Tuesday, January 13, 2026
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Filaria medicine को लेकर डर खत्म, गोंडा में लाखों ने खाई दवा

भ्रांतियों से जूझ रहे लोग बदले, filaria medicine अभियान में जुड़ी ताकत

अतुल द्विवेदी

गोंडा। जिले में फाइलेरिया उन्मूलन के लिए चल रहे सामूहिक दवा सेवन अभियान के दौरान filaria medicine को लेकर बनी भ्रांतियां तेजी से टूट रही हैं। अब तक 18 लाख से अधिक लोगों ने यह दवा खा ली है और संकोच करने वाले हजारों परिवारों ने भी आखिरकार भरोसा जताया है।

तुलसीपुर कोडरी आयुष्मान आरोग्य मंदिर क्षेत्र के कुर्मी कड़वालिया गांव में तीन साल पहले filaria medicine खाने के बाद हुई हल्की प्रतिक्रिया के डर से 17 परिवारों के 51 लोग लगातार दवा लेने से बच रहे थे। आशा कार्यकर्ताओं और पेशेंट सपोर्ट ग्रुप (पीएसपी) के समझाने पर इन परिवारों ने इस बार दवा खा ली। यह बदलाव बताता है कि जब सही जानकारी और जागरूकता मिलती है तो डर की जगह विश्वास ले लेता है।

वीबीडी नोडल अधिकारी डॉ. सी.के. वर्मा ने बताया कि अभियान की शुरुआत में 32,822 लोग दवा खाने से हिचकिचा रहे थे। लेकिन व्यापक जनजागरूकता और ग्रामीणों को सही तथ्य बताने के बाद 20,355 लोग यानी 91 प्रतिशत ने दवा खा ली। उन्होंने कहा कि यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि filaria medicine को लेकर समाज में फैली भ्रांतियां धीरे-धीरे खत्म हो रही हैं।

कड़वालिया गांव की शांति देवी ने बताया कि पहले डर था, लेकिन सीएचओ और गांव वालों के समझाने तथा सरकारी वीडियो देखने के बाद पूरा परिवार दवा खाने के लिए तैयार हो गया। पीएसपी सदस्य राजकुमार ने कहा कि सामूहिक प्रयासों से अब गांव में कोई भी व्यक्ति दवा खाने से वंचित नहीं रहा है।

पीएसपी की भूमिका बनी बड़ी ताकत
फाइलेरिया उन्मूलन में पीएसपी (पेशेंट सपोर्ट ग्रुप) बड़ी ताकत बनकर सामने आए हैं। जिले के बेलसर, पडरी कृपाल, मसकनवा और नवाबगंज ब्लॉकों के 16 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में गठित 324 सदस्यों वाले इन समूहों में 49 लोग खुद फाइलेरिया मरीज हैं। वे अपने अनुभव साझा कर ग्रामीणों को समझा रहे हैं कि filaria medicine ही बीमारी से बचाव का सबसे सुरक्षित उपाय है। साथ ही ये समूह सरकारी वीडियो और उदाहरणों के जरिए हिचकिचाने वाले परिवारों को प्रेरित कर रहे हैं।

भ्रांतियों को तोड़ रहा अभियान
सीएमओ डॉ. रश्मि वर्मा ने कहा कि filaria medicine खाने के बाद हल्का चक्कर या थकान आना सामान्य है, यह संकेत है कि शरीर में सूक्ष्म कृमि मौजूद हैं। इसे दवा का दुष्प्रभाव मानना भ्रांति है। उन्होंने आश्वासन दिया कि गंभीर लक्षण होने पर चिकित्सकों की टीम मौके पर इलाज उपलब्ध कराती है।

उन्होंने कहा कि दवा न खाने पर सूक्ष्म कृमि व्यस्क होकर शरीर में गंभीर फाइलेरिया का कारण बनते हैं और मच्छरों के जरिए संक्रमण दूसरों तक भी फैलाते हैं। इसलिए हल्की प्रतिक्रिया के बावजूद सभी को दवा अवश्य लेनी चाहिए। यही बीमारी से बचाव का एकमात्र सुरक्षित तरीका है।

डॉ. रश्मि वर्मा ने बताया कि 23 अगस्त तक 18.07 लाख से अधिक लोगों ने दवा खा ली है, जो लक्षित जनसंख्या 28.76 लाख के सापेक्ष 62.8 प्रतिशत है। अभियान 28 अगस्त तक जारी रहेगा।

जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने कहा कि फाइलेरिया उन्मूलन सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में है। इस अभियान को सफल बनाने के लिए पंचायत प्रतिनिधियों, कोटेदारों, आशा-आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, शिक्षकों और विभिन्न विभागों का सक्रिय सहयोग जरूरी है। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयास से ही गोंडा को फाइलेरिया मुक्त बनाया जा सकता है।

गोंडा का यह अभियान यह साबित कर रहा है कि जब मरीज स्वयं आगे आकर अपनी आपबीती सुनाते हैं और गांव-गांव सही जानकारी पहुंचती है तो डर मिटता है और filaria medicine पर भरोसा बढ़ता है।

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