अदब के दीवानों को दी गई जज़्बाती सौगात, बेबाक कलाम और गर्व के नग्मों ने किया मंत्रमुग्ध
संवाददाता
गोंडा। फुलवारी पब्लिक स्कूल में सोमवार की शाम को अदब और जज़्बात का ऐसा संगम रचा, जिसे सुनने हजारों श्रोता खिंचे चले आए। फुलवारी पब्लिक स्कूल मुशायरा में देश के नामचीन शायरों और कवित्रियों ने अपने बेबाक कलाम से श्रोताओं का दिल जीत लिया। मुशायरा में याकूब ’अज्म’ गोण्डवी ने अपनी मशहूर पंक्तियों “खूब हमने सजाई आज की शाम-आबरूये ग़ज़ल खुमार के नाम“ से समां बांध दिया। वहीं, किरन भारद्वाज ने “कमज़ोर नहीं हूँ कि बिखर जाऊंगी, वो हौसला हूँ बन के संवर जाऊँगी“ पढ़कर महिलाओं में नई ऊर्जा का संचार किया।
फुलवारी पब्लिक स्कूल मुशायरा में वसीम मज़हर गोरखपुरी ने देशभक्ति का जज़्बा जगाते हुए कहा, “चलो अब सर पे अपने हम तिरंगा बाँध कर निकलें – हमें हिन्दोस्ताँ की सरहदें आवाज़ देती हैं।“ इस पर पूरा पंडाल तालियों से गूंज उठा। अली बाराबंकवी ने बेटियों पर फख्र जताते हुए कहा, “कितना नसीब वाला हूँ मैं भी जहान में मौला तेरे करम से मेरे घर हैं बेटियाँ।“ श्रोताओं ने इस कलाम को दिल से सराहा।

फुलवारी पब्लिक स्कूल मुशायरा में विराज मंज़र काकोरवी ने मोहब्बत में ठुकराए जाने की कसक को शब्दों में उतारते हुए कहा, “अब तेरे लौटने का कोई फायदा नहीं, दिल अब तेरे रडार से बाहर निकल गया।“ इसी तरह अभिश्रेष्ठ तिवारी लखनवी ने इश्क के अनकहे एहसास को छूते हुए कहा, “जिस तस्वीर में आप के आशिक सारे थे, गौर से देखो हम भी वहीं किनारे थे।“
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फुलवारी पब्लिक स्कूल मुशायरा में साहब नरायन शर्मा ने गुरु-शिष्य परंपरा को नई ऊँचाई देते हुए कहा, “मेरे सर पर सदा हाथ माँ-बाप का, गुरु के चरणों में हूँ मैं अभागा नहीं।“ वहीं युवा शायर अलहाज गोण्डवी ने फन और ईमानदारी का मतलब समझाते हुए कहा, “चंद सिक्कों की एवज जो बंद करते हैं जुबां, कुछ भी हो सकते हैं, फनकार नहीं हो सकते।“ फुलवारी पब्लिक स्कूल मुशायरा में डॉ नीता सिंह ’नवल’, सत्यम् रौशन लखनवी, अभिषेक श्रीवास्तव और शिवम् मिश्रा ने भी अपनी ग़ज़ल और कविताओं से श्रोताओं का दिल जीत लिया।

कार्यक्रम में सेवानिवृत्त प्रधानाचार्या मालती सिंह, मंडल अध्यक्ष वीर विक्रम सिंह, डॉ महमूद आलम, मसूद आलम, पीपी यादव, प्रोफेसर आर बी सिंह बघेल, इंकलाब फाउंडेशन से अविनाश सिंह, जसपाल सलूजा, उस्मान अंसारी, प्रमोद नन्दन श्रीवास्तव, पुनीता मिश्रा, समरा फारुकी, फुज़ैल फारुकी, रेनू अग्रवाल, आनन्द वर्मा, शिप्रा सिंह और मु० कैफ (मुशायरा मीडिया) समेत भारी संख्या में श्रोतागण मौजूद रहे।
फुलवारी पब्लिक स्कूल मुशायरा ने साबित कर दिया कि अदब और शायरी आज भी लोगों की रगों में जिंदा है। हर शायर और कवियत्री ने मंच से जो कलाम पेश किया, उसने फुलवारी पब्लिक स्कूल मुशायरा को यादगार बना दिया।

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