‘टीबी हारेगा-देश जीतेगा’ नारे को मिलेगा नया आयाम
जानकी शरण द्विवेदी
गोंडा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जन्म दिन शनिवार को जनपद समेत पूरे देश में बड़े ही उत्सव और उल्लास के साथ मनाया गया। इस मौके पर आम नागरिकों, गैर सरकारी संगठनों व जन प्रतिनिधियों द्वारा जगह-जगह विभिन्न जनसेवा आधारित कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। प्रधानमंत्री जी का यह जन्म दिन जिले में उस वक्त और भी खास बना, जब यहां की तीन गैर सरकारी संगठनों सेवा संस्थाओं ने केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा चलाये गए प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान में सहयोग करते हुए जनपद के 25 क्षय (टीबी) रोगियों को संरक्षण प्रदान करने की घोषणा की। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ जय गोविन्द ने बताया कि हाल ही में क्षय रोग के खिलाफ देश की लड़ाई में तेज़ी लाने और वर्ष 2025 तक रोग को खत्म करने के प्रधानमंत्री द्वारा निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू द्वारा प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान का शुभारंभ किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य वर्ष 2025 तक देश से टीबी को खत्म करने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को पूरा करना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के आम नागरिकों, गैर सरकारी संगठनों व जन प्रतिनिधियों से टीबी रोगियों को उदारतापूर्वक संरक्षण देकर अभियान को ’जन आंदोलन’ बनाने का आह्वान किया है।
डॉ जय गोविन्द ने कहा कि 17 सितम्बर से शुरु हुए इस अभियान में प्रधानमंत्री के आह्वान का असर पहले ही दिन देखने को मिला है। पहले दिन ही जिले की तीन गैर सरकारी संगठनों स्वयंसेवी संस्थाओं ने 25 क्षय रोगियों को संरक्षण देने की घोषणा की है। उन्होंने बताया कि बाबू ईश्वर शरण फाउंडेशन और यूनिटी एजुकेशनल सोसाइटी द्वारा दस-दस तथा शांतीनगर मिशन हॉस्पिटल द्वारा पांच क्षय रोगियों को संरक्षण प्रदान किया जाएगा। यह संस्थाएं टीबी मरीजों को हर महीने पोषण किट उपलब्ध कराएंगी तथा उनकी सुख सुविधाओं के साथ सेहत का ख्याल रखेंगी। इसके साथ ही वे टीबी रोगियों का मनोबल बढ़ाते हुए बताएंगी कि संपूर्ण इलाज के बाद टीबी पूरी तरह से ठीक हो जाती है। संथाओं को रोगियों का वितरण आगामी दो अक्टूबर को किया जाएगा। क्षय रोग विभाग में तैनात चिकित्साधिकारी डॉ जितेंद्र मिश्रा का कहना है कि टीबी बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है, जो हवा के जरिए एक इंसान से दूसरे में फैलती है। यह आमतौर पर फेफड़ों से शुरू होती है। सबसे कॉमन फेफड़ों की टीबी ही है लेकिन यह ब्रेन, यूटरस, मुंह, लिवर, किडनी, गला, हड्डी आदि शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकती है। टीबी का बैक्टीरिया हवा के जरिए फैलता है। खांसने और छींकने के दौरान मुंह-नाक से निकलने वाली बारीक बूंदों से यह इन्फेक्शन फैलता है। वहीं चिकित्साधिकारी डॉ अमित भारती ने बताया कि टीबी के मरीज को उपचार के दौरान इस बात का खास ख्याल रखना चाहिए कि किसी भी सूरत में डॉक्टर द्वारा बताई गई दवा न छूटे। वह नियमित रूप से उन दवाओं को सेवन करे। जब तक डॉक्टर न कहें खुद से दवा बंद न करें। क्षय रोग विभाग के जिला समन्वयक विवेक सरन ने बताया कि सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर टीबी की जांच और इलाज बिल्कुल निःशुल्क है। टीबी उन्मूलन के निर्णायक जंग में लोगों का सहयोग जरूरी है।
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