन तक इंतज़ार करें, ताकि यह पता चल सके कि बच्चे को किसी चीज से एलर्जी तो नही है। जब बच्चे ऊपरी आहार शुरू करते हैं, तो उन्हें तीन चम्मच आहार दिन में दो बार से शुरू करना चाहिए और धीरे-धीरे बढ़ाना चाहिए। बच्चो को घर पर बना हुआ खाना ही खाने को दें। हरी पत्तेदार सब्जियां और फल बच्चों को स्वस्थ रखते हैं। बीमार होने पर बच्चे को खाने पीने के लिए प्रोत्साहित करें। बच्चो के खाने में ज्यादा नमक न डालें, क्योंकि बच्चो के गुर्दे पूर्ण रूप से विकसित नही हुए होते। ज्यादा मीठे वाला खाना बच्चों से दूर रखें।

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जानकी शरण द्विवेदी
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