प्रकृति हमारी मां ही नहीं, अपितु सर्वश्रेष्ठ चिकित्सक भी-सुधांशु द्विवेदी
संवाददाता
गोंडा। राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा दिवस के अवसर पर औषधि रहित चिकित्सा पद्धति के माध्यम से सकारात्मक मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने हेतु जिसे प्राकृतिक चिकित्सा कहा जाता है। आयुष मंत्रालय (आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी), प्राकृतिक चिकित्सा दिवस मनाया जाता है। प्राकृतिक चिकित्सा दिवस के अवसर पर योगाचार्य सुधांशु द्विवेदी ने बताया कि रोग का कारण जीवाणु नहीं बल्कि शरीर में जीवनी शक्ति के ह्रास के कारण विजातीय पदार्थों के पनपने हेतु अनुकूलन है। प्रकृति स्वयं में सबसे बड़ी चिकित्सक है शरीर में स्वयं को रोगों से बचाने व अस्वस्थ होने पर पुनः स्वस्थता प्राप्त करने की क्षमता होती है। योगाचार्य सुधांशु द्विवेदी ने बताया कि प्राकृतिक चिकित्सा एक उपचार पद्धति एवं जीवन पद्धति है, जिसमें प्राकृतिक रूप से वैज्ञानिक तरीकों का प्रयोग किया जाता है। यह चिकित्सा की परंपरागत विधि है। इसके अंतर्गत रोगों का उपचार रोगाणुओं से शरीर की लड़ने की स्वाभाविक शक्ति में वृद्धि करना होता है। प्राकृतिक चिकित्सा जीवन तथा विज्ञान के बीच संपूर्ण क्रांति है। प्राकृतिक चिकित्सा के अंतर्गत अनेक पद्धतियां जैसे जल चिकित्सा, मिट्टी चिकित्सा, सूर्य चिकित्सा, ठंडी पट्टी शुद्धीकरण, एक्युपंचर, एक्यूप्रेशर, बस्ति आदि होती हैं। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक चिकित्सा का उद्देश्य प्रकृति की गोद में रहकर प्रकृति में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध प्राकृतिक तत्वों का उचित प्रयोग करके रोग के मूल कारण को नष्ट करना है। यह चिकित्सा प्राकृतिक तत्वों के अनुरूप एक जीवन शैली पद्धति है। अंत में योगाचार्य सुधांशु द्विवेदी ने बताया कि प्राकृतिक चिकित्सा द्वारा शारीरिक, मानसिक सामाजिक एवं अध्यात्मिक आदि सभी पक्षों की चिकित्सा की जाती है।
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जानकी शरण द्विवेदी
