प्रदीप पांडेय
गोंडा। देश के साथ साथ दुनियाभर में बढ़ती आत्महत्याओं पर रोक लगाने और उसके लिए लोगों में जागरूकता लाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोग से हर साल 10 सितंबर को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाया जाता है। इसी क्रम में इटियाथोक कस्बे के कंप्यूटर इंस्टिट्यूट में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। श्री उमा कम्प्यूटर इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी के प्रबंधक राकेश तिवारी ने छात्र छात्राओ को बताया कि इस दिन की शुरुआत इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर सुसाइड प्रिवेंशन ने साल 2003 में की थी। आत्महत्या की वजह से हर साल दुनियाभर में आठ लाख से ज्यादा लोग अपनी जान गंवाते देते हैं। आत्महत्या करने वालों में 15 से 29 साल के किशोर और युवा ज्यादातर शामिल हैं। तिवारी ने बताया कि नकारात्मक विचार वाले, निराश एवं दुखी रहने वाले, खुद की परवाह न करने वाले, बार बार मरने का ख्याल लाने वाले आदि लक्षणों वाले लोग आत्महत्या के शिकार अधिक होते हैं। उन्होंने कहा कि आत्महत्या की रोकथाम के लिए किशोर और युवाओं को जागरूक करना, तनाव प्रबंधन का तरीका सिखाना, परिवार को ज्यादा समय देना, दवा एवं काउंसलिंग का सहारा लेना आदि अतिआवश्यक है, जिससे आत्महत्या पर रोक लगायी जा सके। कार्यक्रम में पुरषोत्तम तिवारी, रोली मिश्रा, राजेश शुक्ला एवं सभी छात्र- छात्राएं उपस्थिति रहे।

