Tuesday, March 3, 2026
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Gonda : मंदिर पहुंचकर विधायक ने किया पोखरे के सुंदरीकरण का निरीक्षण

प्रदीप पांडेय

गोंडा। मेहनौन विधानसभा अंतर्गत रुपईडीह ब्लॉक के पचरन ग्राम पंचायत में स्थित प्रसिद्ध पृथ्वीनाथ मंदिर पहुंचकर क्षेत्रीय भाजपा विधायक विनय कुमार द्विवेदी ने यहां चल रहे पोखरे के सुंदरीकरण कार्य का निरीक्षण किया। इस दौरान विधायक ने मानक के अनुरूप कार्य जल्द पूर्ण किए जाने के लिए जिम्मेदारों को निर्देशित किया। इसके साथ ही यहां पर काम पर लगे मजदूरों से उन्होंने उनका हाल जाना और वार्ता की एवं इस दौरान उन्होंने खुद भी यहां मजदूरों संग फावड़ा चलाया। इस मौके पर इनके साथ प्रसिद्ध मंदिर के महंत जगदंबा प्रसाद तिवारी व अन्य भाजपाई मौजूद रहे। विधायक ने मंदिर में पहुंचकर दर्शन पूजन भी किया। इसके साथ ही मंदिर प्रांगण में मौजूद दुकानदारों से विधायक ने उनका हाल जाना और उनकी समस्या भी सुनी। साथ ही मंदिर परिसर में मौजूद दर्शनार्थियों से मिलकर विधायक ने उनकी समस्या जानी और हालचाल लिया। विधायक ने मंदिर में मौजूद समस्त व्यवस्थाओं का जायजा लिया और यहां पर उपस्थित जनसमुदाय से आवश्यक जानकारी प्राप्त की। विधायक ने यहां पर बनाए जाने वाले स्टेडियम के भूमि का भी जायजा लिया। इसके अलावा मंदिर के महंत से उन्होंने आवश्यक जानकारी प्राप्त की। इस अवसर पर विधायक प्रतिनिधि राजन शुक्ला, मंडल अध्यक्ष सत्यव्रत छोटू ओझा, अजय राठौर, सतेन्द्र मिश्रा, करूणाशंकर ओझा, अलोक मिश्रा आदि अनेक भाजपाई मौजूद रहे।

Gonda : मंदिर पहुंचकर विधायक ने किया पोखरे के सुंदरीकरण का निरीक्षण

क्या है इस पृथ्वीनाथ मंदिर की खाशियत

यह प्रसिद्ध मंदिर जिले के खरगूपुर क्षेत्र में स्थित है। यह मंदिर वास्तुकला का सबसे अच्छा उदाहरण है। पृथ्वीनाथ को ‘लिंगम’ कहा जाता है जो मंदिर में स्थापित विश्व की सबसे ऊंची शिव लिंग है, जिसे द्वापर युग में पांडवों के निर्वासन के दौरान भीम द्वारा स्थापित किया गया था। पृथ्वीनाथ मंदिर भगवान शिव का बहुत बड़ा मंदिर है, जहां समय समय पर विशाल मेला भी लगता है। यहाँ हर साल शिवरात्रि व कजलीतीज के दिन बहुत ही भव्य मेला लगता है। अगर इतिहास की बात करे तो इस शिवलिंग की स्थापना भीम ने किया था। बताया जाता है कि इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग विश्व का सबसे ऊंचा शिवलिंग है, जिसे द्वापर युग में पांडवों के अज्ञातवास के दौरान भीम ने स्थापित किया था। महाभारत के अनुसार, पांडवों के अज्ञातवास के दौरान भीम ने बकासुर का वध किया था। बकासुर के वध के कारण भीम को ब्रह्महत्या का दोष लगा था। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दोष से मुक्ति के लिए भीम ने शिवलिंग की स्थापना की थी। बताया जाता है कि ये सात खंडों का शिवलिंग है जो 15 फुट ऊपर दिखता है और 64 फिट जमीन के नीचे है। इतिहासकारों के अनुसार, मुगल सम्राट के कार्यकाल में किसी सेनापति ने यहां पूजा अर्चना की थी और मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। बताया जाता है कि भीम द्वारा स्थापित यह शिवलिंग धीरे-धीरे जमीन में समा गया। इसके बाद खरगूपुर के राजा मानसिंह की अनुमति से पृथ्वीनाथ सिंह के नाम के एक शख्स ने मकान निर्माण के लिए यहां पर खुदाई शुरू करा दी। कहा जाता है कि उसी रात पृथ्वीनाथ सिंह को सपने में पता चला कि उस जमीन के नीचे सात खंडों का एक शिवलिंग दबा हुआ है। उसके बाद शिवलिंग खोदवाकर पूजा अर्चना शुरू करा दी गई। इसके बाद ही इस मंदिर का नाम पृथ्वीनाथ मंदिर पड़ गया।

Gonda : मंदिर पहुंचकर विधायक ने किया पोखरे के सुंदरीकरण का निरीक्षण

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