Tuesday, January 13, 2026
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यूक्रेनी युवक संग अवैध संबंध में चीनी छात्रा बर्खास्त

डेलियन यूनिवर्सिटी का चीनी छात्रा बर्खास्त करने का फैसला विवादों में

इंटरनेशनल डेस्क

बीजिंग! चीन के डेलियन पॉलिटेक्निक यूनिवर्सिटी द्वारा यूक्रेनी ई-स्पोर्ट्स खिलाड़ी डेनिलो तेस्लेंको (उर्फ जीउस) के साथ कथित शारीरिक संबंध के लिए 21 साल की एक चीनी छात्रा बर्खास्त कर दी गई है। विश्वविद्यालय ने इसे राष्ट्रीय गरिमा को ठेस और अनुचित व्यवहार करार दिया, जिसके बाद यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बन गया है।

पिछले साल दिसंबर में एक गेमिंग टूर्नामेंट के दौरान शंघाई में बर्खास्त चीनी छात्रा और यूक्रेनी खिलाड़ी की मुलाकात हुई थी। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, 37 वर्षीय तेस्लेंको, जो एक पूर्व काउंटर स्ट्राइक खिलाड़ी हैं, ने चीनी छात्रा बर्खास्त के साथ निजी तस्वीरें अपने फैन ग्रुप में साझा की थीं, जिससे विवाद और बढ़ गया। यूनिवर्सिटी ने 8 जुलाई 2025 को इस निष्कासन की घोषणा की, जो 16 दिसंबर 2024 से प्रभावी थी।

सोशल मीडिया पर आलोचना और बहस
यूनिवर्सिटी द्वारा चीनी छात्रा बर्खास्त किए जाने की सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना हो रही है। कई यूजर्स और कानूनी विशेषज्ञों ने इसे गोपनीयता का उल्लंघन और लैंगिक भेदभाव का मामला बताया है। विश्वविद्यालय ने छात्रा का पूरा नाम सार्वजनिक कर दिया, जिसे कई लोगों ने अनुचित और शर्मिंदगी भरा कदम माना। एक यूजर ने लिखा, ‘यह निजी जीवन में दखल और अनुचित सजा है।’

रिपोर्ट्स के अनुसार, यूनिवर्सिटी के नियमों में केवल आठ कारणों से निष्कासन की अनुमति है, और इनमें से कोई भी इस मामले से मेल नहीं खाता। बर्खास्त चीनी छात्रा को 7 सितंबर 2025 तक इस फैसले के खिलाफ अपील करने का अधिकार है, और उसे कानूनी मदद लेने की सलाह दी गई है।

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क्या है पूरा मामला?
बर्खास्त चीनी छात्रा और तेस्लेंको की मुलाकात दिसंबर 2024 में एक कार्यक्रम के दौरान हुई थी। दोनों के बीच कथित तौर पर एक रात का संबंध रहा, जिसके बाद तेस्लेंको ने होटल की तस्वीरें ऑनलाइन साझा कीं। इन तस्वीरों के वायरल होने के बाद यूनिवर्सिटी ने इसे ‘राष्ट्रीय गरिमा को ठेस’ और ‘विदेशी के साथ अनुचित संपर्क’ का मामला मानते हुए चीनी छात्रा बर्खास्त कर दिया। इस फैसले ने न केवल गोपनीयता बल्कि नैतिकता और लैंगिक समानता पर भी सवाल उठाए हैं।

कानूनी और सामाजिक सवाल
कई विशेषज्ञों का कहना है कि चीनी छात्रा बर्खास्त मामला न केवल यूनिवर्सिटी के नियमों के खिलाफ है, बल्कि यह छात्रा के निजी जीवन में हस्तक्षेप भी है। सोशल मीडिया पर इस मामले को ‘अत्यधिक कठोर’ और ‘लैंगिक भेदभाव’ से जोड़ा जा रहा है। जबकि कुछ लोगों का मानना है कि यह कदम चीन में नैतिकता और राष्ट्रीयता से जुड़े सख्त सामाजिक दबावों को दर्शाता है।

छात्रा के समर्थन में कई लोग सामने आए हैं, जो इस सजा को अनुचित मानते हैं। कानूनी सलाहकारों ने सुझाव दिया है कि वह इस मामले को अदालत में ले जा सकती है, क्योंकि यूनिवर्सिटी द्वारा चीनी छात्रा बर्खास्त किए जाने का फैसला नियमों के दायरे से बाहर माना जा रहा है। फैसले का विरोध करने वालों का कहना है कि चीनी छात्रा बर्खास्त किए जाने के मामले को अदालत में चुनौती दी जाएगी।

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