Wednesday, February 11, 2026
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Bahraich News: जन्म के पहले घंटे में जरूर पिलायें मां का पहला पीला गाढ़ा दूध

स्तनपान से बच्चों को मिलती है बीमारियों से लड़ने की ताकत

विश्व स्तनपान सप्ताह (01-07 अगस्त) पर विशेष

संवाददाता

बहराइच। कोविड-19 की संभावित तीसरी लहर का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ने की चर्चा है। ऐसे में जो माताएं बच्चे को सही समय पर और सही तरीके से भरपूर स्तनपान कराती हैं, उन्हें बच्चे को लेकर बहुत चिंता करने की जरूरत नहीं होती है। स्तनपान न सिर्फ शिशु को कई जानलेवा बीमारियों से सुरक्षित रखता है बल्कि स्तनपान कराने वाली माता को स्तन कैंसर, गर्भाशय कैंसर और ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डी रोग) जैसी बीमारियों के जोखिम से महफूज रखता है। इसके महत्व को लोगों तक पहुँचाने के लिए समूचे विश्व मे हर साल एक अगस्त से सात अगस्त तक विश्व सतनपान सप्ताह मनाया जाता है। इस बार विश्व स्तनपान सप्ताह की ग्लोबल थीम ‘स्तनपान की रक्षा, एक साझा जिम्मेदारी’ रखी गई है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश मोहन श्रीवास्तव का कहना है कि माँ का दूध शिशु को कोरोना ,निमोनिया, डायरिया और कुपोषण के जोखिम से भी बचाता है। इसलिए बच्चे को जन्म के एक घंटे के भीतर माँ का पहला पीला गाढा दूध अवश्य पिलाना चाहिए। यह दूध बच्चे में रोग प्रतिरोधक क्षमता पैदा करता है, इसीलिए इसे बच्चे का पहला टीका भी कहते हैं। जन्म के एक घंटे के भीतर नवजात को स्तनपान कराने से नवजात मृत्यु दर में 33 फीसद तक कमी लायी जा सकती है।

छह माह तक ऊपर से पानी भी नहीं

सिक न्यू बोर्न केयर यूनिट के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ असद अली कहते हैं कि माँ के दूध में शिशु की आवश्यकता अनुसार पानी होता है। इसलिए छह माह की आयु तक प्यास लगने पर भी शिशु को सिर्फ माँ का दूध देना चाहिए। यहां तक कि ऊपर से पानी भी नहीं देना चाहिए। वह कहते हैं कि छह माह तक केवल स्तनपान कराने पर बच्चों में होने वाले आम रोग जैसे दस्त एवं निमोनिया के खतरे में क्रमशः 11 व 15 फीसदी तक कमी लायी जा सकती है। इसीलिए यदि मां या शिशु बीमार हों तब भी स्तनपान जारी रखना चाहिए। जिला स्वास्थ्य, शिक्षा एवं सूचना अधिकारी ब्रजेश सिंह का कहना है कि कोविड उपचाराधीन और संभावित माँ को भी सारे प्रोटोकाल का पालन करते हुए स्तनपान कराना जरूरी है। वह स्तनपान से पहले हाथों को अच्छी तरह से साफ़ कर लें और नाक व मुंह को मास्क से अच्छी तरह से ढककर ही दूध पिलायें। बच्चे को ऐसे में स्तनपान से वंचित करने से उसका पूरा जीवन चक्र प्रभावित हो सकता है। यदि केवल स्तनपान कर रहा शिशु 24 घंटे में छह से आठ बार पेशाब करता है, स्तनपान के बाद कम से कम दो घंटे की नींद ले रहा है और उसका वजन हर माह करीब 500 ग्राम बढ़ रहा है, तो इसका मतलब है कि शिशु को मां का पूरा दूध मिल रहा है।

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