Wednesday, January 14, 2026
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जेंडर चेंज विवाह: सोनू बना सोनिया, प्रेमी संग लिए 7 फेरे

प्यार की सीमाएं टूटीं, वायरल वीडियो से गांव में मचा बवाल!

जेंडर चेंज विवाह के बाद समलैंगिक जोड़े की शादी ने तोड़ा सामाजिक सन्नाटा

प्रादेशिक डेस्क

गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जनपद में जेंडर चेंज विवाह ने पूरे क्षेत्र को हतप्रभ कर दिया है। एक युवक ने विवाह की नई राह चुनते हुए अपना लिंग परिवर्तन कराया, नया नाम ‘सोनिया’ रखा और अपने प्रेमी प्रेम के साथ हिंदू रीति-रिवाजों के तहत मंदिर में सात फेरे लिए। यह विवाह सोशल मीडिया पर वायरल होते ही गांव में हड़कंप मच गया, जिससे इलाके में सामाजिक बहस छिड़ गई है।

सोनू ने लिया सोनिया का रूप, मंदिर में की शादी
यह घटना नेबुआ नौरंगिया थाना क्षेत्र के एक गांव की है, जहां खैरटिया शिव मंदिर में दोनों ने पूजा-पाठ कर विधिवत विवाह किया। सोनू नामक युवक ने अपने प्रेम के लिए जेंडर चेंज विवाह का साहसी निर्णय लिया और लिंग परिवर्तन करवाकर सोनिया बन गया। प्रेमी प्रेम के साथ जीवन भर साथ निभाने की कसमें खाते हुए दोनों ने मंदिर परिसर में शादी की सभी रस्में निभाईं।

शादी का वीडियो इंटरनेट पर आते ही गांव के लोगों की निगाहों में आ गया और फिर शुरू हुआ विवाद और चर्चा का दौर। वायरल वीडियो ने जहां एक वर्ग को चौंका दिया, वहीं कुछ लोगों ने इसे सामाजिक परंपराओं के खिलाफ बताया।

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विवाह के बाद विरोध शुरू, गांव छोड़कर भागा नवविवाहित जोड़ा
वीडियो वायरल होते ही गांव में जेंडर चेंज विवाह को लेकर गहमागहमी बढ़ गई। परंपरावादी ग्रामीणों ने इसे सामाजिक मर्यादा और धार्मिक रीति-नीति के खिलाफ बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया। गांव में तनाव का माहौल बनते ही दोनों प्रेमी अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हो गए और विवाह के कुछ ही समय बाद गांव छोड़कर चले गए।

स्थानीय पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लिया है, लेकिन अभी तक किसी पक्ष से कोई भी शिकायत थाने में दर्ज नहीं कराई गई है। पुलिस ने साफ किया है कि यदि कोई कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होती है तो त्वरित कार्रवाई की जाएगी।

ग्रामीण समाज की असहज चुप्पी, जेंडर चेंज विवाह से टूटीं परंपराएं
हालांकि भारत में समलैंगिक रिश्तों को धीरे-धीरे सामाजिक स्वीकृति मिल रही है, लेकिन ग्रामीण भारत में ऐसी घटनाएं अब भी विरोध और असहमति का कारण बनती हैं। यह जेंडर चेंज विवाह स्पष्ट रूप से ग्रामीण परिवेश की मानसिकता, धार्मिक परंपराओं और आधुनिक प्रेम के बीच टकराव को उजागर करता है।

इस विवाह को लेकर कुछ लोग इसे साहसिक और प्रेम की जीत कह रहे हैं, जबकि कुछ इसे समाज के ताने-बाने को तोड़ने वाला कदम मानते हैं। सामाजिक रूढ़ियों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के इस संघर्ष में यह घटना नई बहस को जन्म देती है।

विवाह कानून से परे, लेकिन भावनाओं में गहराई
भारत में अभी तक समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता नहीं मिली है, लेकिन इस जेंडर चेंज विवाह ने भावनात्मक रिश्तों को कानूनी दायरे से बाहर रखकर समाज के सामने एक बड़ी चुनौती रख दी है। जहां एक तरफ शहरी भारत LGBTQ+ अधिकारों के समर्थन में खड़ा हो रहा है, वहीं ग्रामीण भारत अभी भी धार्मिक, पारंपरिक और सामाजिक संरचनाओं में बंधा हुआ दिखता है।

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