छापे में घर से मिले 1500 सिम, जदयू नेता पर गंभीर आरोप
Bihar News: सात करोड़ की ठगी और साइबर क्राइम का जाल
राज्य डेस्क
पटना। एक चौंकाने वाली घटना ने राजनीतिक गलियारों से लेकर साइबर क्राइम यूनिट तक को हिला कर रख दिया। आर्थिक अपराध इकाई (EOU), पटना की टीम ने सुपौल जिले के करजाइन थाना क्षेत्र के गोसपुर गांव में छापेमारी करते हुए जदयू के युवा नेता हर्षित मिश्र को गिरफ्तार किया।
हर्षित मिश्र पर साइबर ठगी और आर्थिक अनियमितताओं का गंभीर आरोप है। गिरफ्तारी उस समय हुई जब EOU ने गोपनीय सूचना के आधार पर बड़ी छापेमारी की। जांच के दौरान खुलासा हुआ कि हर्षित के बैंक खाते में सात करोड़ रुपये जमा थे और उसके घर से 1500 से अधिक सिम कार्ड, दर्जनों मोबाइल, कई लैपटॉप और अन्य संदिग्ध डिवाइसेज बरामद हुई हैं।
खाते में जमा मिले सात करोड़
Bihar News के अनुसार, हर्षित मिश्र का जो बैंक खाता जांच एजेंसियों के रडार पर था, उसमें पहले ही सात करोड़ रुपये जमा होने की सूचना मिल चुकी थी। उसी आधार पर कार्रवाई को अंजाम दिया गया। EOU की 25 से 30 अधिकारियों की टीम, जो 8 स्कॉर्पियो वाहनों में सवार होकर गांव पहुंची, दोपहर 2 बजे से शुरू हुई छापेमारी में रातभर जुटी रही।
करीब 19 घंटे तक चली इस तलाशी में ऐसे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स मिले जो साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। छानबीन में यह भी पाया गया कि जिन डिवाइसेज से साइबर ट्रांजैक्शन होते थे, वे सभी हर्षित के कब्जे में थे। फिलहाल उससे पूछताछ के बाद पटना ले जाया गया है और वहां विस्तृत जांच जारी है।
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राजनीतिक रसूख और जमीन से पैसा, शेयर ट्रेडिंग बना मुखौटा
Bihar News की रिपोर्ट के मुताबिक, हर्षित मिश्र किसान परिवार से ताल्लुक रखता है। उसने खुद को शेयर बाजार का सफल कारोबारी बताकर गांव के लोगों को भी भ्रमित किया। ग्रामीणों के अनुसार, पहले उसके परिवार के पास 50 बीघा जमीन थी, जिसे उसने शेयर ट्रेडिंग के नाम पर बिकवाया और भारी रकम जुटाई।
तीन साल पहले उसने पिता से जमीन बिकवा कर निवेश के लिए पैसे लिए और पटना में रहने लगा। फिर उसने एक स्कॉर्पियो गाड़ी खरीदी, जिसमें भाजपा का झंडा लगाकर घूमता था। इसी दौरान वह कई नेताओं के संपर्क में आया और तीन महीने पहले भाजपा छोड़कर जदयू में शामिल हो गया। कथित तौर पर वह पार्टी के बड़े नेताओं के नजदीक था और उसे जदयू युवा मोर्चा का प्रदेश सचिव भी बना दिया गया था।
कार्रवाई के बाद गांव में सन्नाटा
Bihar News की इस गिरफ्तारी के बाद गांव में गहन सन्नाटा है। लोग हैरान हैं कि जिस युवक को उन्होंने शेयर कारोबारी समझा, वह साइबर अपराध में लिप्त पाया गया। हालांकि हर्षित के पिता विकास मिश्र का कहना है कि यह एक राजनीतिक साजिश है। उनका बेटा रियल एस्टेट और राजनीति में सक्रिय था और किसी भी आपराधिक गतिविधि से उसका कोई लेना-देना नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि बेटे का चाल-चलन पिछले कुछ वर्षों में जरूर बदला, लेकिन ऐसा कुछ करेगा, इसका उन्हें यकीन नहीं था। Bihar News की यह घटना सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं, बल्कि यह संकेत है कि राजनीति और साइबर अपराध का गठजोड़ कितना खतरनाक हो सकता है। EOU और साइबर सेल की इस कार्रवाई ने न केवल जदयू को असहज किया है, बल्कि आम जनता के मन में भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच जारी है और कई और खुलासों की संभावना बनी हुई है। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में यह मामला किस दिशा में जाता है और क्या वाकई इसमें राजनीतिक साजिश का पहलू मौजूद है।
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