Saturday, March 7, 2026
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Gonda : इन योजनाओं का लाभ उठाएं असंगठित श्रमिक

निर्माणाधीन मेडिकल कालेज पर लगाया गया विधिक साक्षरता शिविर

संवाददाता

गोंडा। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ के निर्देशानुसार एवं जनपद न्यायाधीश रविन्द्र कुमार-प्रथम के आदेश के अनुपालन में तहसील सदर अन्तर्गत निर्माणाधीन राजकीय मेडिकल कालेज में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन प्राधिकरण के सचिव विश्व जीत सिंह की अध्यक्षता में किया गया। उन्होंने कहा कि श्रमिक समाज के विशिष्ट समूह होते हैं। इस कारण श्रमिकों के लिए बनाये गये विधान, एक सामाजिक विधान की अलग श्रेणी में आते हैं। श्रम विधानों की व्यापकता और उनके बढ़ते हुए महत्व को ध्यान में रखते हुए उन्हें एक अलग श्रेणी में रखा जाना उपयुक्त समझा जाता है। श्रमिक जो असंगठित श्रमिकों की श्रेणी में आते हैं, को जोखिम पूर्ण परिस्थितियों में कार्य करने, अस्थायी एवं अनियमित रोजगार, अनिश्चित कार्य अवधि, मूलभूत तथा कल्याण सुविधाओं आदि के अभाव के कारण इनकी स्थिति अत्यन्त कमजोर एवं दयनीय होती है। पर्याप्त कानूनी प्रावधानों के कारण कर्मकारों की सही जानकारी हासिल करना, जिम्मेदारी निर्धारित करना एवं सुधारात्मक उपाय अमल में लाने हेतु कर्मकारों की सुरक्षा, कल्याण एवं अन्य सेवा शर्तों को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से अधिनियमों का सृजन किया गया है। श्रम प्रवर्तन अधिकारी योगेश दीक्षित ने बताया कि उप्र भवन एंव सन्निर्माण कल्याण बोर्ड द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं को शामिल किया गया है, जिसमें श्रमिक पंजीयन कर कार्ड प्राप्त कर सकते हैं तथा बोर्ड द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं का लाभ ले सकते हैं। अपरिहार्य कारण से यदि श्रमिक की मृत्यु हो जाती है, तो उसका लाभ उसके परिवारजन को मिलता है। श्रमिक के बेटियों के विवाह हेतु अनुदान, पढायी-लिखायी हेतु अनुदान, पेंशन, बीमा आदि का लाभ श्रमिकों एवं उनके आश्रितों को दिया जाता है। यह योजना केवल उप्र शासन द्वारा संचालित किया जाता है। साथ ही श्रमिकों के हित में भारत सरकार द्वारा श्रम पोर्टल के माध्यम से ई श्रम कार्ड बनाया जा रहा है, जिस पर बीमा भी किया जाता है। इस अवसर पर तहसीलदार सदर परशुराम, सुमन श्रम प्रवर्तन अधिकारी योगेश दीक्षित आदि श्रमिकगण उपस्थित रहे।
इसी प्रकार आज ही वृद्ध आश्रम में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। सचिव ने बताया कि भारत में वृद्धजनों का पैर छूकर उन्हें सम्मान दिया जाता है तथा उन्हें भगवान के तुल्य माना जाता है। प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में वृद्धावस्था के चरण से गुजरना पड़ता है। परिवार में वृद्धजनों की उपस्थिति एवं मार्गदर्शन, परिवार एवं समाज दोनों के लिए कल्याणकारी होती है, परन्तु कुछ परिवार में आज भी बुजुर्गों के साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया जाता है। वृद्धजनों के विधिक अधिकार के सम्बन्ध में सचिव द्वारा दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 पर विशेष बल देते हुए यह बताया गया कि यदि पर्याप्त साधनों वाला कोई व्यक्ति अपने पिता या माता का, जो अपना भरण-पोषण करने में असमर्थ है, भरण पोषण करने में उपेक्षा करता है या भरण पोषण करने से इन्कार करता है, तो प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट, ऐसी उपेक्षा साबित हो जाने पर ऐसे व्यक्ति को पिता या माता का भरण पोषण करने के लिए मासिक भत्ता देने के सम्बन्ध में निर्देश दे सकते हैं। इसके अतिरिक्त सचिव द्वारा उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के विधि-व्यवस्था, सरकारी नीतियों एवं निःशुल्क विधिक सहायता प्राप्त करने की विस्तृत जानकारी दी गयी। वृद्ध आश्रम के प्रबन्धक राजेश श्रीवास्तव द्वारा बताया गया कि आज वृद्धाश्रम में कुल 72 वृद्ध मौजूद हैं, जिसमें 42 पुरुष एवं 30 महिला हैं। सचिव ने प्रबन्धक को प्रवास कर रहे वरिष्ठ नागरिकों के आश्रय एवं भण्डार/पाक गृह के साफ-सफाई हेतु आवश्यक निर्देश दिया गया। इस अवसर पर वृद्ध आश्रम के लेखाकार कुवंर शर्मा, योगेश प्रताप सिंह, सेवाकर्ता संतोष, अमर दीक्षित, आेंकार सिंह, पूनम सहित राजविन्द्र, कचंन, पप्पी आदि उपस्थित रहे।

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