जानकी शरण द्विवेदी
गांडा। प्रख्यात शिक्षाविद डॉ. धर्माधिकारी एनएस. ने कहा है कि नैक मूल्यांकन के लिए कालेज को उच्च स्तरीय तकनीक से जोड़कर महाविद्यालय में होने वाली गतिविधि की फोटो जिओ टैग के साथ नियमित रूप से अपनी वेबसाइट पर अपलोड होना जरूरी है। वह स्थानीय श्री लाल बहादुर शास्त्री महाविद्यालय को नैक मूल्यांकन के लिए खुद को तैयार करने हेतु की जाने वाली तैयारियों एवं अभिलेखीकरण के बारे में जानकारी दे रहे थे। कालेज में आयोजित एक दिवसीय सेमिनार में प्रतिभाग कने के लिए पुणे से आए डा. धर्माधिकारी ने कहा कि नैक पिअर टीम प्रमाणीकरण चाहती है। इसलिए सभी विभागों की अकादमिक एवं सृजनात्मक सक्रियताओं को साक्ष्य सहित कालेज की वेबसाइट पर हरहाल में अपलोड किया जाना चाहिए। नैक टीम यह भी देखेगी कि शिक्षण संस्थान जन संचार तकनीक का कितना इस्तेमाल करती है। कितनी स्मार्ट कक्षाएँ हैं? परिणाम आधारित अध्ययन-अध्यापन हो रहा है या नहीं? अन्य संस्थाओं से हर विभाग की ओर से संस्था-प्रमुख ने एमओयू हस्ताक्षर किया है या नहीं? शिक्षण-अधिगम में तकनीक का इस्तेमाल कितना हो रहा है? पुस्तकालय-वाचनालय की स्थिति कैसी है? विद्यार्थी नियमित वाचनालय में अध्ययन करते हैं या नहीं? खेल के मैदान में खिलाड़ी विद्यार्थियों को यथावश्यक सुविधाएँ या प्रोत्साहन दिया जाता है? ऐसी ढेर सारी छोटी-बड़ी बातें महाविद्यालय के प्रत्यायन को उच्चीकृत करती हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षण प्रविधि, शोध प्रविधि, करियर काउंसलिंग की उत्कृष्टता के साथ संस्थान के वातावरण को समग्रता में सीखने लायक, सकारात्मक और ऊर्जस्वित रखना होगा। विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए महाविद्यालय के प्रत्येक विभाग को काम करना होगा। विद्यार्थियों में सामूहिक परिचर्चा और विचार मंथन के द्वारा उनका विकास किया जाना चाहिए। उन्होंने कार्यशाला में अपनी महत्त्वपूर्ण प्रस्तुति के दौरान कहा कि महाविद्यालय को अपने विजन और मिशन को केवल प्रपत्रों या वेबसाइट पर प्रदर्शित ही नहीं करना चाहिए, अपितु उसके अनुरूप उत्पादकता एवं साक्ष्य आधारित कार्य करके दिखाना भी होगा। तब नैक की अच्छी ग्रेडिंग प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सूचना प्रौद्योगिकी का प्रत्येक स्तर पर उपयोग करना आवश्यक है। संस्था की अनन्यता क्या है? यह पहचानने और प्रदर्शित करने की जरूरत है। कार्यशाला का प्रारंभ दीप प्रज्वलन और वाग्देवी के स्तवन से हुआ। आईक्यूएसी के समन्वयक प्रो. राम समुझ सिंह ने पुष्पगुच्छ, प्राचार्य प्रो. रवींद्र कुमार पाण्डेय ने स्मृति चिह्न भेंटकर मुख्य अतिथि एवं वक्ता को सम्मानित किया। कार्यशाला का संचालन हिंदी विभाग के प्राध्यापक प्रो. जय शंकर तिवारी ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
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