परसपुर ब्लाक के 68 ग्राम पंचायतों में वित्तीय वर्ष 2020-21 में हुआ फर्जीवाड़ा
जानकी शरण द्विवेदी
गोंडा। जिले के परसपुर विकास खण्ड के 68 ग्राम पंचायतों के प्रधानों व सचिवों ने मिलीभगत कर विकास कार्यों के नाम पर 12.48 करोड़ रुपये डकार लिए। ऑडिट टीम ने घोटाले का खुलासा करते हुए डीपीआरओ को रिपोर्ट भेजकर वसूली की संस्तुति की है। परसपुर ब्लॉक की 68 ग्राम पंचायतों को वित्तीय वर्ष 2020-21 में विकास कार्यों के नाम पर करोड़ों रुपए का आवंटन किया गया था। आवंटित धनराशि के सापेक्ष ग्राम पंचायतों ने विकास के लिए कार्य योजना तो बनाई लेकिन उसे अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका। आसन्न पंचायत चुनाव को देखते हुए आवंटित की गई धनराशि वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक खर्च करने की जल्दबाजी में ग्राम प्रधान व पंचायत सचिव ने मिलीभगत कर आवंटित धनराशि का एक बड़ा हिस्सा खुद हड़प लिया। जिन विकास कार्यों की कार्ययोजना तैयार की गई थी, उन्हें कागजों पर पूरा दिखा दिया गया। धनराज हड़पने की जल्दबाजी में इसके प्रपत्र भी नहीं तैयार किए गए और तो और ई-स्वराज एप पर भी आधी अधूरी जानकारी ही दी गई। विकास कार्यों की ऑडिट टीम ने जब पड़ताल शुरू की, तो इस पूरे खेल का खुलासा हुआ। ऑडिट टीम ने जब संबंधित ग्राम प्रधानों व सचिवों से अभिलेख मांगना शुरू किया, तो इस फर्जीवाड़े की पोल खुलती चली गई। ऑडिट टीम ने ब्लॉक की 68 ग्राम पंचायतों में 12.48 करोड़ रुपए के घोटाले की पुष्टि करते हुए जिम्मेदारों से वसूली किए जाने की संस्तुति की है।
ग्राम पंचायत परसपुर में वित्तीय वर्ष 2020-21 में विकास कार्यों के लिए 1.21 करोड रुपये की धनराशि आवंटित की गई थी। इस धनराशि के सापेक्ष ग्राम पंचायत में विकास कार्य कराए जाने के नाम पर 82.59 लाख रुपये का खर्च दिखाया गया है, लेकिन ऑडिट टीम ने जमीन कार्यों के पड़ताल की तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। जांच में पता चला कि जिन विकास कार्यों के नाम पर पैसे निकाले गए हैं, उनमें से अधिकतर कामों को कराया ही नहीं गया है। जांच के दौरान परसपुर पसका मुख्य मार्ग से खड़ंजा निर्माण के नाम पर 1.66 लाख, इंटरलॉकिंग कार्य पर पांच लाख, हैंडपंप मरम्मत के नाम पर 1.50 लाख, चाइल्ड फ्रेंडली शौचालय के नाम पर 3.95 लाख व नाली निर्माण के नाम पर करीब दो लाख रुपये समेत 75 लाख रुपये के गबन का खुलासा हुआ है। ऑडिट टीम को इन कार्यों के संबंध में कोई भी अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए। इसी प्रकार ग्राम पंचायत खरगूपुर में इसी वित्तीय वर्ष में विकास कार्यों के नाम पर 59 लाख रुपए आवंटित किए गए थे, लेकिन ग्राम प्रधान व पंचायत सचिव ने मिलीभगत कर 49.27 लाख रुपये डकार लिए। ऑडिट टीम की पड़ताल में जिन कार्यों के नाम पर पैसे निकाले जाने का खुलासा हुआ है। उनमें नाली में ह्यूम पाइप डालने के नाम पर तीन लाख 86 हजार, डिडिसिया कला बॉर्डर से राम कुमार के घर तक इंटरलॉकिंग कार्य के नाम पर दो लाख 57 हजार, प्राथमिक विद्यालय में इंटरलॉकिंग कार्य के नाम पर 49 हजार, खड़ंजा मरम्मत के नाम पर 77 हजार, शंभूपुरवा में स्वामी शरण के घर से राम मनोहर के घर तक इंटरलॉकिंग कार्य के नाम पर 33 हजार, सतीश के घर से राम सागर के घर तक इंटरलॉकिंग कार्य के नाम पर 2.38 लाख, अमर सिंह के घर से पीडब्ल्यूडी सड़क तक 1.27 लाख, ढोंगवा में सड़क के नाम पर 1.56 लाख, प्राथमिक विद्यालय पांडेपुरवा में अतिरिक्त कक्षा कक्ष के निर्माण के नाम पर 3.45 लाख, पूर्व माध्यमिक विद्यालय खरगूपुर में मिट्टी पटाई के नाम पर किसान कंस्ट्रक्शन को 1.89 लाख का भुगतान व हैंडपंप मरम्मत के नाम पर दिनेश ट्रेडर्स को 1.67 लाख रुपए का भुगतान शामिल है। इसी तरह नकहा स्कूल में मरम्मत के नाम पर 1.17 लाख व जुलाई महीने में तालाब में पानी भरने के नाम पर 1.04 लाख रुपए निकाल लिए गए। ऑडिट टीम ने पड़ताल में जमीन कार्यों के अभिलेख तलब किए तो प्रधान व सचिव कोई भी अभिलेख उपलब्ध नहीं करा सके।
सूत्र बताते हैं कि इसी वित्तीय वर्ष में ग्राम पंचायत पक्का को विकास कार्यों के लिए 1.09 करोड़ रुपये मिले थे। धनराशि के बदले पसका गांव में सोकपिट के निर्माण के नाम पर 1.65 लाख, इंटरलॉकिंग पर 9.86 लाख हैंडपंप की मरम्मत के नाम पर 2.60 लाख व स्ट्रीट लाइट लगाने के नाम पर 1.50 लाख रुपए का खर्च दिखाया गया है। लेकिन इन कार्यों की जांच के दौरान किसी भी काम के अभिलेख जांच टीम को नहीं मिले ऑडिट टीम ने इस गांव में कुल 82.40 लाख का घोटाला पकड़ा है। इस सम्बंध मं जिला पंचायत राज अधिकारी लालजी दूबे ने कहा कि ऑडिट के दौरान संबंधित ग्राम पंचायतों द्वारा ऑडिट टीम को अभिलेखों नहीं उपलब्ध कराए गए हैं। अभिलेखीय आधार पर टीम ने गबन की पुष्टि की है। फिलहाल परसपुर के एडीओ पंचायत को पत्र जारी कर संबंधित ग्राम पंचायतों के सचिवों से ऑडिट टीम को अभिलेख उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। जांच के दौरान जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।

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जानकी शरण द्विवेदी
