बीते एक सप्ताह में भारत में पाए गए Covid-19 के 164 नए मामले
Covid-19 मामलों में अचानक उछाल से घबराहट, JN1 वैरिएंट बना वजह
नेशनल डेस्क
नई दिल्ली। Covid-19 ने एक बार फिर दुनिया को सतर्क कर दिया है। जिस वायरस को कुछ समय पहले तक लगभग निष्क्रिय मान लिया गया था, वह अब फिर से संक्रमण फैलाने लगा है। बीते सप्ताह भारत में Covid-19 के 164 नए मामले सामने आए हैं, जिससे कुल सक्रिय मामलों की संख्या 257 हो गई है। महामारी के इस पुनः उभार ने विशेषज्ञों की चिंता को बढ़ा दिया है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, सबसे ज्यादा मामले केरल (95), तमिलनाडु (66) और महाराष्ट्र (56) में दर्ज किए गए हैं। स्थिति पर नजर डालें तो यह भले ही पहले जैसी विकराल नहीं है, लेकिन नए वैरिएंट JN.1 को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। ओडिशा में तो ढाई साल बाद पहला Covid-19 संक्रमण सामने आया है। स्वास्थ्य सचिव एस. अश्वथी के अनुसार, संक्रमित व्यक्ति की हालत स्थिर है, लेकिन उसे अन्य बीमारियां भी हैं। यही कारण है कि इस बार Covid-19 का जोखिम भले हल्का हो, लेकिन कमोर्बिड लोगों के लिए यह अब भी खतरनाक साबित हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, वायरस का यह नया JN.1 वैरिएंट ओमिक्रॉन का ही एक रूप है, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को चकमा देकर संक्रमण फैलाने में सक्षम है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ, गांधीनगर के महामारी विशेषज्ञ डॉ. अनीश सिन्हा ने बताया कि Covid-19 के इस वैरिएंट को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ‘वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट’ घोषित किया है। इसका अर्थ है कि यह लगातार निगरानी में है, लेकिन घातक श्रेणी में नहीं आता।
हालांकि विशेषज्ञों की मानें तो JN.1 में कुछ ऐसे जेनेटिक म्यूटेशन हैं जो इसे पहले के वैरिएंट्स की तुलना में अधिक फैलावकारी बनाते हैं। इसकी वजह से बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को सावधान रहने की जरूरत है। भारत में अभी तक गंभीर लक्षणों वाले मामले बहुत कम हैं। लेकिन महाराष्ट्र में दो मौतें दर्ज की गई हैं, जिनमें मरीज पहले से गंभीर बीमारियों से ग्रसित थे। इन मौतों का Covid-19 से सीधा संबंध अभी तक स्थापित नहीं हुआ है।

वायरस के लक्षणों की बात करें तो ओमिक्रॉन और इसके वैरिएंट्स में सूखी खांसी, नाक बहना, बुखार, गले में खराश, सिरदर्द, थकावट, स्वाद और गंध का गायब होना, अपच जैसी समस्याएं आम हैं। हालांकि इस बार संक्रमण की गंभीरता अपेक्षाकृत कम है, लेकिन सतर्कता जरूरी है। स्वास्थ्य मंत्रालय और विशेषज्ञों की राय में, Covid-19 से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका अभी भी कोविड-उपयुक्त व्यवहार है। मास्क पहनना, हाथों को साफ रखना और भीड़-भाड़ वाली जगहों से बचना सबसे कारगर उपाय हैं। इसके अलावा वैक्सीनेशन की दो खुराक ले चुके लोगों को बूस्टर डोज पर भी ध्यान देना चाहिए।
Covid-19 का यह नया दौर खासतौर से उन लोगों के लिए खतरे की घंटी है जो लंबे समय से वैक्सीनेशन के बाद संक्रमण से मुक्त थे और अब सामान्य जीवन में लौट चुके हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि अब जबकि वायरस का स्वरूप बदलता जा रहा है, हमें भी अपने व्यवहार को उसी के अनुसार ढालना होगा। विशेषज्ञ यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि भले ही केंद्र सरकार या एनसीडीसी ने अभी कोई एडवाइजरी जारी नहीं की है, लेकिन राज्य सरकारों को अपनी सतर्कता बनाए रखनी होगी। कहीं ऐसा न हो कि हम पिछली लहरों की तरह फिर से देर कर बैठें।
यह भी ध्यान देने योग्य है कि दुनियाभर में Covid-19 संक्रमण के मामलों में वृद्धि का मुख्य कारण JN.1 के साथ-साथ LP.8.1 जैसे अन्य वैरिएंट्स भी हैं। चीन, हांगकांग और सिंगापुर में इसका असर अधिक देखा जा रहा है। Covid-19 के इस बार के असर को ‘साइलेंट सर्ज’ कहा जा सकता है – जिसमें लक्षण हल्के हैं, लेकिन प्रसार तेजी से हो रहा है। ऐसे में सामूहिक लापरवाही भविष्य में एक बड़ी चूक साबित हो सकती है।

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