Wednesday, April 1, 2026
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Gonda : ‘पतंजलि’ के नाम का प्रयोग बंद करें बाबा रामदेव-बृजभूषण

इसके लिए खड़ा करेंगे जनान्दोलन, जरूरत पड़ी तो करेंगे कानूनी कार्रवाई

अरबों-खरबों कमाने के बावजूद पतंजलि की जन्मभूमि को भुला बैठे रामदेव व बालकृष्ण

जानकी शरण द्विवेदी

गोंडा। कैसरगंज से भाजपा सांसद व भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह ने कहा है कि बाबा रामदेव व आचार्य बालकृष्ण ने महर्षि पतंजलि के नाम का इस्तेमाल करके अरबों-खरबों का व्यावसायिक साम्राज्य तो खड़ा कर लिया, किन्तु उनकी जन्मभूमि के लिए कुछ भी नहीं किया। उन्हें अपने ब्राण्ड में इस नाम का इस्तेमाल बंद करना चाहिए। इसके लिए वह देवीपाटन मण्डल के लोगों को साथ लेकर एक बड़ा जन आन्दोलन खड़ा करेंगे तथा आवश्यक हुआ तो इसके लिए कानूनी प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी। वह गुरुवार को पूर्वान्ह जिला मुख्यालय से करीब 30 किमी. दूर वजीरगंज विकास खण्ड के अन्तर्गत कोंडर ग्राम पंचायत में महर्षि पतंजलि की जन्मस्थली पर पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे।
भाजपा सांसद ने कहा कि अयोध्या से सटा गोंडा जनपद अनेक महापुरुषों की जन्मभूमि व कर्मभूमि रहा है। रामचरित मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास की जन्मभूमि राजापुर, तारों की गणना करने वाले ऋषि पाराशर की जन्मभूमि पारासराय, स्वामी नारायण सम्प्रदाय के प्रणेता भगवान घनश्याम की जन्मभूमि छपिया के साथ ही वाराह भगवान की जन्मभूमि सूकरखेत भी इसी जिले में है। विश्व का सबसे विशाल शिवलिंग जिले के पृथ्वीनाथ मंदिर का माना जाता है। तुलसीपुर में स्थित शक्तिपीठ देवीपाटन भी पूर्व में गोंडा जिले का ही अंश था। इसी प्रकार योग के प्रणेता महर्षि पतंजलि की जन्मभूमि भी उत्तर प्रदेश के गोंडा ज़िले के वजीरगंज विकास खण्ड के कोंडर गांव में हैं। यह स्थान अयोध्या से मात्र 35 किमी. की दूरी पर है। उन्होंने कहा कि मां गोणिका के गर्भ से उत्पन्न हुए शेषावतार कहे जाने वाले महर्षि पतंजलि त्रिजट ब्राह्मण थे। विद्वान सूत्रकार, वृत्तिकार और भाष्यकार को त्रिजट ब्राह्मणों की तीन जटाओं का प्रतीक मानते हैं। विश्व में महर्षि पतंजलि का अनोखा ‘भाष्य‘ प्रचलित है। यह अपनी शैली के कारण विश्व के अन्य ग्रंथों से सर्वथा भिन्न है। यहां तक कि महर्षि ने भी अपने महाभाष्य में स्वयं को कई बार गोनर्दीय कहा है। बताते चलें कि महराजा दशरथ की गायों के स्वछंद विचरण के उपरांत नाद करने के कारण अयोध्या से सटे इस भूभाग को प्राचीन काल में गोनार्द कहा जाता था, जो कालांतर में गोंडा कहा जाने लगा। सांसद ने कहा कि महर्षि पतंजलि अपने शिष्यों को शिक्षा देते अचानक सर्पाकार होकर कोंड़र झील में विलुप्त हो गए थे। इसलिए कई किमी. क्षेत्र में विस्तारित कोंडर झील का आकार भी सर्पाकार है। बाद में उन्होंने काशी के नागकुआं के पास अपनी कर्मभूमि बनायी थी।
अपने बयानों को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहने वाले सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने इस बार पतंजलि संस्थान को निशाने पर लिया है। उन्होंने कहा कि बाबा रामदेव व आचार्य बालकृष्ण ने महर्षि पतंजलि के बताए रास्ते पर चलकर देश और दुनिया में बहुत बड़ा व्यावसायिक साम्राज्य खड़ा किया है। मुझे उनके साम्राज्य से कोई विरोध नहीं है, लेकिन उनके नाम पर घी, तेल, साबुन, मशाला, अण्डर वीयर, हाफ पैण्ट का व्यापार करना कहां तक उचित है? उन्होंने देश और दुनिया के लोगों से अपील किया कि वे जब भी अयोध्या आएं तो मात्र 35 किमी दूर महर्षि पतंजलि की जन्मभूमि कोंडर जरूर आएं और देखें कि उनके जन्मभूमि की क्या दुर्दशा है। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया को हम दिखाना चाहते हैं कि वे जिनके नाम का घी खाते हैं, उनके जन्मभूमि की दशा क्या है? सांसद ने कहा, ‘महर्षि पतंजलि के चरणों में बैठकर आज हम शपथ लेते हैं कि हम गोंडा के लोग हिन्दू मुसलमान सभी मिलकर, उनकी प्रतिष्ठा के अनुरूप यहां पर एक भब्य मंदिर बनाएंगे।’ सांसद ने सवाल किया, ‘चड्ढ़ी-बनियान बेंचने में महर्षि के नाम का इस्तेमाल क्यों? इसका हक आपको किसने दिया? अब तो आप कुछ कर भी नहीं सकते। आपके हाथ से तीर निकल चुका है। कुछ वर्ष पूर्व आप गोंडा आए, किन्तु उनकी जन्मभूमि तक आना मुनासिब नहीं समझा। रहा सवाल आपके घी का, तो आप बेंचें, मुझे उस पर कोई आपत्ति नहीं है, किन्तु आम चर्चा है कि आपका घी बहुत जल्दी खराब हो जाता है। यह ज्यादा दिन तक रुक नहीं पाता।’ सांसद ने चेतावनी दी, ‘अपने ब्राण्ड में इस नाम का इस्तेमाल बंद कीजिए। अपने नाम से अपना ब्राण्ड बनाइए। मैं इसका पुरजोर विरोध करूंगा। इसके लिए गोंडा वासियों के साथ मिलकर एक बड़ा आन्दोलन खड़ा करूंगा और प्रकरण में विधिक राय भी ली जाएगी कि इसमें कानूनी रूप से क्या किया जा सकता है?’
सांसद ने कहा कि वह सनातन संस्कृति व ऋषि मुनि हमारी पूंजी हैं। उनकी उपेक्षा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सिंह ने स्मरण दिलाया कि सुश्री मायावती ने मुख्यमंत्री रहते गोंडा का नाम बदलकर जयप्रकाश नारायण नगर कर दिया था। उनका यह ऐलान गोनार्द क्षेत्र के रहने वाले लाखों लोगों की आस्था व संस्कृति का अपमान था। मैंने कार्यक्रम स्थल पर ही इसका विरोध किया और पूरे जिले में पैदल चलकर जन जागरण यात्रा चलाते हुए उन्हें नाम न बदलने के लिए मजबूर कर दिया था। इसी प्रकार एक बार पुनः महर्षि पतंजलि की जन्मभूमि के पुनरुद्धार के लिए आन्दोलन शुरू किया जाएगा। सांसद ने कहा कि दो दिन पूर्व बाराबंकी जिले के टिकैत नगर में आयोजित एक आध्यात्मिक कार्यक्रम में व्यास पीठ अतुल कृष्ण भारद्वाज की महराज के निर्देश पर मैंने एक संक्षिप्त भाषण दिया था, जिसमें उपस्थित लोगों से स्वस्थ रहने के लिए गोपालन करते हुए उसके दूध व घी का इस्तेमाल करने की बात कही थी। साथ ही यह भी कहा था कि ‘रामदेव’ का घी खाकर आप स्वस्थ नहीं रह सकते। सांसद ने स्पष्ट किया कि यद्यपि मैंने अपने सम्बोधन में बाबा रामदेव का नाम नहीं लिया था, किन्तु कल (बुधवार) देर शाम आचार्य बालकृष्ण का मेरे पास फोन आया और मेरे उद्बोधन पर आपत्ति व्यक्त करते हुए अपने ब्राण्ड की तारीफ करते हुए एक वीडियो जारी करने को कहा गया था। इसी क्रम में वह आज अपने सहयोगियों के साथ महर्षि पतंजलि की जन्मभूमि पर आए हैं, कि वे इस स्थान की दुर्दशा को देश-दुनिया के सामने रख सकें। उन्होंने कहा कि हालांकि यहां का विकास कराना स्थानीय सांसद होने के नाते मेरी भी जिम्मेदारी थी, किन्तु यह स्थान प्राथमिकता में नहीं आ पाया। इस मौके पर जिला पंचायत अध्यक्ष घनश्याम मिश्र, पूर्व मंत्री राम बहादुर सिंह, सांसद प्रतिनिधि महेन्द्र सिंह, ब्लाक प्रमुख वजीरगंज के प्रतिनिधि पंकज कुमार सिंह आदि मौजूद रहे।

Gonda : ‘पतंजलि’ के नाम का प्रयोग बंद करें बाबा रामदेव-बृजभूषण

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