Sunday, February 8, 2026
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Gonda : परिवार नियोजन में पुरुष निभाएं अपनी जिम्मेदारी

जानकी शरण द्विवेदी

गोंडा। परिवार नियोजन सेवाओं को सही मायने में धरातल पर उतारने और समुदाय को छोटे परिवार के बड़े फायदे की अहमियत समझाने की हरसम्भव कोशिश सरकार और स्वास्थ्य विभाग द्वारा अनवरत की जा रही है। यह तभी फलीभूत हो सकता है, जब पुरुष भी खुले मन से परिवार नियोजन साधनों को अपनाने को आगे आयें और उस मानसिकता को तिलांजलि दे दें कि यह सिर्फ और सिर्फ महिलाओं की जिम्मेदारी है। इसमें जो सबसे बड़ी दिक्कत सामने आ रही है, वह उस गलत अवधारणा का परिणाम है कि पुरुष नसबंदी से शारीरिक कमजोरी आती है। इस भ्रान्ति को मन से निकालकर यह जानना बहुत जरूरी है कि महिला नसबंदी की अपेक्षा पुरुष नसबंदी अत्यधिक सरल और सुरक्षित है। इसलिए दो बच्चों के जन्म में पर्याप्त अंतर रखने के लिए और जब तक बच्चा न चाहें तब तक पुरुष अस्थायी साधन कंडोम को अपना सकते हैं। वहीं परिवार पूरा होने पर परिवार नियोजन के स्थायी साधन नसबंदी को भी अपनाकर अपनी अहम जिम्मेदारी निभा सकते हैं। यह कहना है मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ आरएस केसरी का।
पुरुष नसबंदी विधा में प्रशिक्षित जिला चिकित्सालय के सर्जन डॉ वीके गुप्ता का कहना है कि पुरुष नसबंदी चंद मिनट में होने वाली आसान शल्य क्रिया है। यह 99.5 फीसदी सफल है। इससे यौन क्षमता पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ता है। महिला नसबंदी की अपेक्षा पुरुष नसबंदी बेहद आसान है और इसमें जटिलता की गुंजाइश भी कम है। पुरुष नसबंदी होने के कम से कम तीन महीने तक परिवार नियोजन के अस्थायी साधनों का प्रयोग करना चाहिए, जब तक शुक्राणु पूरे प्रजनन तंत्र से खत्म न हो जाएं। नसबंदी के तीन महीने के बाद वीर्य की जांच कराने पर यदि वीर्य में शुक्राणु न पाए जाएं, तो नसबंदी को सफल माना जाता है। एसीएमओ आरसीएच डॉ एपी सिंह का कहना है कि नसबंदी की सेवा अपनाने से पहले चिकित्सक की सलाह भी जरूरी है। दो बच्चों के बाद 40 वर्ष की उम्र में पुरुष नसबंदी अपनाने वाले संतराम का कहना है कि परिवार नियोजन के अस्थायी साधन के इस्तेमाल में कोई दिलचस्पी नहीं थी और अब आगे कोई बच्चा भी नहीं चाहिए था, अस्थायी साधनों को अपनाने का कोई मतलब भी नहीं था। पत्नी की सहमति से खुद की नसबंदी का निर्णय लिया। नसबंदी के अपने अनुभवों का साझा करते हुए संतराम बताते हैं कि हल्की एनेस्थिसिया दी जाती है, जिससे दर्द नहीं होता। चंद मिनट में नसबंदी हो जाती है। नसबंदी के बाद आदमी अपने दैनिक कार्य कर सकता है। नसबंदी की सफलता जांच होने तक असुरक्षित शारीरिक संबंध होने से बचना होता है। नसबंदी सफल होने के बाद यौन सुख में कोई कमी नहीं आती है।
एनएचएम के डीपीएम अमरनाथ बताते हैं कि गोंडा जनपद मिशन परिवार विकास जनपद में शामिल है। अतः जिले में पुरुष नसबंदी करवाने पर लाभार्थी को तीन हजार रुपये उसके खाते में दिये जाते हैं। पुरुष नसबंदी के लिए चार योग्यताएं प्रमुख हैं पुरुष विवाहित होना चाहिए, उसकी आयु 60 वर्ष या उससे कम हो और दंपति के पास कम से कम एक बच्चा हो, जिसकी उम्र एक वर्ष से अधिक हो। पति या पत्नी में से किसी एक की ही नसबंदी होती है। गैर सरकारी व्यक्ति के अलावा अगर आशा, एएनएम और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी पुरुष नसबंदी के लिए प्रेरक की भूमिका निभाती हैं, तो उन्हें भी 400 रुपये प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान है। जिला परिवार नियोजन एवं सामग्री प्रबंधक सलाहुद्दीन लारी ने बताया कि जिले में वित्तीय वर्ष 2020-21 में पांच जबकि 2021-22 में छह पुरुषों ने नसबंदी करवाई है। कंडोम के इस्तेमाल की बात करें, तो इस वर्ष 2021-22 में 04.18 लाख कंडोम सरकारी क्षेत्र से इस्तेमाल हुए हैं। यूपीटीएसयू के डीएफपीएस राघवेन्द्र पाण्डेय बताते हैं कि परिवार नियोजन इन्डेमिनिटी स्कीम के तहत नसबंदी विफल होने पर 60 हजार रुपए, नसबंदी के बाद सात दिनों के अंदर मृत्यु हो जाने पर 04 लाख रुपए, नसबंदी के 8 से 30 दिनों के अंदर मृत्यु हो जाने पर 50 हजार रुपए तथा नसबंदी के बाद 60 दिनों के अंदर जटिलता होने पर इलाज के लिए 50 हजार रुपए की क्षतपूर्ति धनराशि प्रदान की जाती है।

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