दलीय प्रत्याशियों के साथ निर्दलियों ने भी झोंक दी अपनी ताकत
जानकी शरण द्विवेदी
गोंडा। 18वीं लोकसभा के लिए आगामी 20 मई को गोंडा संसदीय सीट पर होने वाले मतदान के लिए जनमत अपने पक्ष में करने हेतु दलगत प्रत्याशी तो मेहनत कर ही रहे हैं, निर्दल भी उनसे कम नहीं हैं। इसका नजारा देखने को मिला मई माह की 16 तारीख को। जेठ की दुपहरी तप रही है। ऐसा लग रहा है, जैसे आकाश से सूर्यदेव अग्नि की वर्षा कर रहे हों। सूर्य के प्रचंड ताप से धरती तवा की भांति जल रही है। गोंडा शहर से सटे एक गांव में बोलेरो पहुंचती है। गाड़ी पर ध्वनि विस्तारक यंत्र लगा है, जिस पर एक महिला की आवाज में कुछ प्रचारित होता है। सूर्यदेव के प्रचण्ड आतप से गांव से सटकर बने हुए कुछ घरों के समीप लगे दरख्त के नीचे बैठे हुए लोग चुनावी चर्चा में मशगूल थे, किंतु गाड़ी दिखाई देते ही वह समझ जाते हैं कि चुनाव प्रचार के लिए किसी प्रत्याशी का आगमन हुआ है। एक महिला प्रत्याशी अपने गाड़ी से उतरकर उनकी तरफ बढ़ती हैं। लोग खड़े हो जाते हैं और वह उन्हें हाथ जोड़कर प्रणाम करती हैं। अपने लिए वोट और सपोर्ट मांगती हैं। जी हां, गुरुवार को ऐसा कुछ दृश्य था देवीपाटन मण्डल मुक्ति मोर्चा समर्थित निर्दल प्रत्याशी श्रीमती अरुणिमा पाण्डेय के प्रचार के दौरान।
वैसे तो अरुणिमा पाण्डेय पहली बार राजनीति के मैदान में उतरी हैं, किंतु उनकी बातें एक परिपक्व राजनेता की तरह होती हैं। लोकसभा क्षेत्र के पिछड़ेपन का सवाल वह मजबूती से उठाती हैं। मतदाताओं से उनका कहना है कि यहां से चुनाव लड़ रहे भाजपा और सपा के प्रत्याशियों से आप सवाल करें कि उन्होंने क्षेत्र के विकास के लिए क्या किया? वर्तमान सांसद कीर्तिवर्धन सिंह को वह गंभीरता से कटघरे में खड़ी करती हैं। कहती हैं, 1971 के बाद से चार बार उनके पिता जी यहां के सांसद थे। चार बार वह खुद इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। पांचवीं बार चुनाव मैंदान में हैं। क्या किया आखिर उन्होंने क्षेत्र के विकास के लिए? विश्व प्रसि़द्ध आइटीआई मनकापुर की इतनी दुर्दशा क्यों है? आजादी के 77 वर्षों बाद भी गोंडा में उद्योग धंधे व कल कारखाने क्यों नहीं लग पाए? लाखों युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों को पलायन क्यों करना पड़ रहा है? गोंडा-अयोध्या राजमार्ग अत्यंत संकरा होने के कारण प्रति सप्ताह सड़क हादसे होते हैं। हमारी गैर जिम्मेदारी के कारण इन बेकसूरों की मौतें कब तक होती रहेंगी? विश्वविद्यालय दूसरे जिले में चला गया, वह क्यों मौन रहे? कौन थी मजबूरी थी आखिरी उनकी? वह लोगों को सवाल पूछने के लिए प्रेरित करती हैं? कहती हैं कि आपने जिसे वोट देकर सांसद बनाया था, उससे सवाल करना आपका अधिकार भी है और कर्तव्य भी, क्योंकि आप एक बार फिर अपना नेता चुनने जा रहे हैं।
सपा प्रत्याशी श्रेया वर्मा को भी वह घेरने में चूकती नहीं हैं। कहती हैं, उनके बाबा जी चार बार कैसरगंज से सांसद थे। एक बार गोंडा से सांसद बने और केंद्र में कैबिनेट मंत्री भी रहे। क्या किया उन्होंने इस क्षेत्र के लिए? चुनाव के पूर्व केवल फर्जी शिलान्यास करके लोगों को गुमराह किया। जनता अब समझदार हो रही है। ऐसे लोगों के झांसे में नहीं आने वाली। वह अपना एजेंडा और चुनाव चिन्ह बताना नहीं भूलतीं। वह कहती हैं कि आपके हर सुख दुख में मैं आपकी सहभागी बनूंगी। क्षेत्र के विकास के लिए ढांचागत बुनियादी सुविधाओं को बढ़ाने पर जोर होगा। गोंडा शहर में सीवर लाइन, रिंग रोड, औद्योगिक आस्थान की स्थापना तथा गोंडा-अयोध्या राजमार्ग का चौड़ीकरण उनकी शीर्ष प्राथमिकता में है। महिलाओं से मुलाकात करने पर वह कहती हैं कि मेरे चुनाव चिन्ह के बिना आपका काम नहीं चलने वाला। पूरे परिवार के कपड़े हमारे चुनाव चिन्ह से ही सिला जाएगा। इसलिए सिलाई मशीन याद रखना। 20 मई को अपने मतदान केंद्र पर जाकर सिलाई मशीन के सामने वाली नीली बटन को दबाकर अपनी बहू, बेटी और बहन के लिए वोट करना। आज उनके जनसम्पर्क के दौरान प्रेम कुमार पाण्डेय, देवनाथ मिश्र, केदार नाथ मिश्र, राघवेन्द्र प्रताप, अखिलेश्वर पाठक, अरुण पाण्डेय, नवदीप पाण्डेय, पंकज मिश्र, शैलेन्द्र, आदर्श, शिवकुमार, कुसुम मिश्रा, अंजली मिश्रा, प्रभावती, अंकिता आदि शामिल रहे। इसी प्रकार से गोंडा संसदीय सीट के अन्य प्रत्याशी सौरभ मिश्रा, विनोद कुमार सिंह, राघवेंद्र, राम उजागर व राज कुमार भी चुनाव प्रचार में पूरी ताकत लगाए हुए हैं।

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