मृतक रमजान के दस्तावेज किए हासिल, पडोसी मजरे के एक व्यक्ति से भी पूछताछ
जानकी शरण द्विवेदी
गोंडा! बलरामपुर जिले का बहुचर्चित धर्मांतरण मामला एक बार फिर चर्चा में है। इसी कड़ी में इस प्रकरण के कथित मास्टरमाइंड जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा के नेटवर्क की छानबीन के दौरान एटीएस की एक टीम बुधवार को गोंडा पहुंची। एजेंसी जिस युवक की तलाश में यहां पहुंची थी, उसकी मौत की जानकारी सामने आने के बाद टीम ने कई अहम दस्तावेज हासिल किए और वापस लौट गई।
सूत्रों के मुताबिक धर्मांतरण मामला में एटीएस को छांगुर के संपर्क में रहे जिले के धानेपुर थाना क्षेत्र स्थित रेतवागाड़ा गांव निवासी रमजान पुत्र मजीद के नाम की जानकारी मिली थी। रमजान ढोलक बजाने वाले के रूप में धार्मिक आयोजनों कव्वाली व जागरण में सक्रिय था। वर्ष 2023 में वह अपने भाई मोहर्रम अली उर्फ आज़ाद के साथ आज़मगढ़ के एक कार्यक्रम में गया था, जहां कथित तौर पर धर्मांतरण कराने का आरोप लगने के बाद बजरंग दल के कार्यकर्ताओं और पुलिस की मौजूदगी में हंगामा हुआ था। इस पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर रमजान को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
करीब आठ महीने तक जेल में रहने के बाद तीन जनवरी 2024 को वह जमानत पर रिहा हुआ। परिजनों के अनुसार, रिहाई के बाद उसकी तबीयत बिगड़ती चली गई और अंततः चार मार्च 2024 को उसकी मृत्यु हो गई। धर्मांतरण मामला की जांच कर रही एटीएस की टीम जब बुधवार को गांव पहुंची तो रमजान की मृत्यु की पुष्टि हुई। टीम ने रमजान के परिजनों से पूछताछ की और उसकी मौत से जुड़े चिकित्सीय रिकॉर्ड, पहचान पत्र व अन्य दस्तावेज जब्त किए। साथ ही रमजान नाम के एक अन्य व्यक्ति, जो पास के पुरवे में रहता है, उसके विषय में भी जानकारी ली गई। इस व्यक्ति से पूर्व में भी अप्रैल 2024 में पूछताछ की जा चुकी थी।
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हालांकि स्थानीय पुलिस ने इस कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि से इनकार किया है। इस संबंध में पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल ने कहा कि एटीएस स्वतंत्र एजेंसी है और आवश्यकतानुसार ही स्थानीय पुलिस से सूचनाओं का आदान-प्रदान होता है। सूत्रों का यह भी कहना है कि मृतक रमजान को छांगुर बाबा द्वारा धर्मांतरण के लिए ब्रेनवॉश कर प्रशिक्षित किया गया था। उसे समुदाय विशेष में घुसपैठ कर युवाओं को जोड़ने की जिम्मेदारी दी गई थी। बताया जाता है कि छांगुर बाबा खुद को एक पीर बाबा के रूप में स्थापित करने की साजिश रच रहा था, जिसके लिए वह धार्मिक आयोजनों का सहारा लेकर धीरे-धीरे प्रभाव बढ़ा रहा था।
धर्मांतरण मामला में रमजान की मृत्यु के बावजूद एटीएस की सक्रियता से संकेत मिलता है कि एजेंसी यह जांचने में लगी है कि वह नेटवर्क का कितना अहम हिस्सा था और क्या अब भी उसके संपर्क में रहे लोग इस साजिश को आगे बढ़ा रहे हैं। जांच एजेंसी का अगला कदम क्या होगा, यह स्पष्ट नहीं है, लेकिन फिलहाल एटीएस की यह गंभीर सक्रियता यह दर्शा रही है कि मामला अभी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। संभावना जताई जा रही है कि छांगुर के नेटवर्क से जुड़े अन्य स्थानों पर भी जल्द दबिश हो सकती है, जिससे यह मामला एक बार फिर प्रदेश की सुरक्षा एजेंसियों की प्राथमिकता बन गया है।
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