Saturday, April 11, 2026
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Gonda : गौरा में रहना है, तो अल्ला-अल्ला कहना है-बृजभूषण सिंह

अपनी ही पार्टी के सांसद, विधायक व अधिकारियों पर बृजभूषण ने साधा निशाना

कहा-पीड़ित परिवार को 15 दिन में न्याय न मिला तो एक-एक से करूंगा हिसाब-किताब

जानकी शरण द्विवेदी

गोंडा। अक्सर पार्टी लाइन से हटकर तथा दबंगई वाला बयान देने के कारण चर्चा में रहने वाले कैसरगंज से भाजपा सांसद एवं भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह ने आज अपनी ही पार्टी के सांसद, विधायक, मण्डलायुक्त और पुलिस पर जमकर हमला बोला। उन्होंने सभी से 15 दिन के बाद हिसाब-किताब चुकता करने का ऐलान किया है। वह शुक्रवार को जिले के छपिया थाना क्षेत्र के अन्तर्गत तांबेपुर गांव की प्रधान श्रीमती ईश्वरवती के युवा पुत्र दुर्गेश सिंह उर्फ भोलू (23) को श्रद्धांजलि देने के लिए पहुंचे थे।
बृजभूषण शरण सिंह आज अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ मृतक के घर पहुंचे और परिजनों से मुलाकात की। इस मौके पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा को सम्बोधित करते हुए उन्होंने क्षेत्रीय भाजपा सांसद कीर्तिवर्धन सिंह और विधायक प्रभात वर्मा को निशाने पर रखा। उन्होंने देवीपाटन मण्डल के आयुक्त, जिले के एसपी, मनकापुर के सीओ और स्थानीय थाने की पुलिस पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, ‘हमारी पार्टी में कुछ लोग आते हैं। कोई एमपी का प्रत्याशी बनकर आता है, कोई विधायक का प्रत्याशी बनकर आता है। भारतीय जनता पार्टी ने जब उनको टिकट दे दिया, तो पार्टी के कार्यकर्ताओं ने तो उनको स्वीकार कर लिया, किंतु उन लोगों ने भारतीय जनता पार्टी को स्वीकार नहीं किया। क्योंकि हर गांव में पार्टी बंदी होती है और गुटाबाजी होती है। वह लोग जब पार्टी में आए, तो उनका गुट भी भाजपा में आ गया। कहने के लिए तो सबने भाजपा की मदद की, लेकिन वे लोग (बाहरी दल से आने वाले बड़े नेता) उसी को भाजपाई मानते हैं, जो इनके लिए कभी बूथ छापने (बूथ कैप्चरिंग करने) का काम करते थे। अटल जी (पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई) के जमाने के भाजपाई परिवार को भी यह भाजपाई नहीं मानते।’ सांसद ने कहा, ‘अब मैं बहुत गंभीर आरोप लगाना चाहता हूं। कार्यकर्ताओं ने तो इन्हें (सांसद कीर्तिवर्धन सिंह व विधायक प्रभात वर्मा) को स्वीकार कर लिया, किंतु इन्होंने पार्टी के मूल कार्यकर्ताओं को स्वीकार नहीं किया। आज स्थिति यहां तक हो गई है कि इनके क्षेत्र गौरा (विधानसभा) में रहना है तो अल्ला-अल्ला कहना है।’ उन्होंने खुद ही प्रश्न भी किया कि किसको कहना है और जवाब भी स्वयं ही दिया, ‘ठाकुर को अल्ला-अल्ला कहना है। बाभन को अल्ला-अल्ला कहना है। अन्य जातियों, दलितों को भी अल्ला-अल्ला कहना है। यहां तक कि कुर्मी समाज के भी जो लोग इनके साथ नहीं हैं, उन्हें भी अल्ला-अल्ला कहना है। अगर यहां रहना है तो अल्ला-अल्ला कहना है।’ सांसद ने किसी को नाम लिए बिना कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय और प्रदेश नेतृत्व से मैं मांग करता हूं कि एक कमेटी बनाकर यहां देखवा लें कि दूसरी पाटियों से आए आपके विधायक और सांसद लोग पुराने कार्यकर्ताओं के साथ क्या गुल खिला रहे हैं। मंच के पास में खड़े मनकापुर के पुलिस क्षेत्राधिकारी संजय तलवार की तरफ मुखातिब होते हुए भाजपा सांसद ने कहा, ‘यह सीओ साहब खड़े हैं। सीओ साहब इस कत्ल के जिम्मेदार हैं। करवाइए आप। ये इतने बड़े बंधुआ मजदूर हैं कि झिलाही में मेरा कार्यक्रम था, तो हेलीकॉप्टर ही नहीं उतरने दे रहे थे।’ क्षेत्रीय सांसद और विधायक पर आरोप लगाते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने कहा, ‘यहां की पुलिस विधायक जी और सांसद जी की बंधुआ मजदूर है।’
बाद में स्थानीय पत्रकारों से मुखातिब भाजपा सांसद ने कहा कि यह दोनों लोग (सांसद कीर्तिवर्धन सिंह व विधायक प्रभात वर्मा) बाहर से आए हुए हैं। 2014 तक दूसरी पार्टी में थे और जहां हम आज बैठे हैं, यह परिवार वरिष्ठ भाजपा नेता स्व. सत्यदेव सिंह के चुनाव (1989) में पार्टी के साथ था। 1991 में 1996, 1998 और 1999 में भी मेरे साथ था। 2004 और 2009 में भाजपा के साथ था। ये लोग जब से आए, तब से वह अलग है। मुझे राजनीतिक रंजिश की तो जानकारी थी किन्तु यह अहसास नहीं था कि इस प्रकार से हत्या हो जाएगी। यह हत्या राजनीतिक वर्चस्व के चलते करवाई गई है। सांसद ने कहा कि पीड़ित परिवार जिनका नाम ले रहा है और सबूत दे रहा है, उनके खिलाफ कार्रवाई करो। मृतक का हत्या से पूर्व का स्वयं का ऑडियो है, उसे सुनकर कार्रवाई करो। किन्तु यहां की पुलिस कुछ नहीं करेगी क्योंकि वह बंधुआ मजदूर है। उन्होंने कहा कि यहां जो भी पुलिस अधिकारी आता है, वह बंधुआ मजदूर हो जाता है। हत्या के बाद मौके पर एसपी के भी पहुंचने की जानकारी मिलने पर सांसद ने कहा कि आए होंगे। उनके आने से क्या फर्क पड़ता है? वह तो हर शुक्रवार को पूरे जिले की पुलिस को परेड के लिए बुला लेते हैं। तहरीर बदलने की जिक्र आने पर सांसद ने कहा कि यह एसपी बता सकते हैं कि तहरीर क्यों बदली गई? हमें तो लगता है कि ऐसा करके दोषी लोगों को बचाने का प्रयास किया गया है। पीड़ित परिवार को दबाव में लेकर तहरीर बदली गई। यहां पर उन्होंने खुली चेतावनी दी कि यदि 15 दिन के अंदर पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिला, तो वह आर-पार की लड़ाई लड़ने के लिए विवश होंगे। उन्होंने कहा, ‘हमारे कमिश्नर साहब बैठे-बैठे बड़े मौज ले रहे हैं। हिलबै नहीं करते। खाली बैठे-बैठे सैलरी ले रहे हैं। तो जरा उनसे भी हिसाब किताब मुझे करना है। 15 दिन बाद करूंगा सबसे हिसाब किताब।’ उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन को पीड़ित परिवार की बात सुननी चाहिए थी। बात नहीं सुनी गई, इसीलिए मुझे यहां पर आना पड़ा। बताते चलें कि बीते रविवार को गांव के बाहर भण्डारे के दौरान भोलू की दिन दहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। प्रकरण में मृतक के भाई राहुल सिंह ने क्षेत्रीय भाजपा विधायक प्रभात वर्मा के इशारे पर हत्या किए जाने का आरोप लगाते हुए तीन अभियुक्तों के खिलाफ तहरीर दी थी, किन्तु बाद में पुलिस ने मृतक की पत्नी से दूसरी तहरीर लेकर विधायक का नाम हटवा दिया था तथा इसी पर अभियोग पंजीकृत किया गया था। प्रकरण में अब तक एक महिला समेत तीन अभियुक्त गिरफ्तार हो चुके हैं। घटना के दिन ही सोशल मीडिया के माध्यम से बृजभूषण शरण सिंह ने ऐलान किया था कि गोंडा आने पर एक जुलाई को वह पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए उसके घर जाएंगे। इसी क्रम में वह दर्जनों गाड़ियों के काफिले के साथ आज मृतक के घर गए थे।

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