जानकी शरण द्विवेदी
गोंडा। उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में एक अदालत ने एक नाबालिग किशोरी को भगा ले जाकर दुष्कर्म करने के आरोप में 20 वर्षीय युवक को दोषी करार देते हुए सोमवार को 20 वर्ष का सश्रम कारावास तथा सात हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदण्ड की धनराशि अदा न करने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वरिष्ठ लोक अभियोजक अशोक कुमार सिंह व सुनील कुमार मिश्र ने बताया कि जिले के मनकापुर थाना क्षेत्र के ग्राम धुसवा निवासी एक व्यक्ति ने छह दिसम्बर 2020 को स्थानीय थाने पर सूचना दिया कि उनके गांव में सरकारी स्कूल का निर्माण हो रहा था। वहां मजदूरी करने के लिए दूसरे जिले से मजदूर आए हुए थे। उनमें राजन पुत्र बिरजू निवासी बरवा छत्तरदास थाना हाटा जिला कुशीनगर भी शामिल था। वह उनकी 15 वर्षीय पुत्री को बहला फुसलाकर भगा ले गया है। स्थानीय थाने पर भादवि की धारा 363 के तहत अभियोग दर्ज कर विवेचना शुरू की गई। विवेचक ने भादवि की धारा 363, 366, 376 व पाक्सो एक्ट की धारा 3/4 के तहत राजन के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय प्रेषित किया। सत्र परीक्षण के दौरान अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) चंद्र मोहन चतुर्वेदी ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करते हुए अभियोजन व बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं को सुनने के उपरांत आरोपी राजन को दोषी करार देते हुए भादवि की धारा 363 में तीन वर्ष के सश्रम कारावास व एक हजार रुपए जुर्माना, भादवि की धारा 366 में चार वर्ष का सश्रम कारावास और एक हजार रुपए का जुर्माना तथा पाक्सो एक्ट में 20 वर्ष का सश्रम कारावास व पांच हजार रुपए जुर्माना से दंडित किया। आदेश के अनुसार, सभी भौतिक सजाएं साथ-साथ चलेंगी तथा अर्थदण्ड अदा न किए जाने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। विचारण के दौरान जेल में बिताई गई अवधि कुल सजा की अवधि में समायोजित की जाएगी।
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जानकी शरण द्विवेदी
