18 अगस्त 2025 तक भेज सकते हैं प्रविष्टियां, मिलेगा 51 हजार
बाल साहित्य पुरस्कार के लिए भेजें संस्तुतियां, न चूकें आखिरी तारीख
संवाददाता
गोंडा। बाल साहित्य पुरस्कार को लेकर लेखकों और साहित्यिक संस्थाओं के लिए बड़ी खबर है। उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान ने वर्ष 2024 के लिए बाल साहित्य संवर्द्धन योजना के अंतर्गत विभिन्न सम्मानों हेतु आवेदन आमंत्रित किए हैं। साहित्यकारों और साहित्य प्रेमियों में उत्साह का माहौल है क्योंकि बाल साहित्य पुरस्कार न सिर्फ लेखकों की प्रतिष्ठा बढ़ाते हैं बल्कि बच्चों के बीच साहित्यिक संस्कारों के बीजारोपण का भी महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं।
संस्थान की ओर से जारी सूचना के अनुसार इस वर्ष बाल साहित्य पुरस्कार के तहत सुभद्रा कुमारी चौहान महिला बाल साहित्य सम्मान, सोहन लाल द्विवेदी बाल कविता सम्मान, निरंकार देव सेवक बाल साहित्य इतिहास लेखन सम्मान, अमृतलाल नागर बाल कथा सम्मान, शिक्षार्थी बाल चित्रकला सम्मान, लल्ली प्रसाद पाण्डेय बाल साहित्य पत्रकारिता सम्मान, डॉ. रामकुमार वर्मा बाल नाटक सम्मान, आचार्य कृष्ण विनायक फड़के बाल साहित्य समीक्षा सम्मान, जगपति चतुर्वेदी बाल विज्ञान लेखन सम्मान और उमाकान्त मालवीय युवा बाल साहित्य सम्मान शामिल हैं।
इन बाल साहित्य पुरस्कार में प्रत्येक सम्मान की धनराशि 51 हजार रुपये निर्धारित की गई है। इससे न केवल रचनात्मक ऊर्जा को प्रोत्साहन मिलेगा बल्कि नई पीढ़ी में साहित्य के प्रति रुझान भी बढ़ेगा। उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान ने स्पष्ट किया है कि बाल साहित्य पुरस्कार के लिए इच्छुक साहित्यकारों व संस्थाओं से संस्तुतियां ‘बाल साहित्य सम्मान सम्बन्धी’ शीर्षक से निदेशक, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ-226001 को भेजी जानी चाहिए। आवेदन भेजने की अंतिम तिथि 18 अगस्त 2025 निर्धारित की गई है।
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संस्थान ने कहा है कि निर्धारित समय के भीतर प्राप्त संस्तुतियों पर ही विचार किया जाएगा। देर से भेजी गई संस्तुतियों को स्वीकार नहीं किया जाएगा। ऐसे में लेखकों और साहित्यिक संस्थाओं को सलाह दी गई है कि वे समय रहते अपनी प्रविष्टियां तैयार कर भेजें ताकि बाल साहित्य पुरस्कार प्राप्त करने का बहुमूल्य अवसर हाथ से न निकल जाए।
यह पहली बार नहीं है जब बाल साहित्य पुरस्कार को लेकर इतना व्यापक प्रचार किया गया हो। वर्षों से ये सम्मान उदीयमान और वरिष्ठ बाल साहित्यकारों को सम्मानित करते आ रहे हैं। पुरस्कार प्राप्त लेखक न सिर्फ राज्य स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय फलक पर भी अपनी पहचान बना पाते हैं।
गौरतलब है कि बाल साहित्य पुरस्कार बच्चों में कल्पनाशीलता और भाषा कौशल विकसित करने के लिए प्रेरणा का बड़ा स्रोत हैं। साहित्य समाज का दर्पण होता है और बाल साहित्य उस समाज की नई पीढ़ी को संस्कार देने का माध्यम बनता है। ऐसे में बाल साहित्यकारों के योगदान को सम्मानित करना समाज के लिए भी एक सकारात्मक संदेश देता है। संस्थान ने यह भी बताया कि चयन प्रक्रिया निष्पक्ष एवं पारदर्शी रहेगी और योग्य साहित्यकारों को उनकी कृतियों के आधार पर ही सम्मानित किया जाएगा।
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