Friday, April 3, 2026
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Gonda : तहसीलदार की पहल पर गोवंशों के लिए शुरू हुआ रोटी बैंक

ग्रामीणों संग बैठक कर उन्होंने इसके क्रियान्वयन को दिया अंतिम रूप

ग्राम पंचायत के 14 मजरों में बने 1500 घरों से रोजाना गोशाला के लिए आएगी एक रोटी

जानकी शरण द्विवेदी

गोंडा। आपने इंसानों के लिए तो रोटी बैंक संचालित किए जाने की खबरें तो बहुत सुनी होंगी, किन्तु जानवरों के लिए रोटी बैंक की शुरुआत किया जाना अपनी तरह का बिल्कुल नया मामला है। किन्तु इस अवधारणा को मूर्त रूप देने के लिए सदर तहसीलदार की पहल पर अल्पसंख्यक समुदाय से ताल्लुक रखने वाले एक ग्राम प्रधान ने आगे आकर इसकी शुरुआत की है। उनकी उपस्थिति में ग्राम पंचायत के विशिष्ट लोगों की बैठक करके शनिवार को इसकी औपचारिक शुरुआत की जा चुकी है। सदर तहसीलदार राजीव मोहन सक्सेना बताते हैं कि वैसे तो सदर तहसील में कुल 22 गोशालाएं संचालित हैं किन्तु मुजेहना विकास खण्ड के रुद्रगढ़ नौसी में संचालित गोशाला सबसे अलग है। इस गोशाला में वर्तमान में करीब 400 जानवर रह रहे हैं। उनके चारा पानी की समुचित व्यवस्था ग्राम प्रधान प्रतिनिधि मंसूर अली अंसारी की देखरेख में हो रही है। किन्तु शनिवार को उनके द्वारा किए गए गोशाला के निरीक्षण के दौरान उनके एक प्रस्ताव से नई अवधारणा की शुरुआत हुई। दरअसल तहसीलदार ने गोशाला के लिए रोटी बैंक संचालित किए जाने का प्रस्ताव रखा। बताते हैं कि यह प्रस्ताव मौके पर मौजूद लोगों को भी ठीक लगा तो इसके क्रियान्वयन के बारे में पूछताछ की। ग्राम प्रधान की तरफ से सचिवालय भवन पर गांव के सम्मानित और विशिष्ट व्यक्तियों की एक अनौपचारिक बैठक में रोजाना हर घर से एक रोटी दिए जाने का प्रस्ताव रखा गया। इस प्रस्ताव को सर्व सम्मति से सभी ने स्वीकार करते हुए कल से ही रोटी देने की शुरुआत कर दी। तहसीलदार ने बताया कि कुछ ही देर में कई घरों से एकत्रित की गई रोटियों को ले जाकर गोशाला में जानवरों को खिलाया गया। उन्होंने कहा कि यह बिल्कुल नया सोच और नया नजरिया है। तरक्की को नए सोच और नजरिए की ही जरूरत होती है।

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बताते चलें कि कई हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इस गोशाला को वर्ष 2018 में शुरू किया गया था। तब से यह अनवरत संचालित है। प्रधान प्रतिनिधि मंसूर अली का कहना है कि बचपन से ही वह अपने घर और आसपास के घरों में खाना बनाते वक्त मुट्ठी निकालने की परम्परा को देखते आए हैं। जब घर की महिलाएं खाना बनाने के लिए वर्तन में आटा या चावल निकालती थीं, तो उसमें से एक मुट्ठी निकालकर अलग कर देती थीं। हफ्ता, दस दिन पर दरवाजे पर आने वाले किसी भिखारी या मुल्ला मोलवी को वह खाद्यान्न दे दिया जाता था। बड़े बुजुर्ग बताते थे कि इससे बरकत होती है और ऊपर वाले की कृपा बनी रहती है। उन्होंने कहा कि मेरे जेहन में बार-बार यह आ रहा था कि 14 मजरों में विस्तार वाले ग्राम पंचायत के 1500 घरों से यदि रोजाना एक-एक रोटी भी मिल जाएगी, तो इससे निराश्रित गोवंशीय जानवरों के प्रति लोगों के मन में प्रेम बढ़ेगा और उन्हें दाना के रूप में कुछ खाने को भी मिल जाया करेगा। शनिवार को गोशाला के निरीक्षण के लिए पहुंचे सदर तहसीलदार के समक्ष जब हमने यह प्रस्ताव रखा तो उन्हें भी यह पसंद आया और ग्राम पंचायत के लोगां की बैठक करके इसे अमली जामा पहनाने के लिए हरी झण्डी दे दी। उन्होंने इस पुनीत कार्य में अपने स्तर से भी हर माह यथासंभव सहयोग का आश्वासन भी दिया। प्रधान प्रतिनिधि ने बताया कि वर्तमान में 385 जानवरों वाले गोशाला में पशुओं को खाने के लिए प्रतिदिन 10 से 11 कुंतल भूसा, 50 किलो पालिस और 25 किलो पशु आहार की व्यवस्था की जाती है। पालिस और पशु आहार माह में एक बार थोक में मंगाया जाता है, जबकि भूसा लगातार आता ही रहता है। छह बीघा हरा चारा एक बार कटकर खत्म हो गया है। नई बोआई का चारा तैयार हो रहा है। सोलर पैनल से बिजली पैदा करके टुल्लू पम्प के सहारे हौज में पानी भरा जाता था किन्तु गर्मी के दिनों में टुल्लू पम्प आवश्यकता की पूर्ति करने में सक्षम नहीं था। इसलिए अभी हाल ही में डीजल से चलने वाला एक नया पम्पिंग सेट लाया गया है। साथ ही बड़ी क्षमता का एक अन्य हौज भी बनवाया गया है, जिससे गोशाला में पानी की कमी न होने पाए। उन्होंने कहा कि इन पशुओं की देखभाल के लिए ग्राम पंचायत के 10 श्रमिकों को लगाया गया है, जिनका 99 दिन का पारिश्रमिक मनरेगा से तथा अन्य दिनों का ग्राम निधि से भुगतान किया जाता है।

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इस योजना के क्रियान्वयन के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि वह रोटी संकलित करने के लिए मजरे वार डिब्बा रखवाएंगे, जिसमें लोग सूखी रोटियां डाल सकेंगे। गोशाला में काम करने वाला एक श्रमिक प्रतिदिन एक छोटी वैन के माध्यम से सभी डिब्बों से रोटियां संकलित करके गोशाला तक पहुंचाएगा। उन्होंने बताया कि धीरे-धीरे करके उनकी योजना इस कार्य को विस्तार देकर धानेपुर कस्बे तथा बग्गीरोड तक ले जाने की है। शनिवार को इस अभियान की औपचारिक शुरुआत हो चुकी है। कल गांव वालों ने जो रोटियां दान की थीं, तहसीलदार की उपस्थिति में उसे गोशाला में ले जाकर गोवंशों को खिलाया गया। जल्द ही पूरे ग्राम पंचायत में इसका विस्तार कर दिया जाएगा। मुख्य विकास अधिकारी गौरव कुमार ने इस अभियान की सराहना करते हुए कहा कि यह बहुत ही नेक कार्य है। ऐसे कार्यों से दूसरे ग्राम प्रधानों को भी प्रेरणा मिलेगी और वहां के गोशालाओं में भी इस प्रकार के कार्य शुरू किए जा सकेंगे। सीडीओ ने कहा कि अच्छा कार्य करने वाले ग्राम प्रधानों और पंचायत सचिवों को सम्मानित किया जाएगा। इस मौक़े पर राजस्व निरीक्षक अशोक कुमार शुक्ला, लेखपाल निरंकार प्रसाद, शेष प्रताप सिंह, विनीत श्रीवास्तव, अंजनी श्रीवास्तव, रमेश चौधरी, अब्दुल मजीद, वकील अहमद, मो. आमीन, बलराम साहू, जगराम वर्मा, राम सुघर दूबे, हरिपाल पाण्डेय, अब्दुल वहाब, असगर अली, हाफिज सिराज अहमद समेत अनेक ग्रामवासी मौजूद रहे।

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महत्वपूर्ण सूचना

गोंडा जिले के युवा जिलाधिकारी डा. उज्ज्वल कुमार और नवागत सीडीओ गौरव कुमार की अगुवाई में जिले में बड़े बदलाव की कोशिशें शुरू कर दी गई हैं। दोनों युवा अधिकारी Transforming Gonda के नारे के साथ जिले के चाल, चरित्र और चेहरे में आमूल चूल परिवर्तन लाना चाहते हैं। जिले के विकास के लिए शुरू की गई अनेक महत्वपूर्ण योजनाएं इसी दिशा में किए जा रहे कोशिशों का परिणाम है। आगामी 21 जून को जब पूरा विश्व योग दिवस मना रहा होगा, तब योग के प्रणेता महर्षि पतंजलि की जन्म स्थली पर इन दोनों अधिकारियों ने कुछ विशेष करने का निर्णय लिया है। लक्ष्य है कि जिले की बड़ी आबादी को उस दिन योग से जोड़ा जाय। इस क्रम में अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस को सफल बनाने के लिए जनपद के ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ने के लिए YOGA DAY GONDA नाम से एक फेसबुक पेज बनाया गया है। जिला प्रशासन की तरफ से जरूरी सूचनाएं, गतिविधियों आदि की जानकारी व फोटोग्राफ इत्यादि इसी पेज पर शेयर किए जाएंगे। कृपया आप इसका महत्वपूर्ण हिस्सा बनते हुए इससे जुड़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके पेज को LIKE करें तथा अपने परिचितों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करें।

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