Tuesday, February 10, 2026
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Bahraich News: गुब्बारों संग लोगों ने सीखा ‘बच्चे दो ही अच्छे’

नवदंपति को शगुन किट देकर दिया खुशहाल परिवार का मंत्र

संवाददाता

बहराइच। जरवल ब्लॉक के तपेसिपाह उपकेंद्र सहित छह अन्य उपकेन्द्रों में आयोजित सास बेटा बहू सम्मेलन में परिवार के सदस्यों ने हवा में गुब्बारे उछाले। इसके लिए दो अलग-अलग परिवारों के सास, बेटा और बहू में एक को कम और दूसरे को ज्यादा गुब्बारे दिये गए। जिस परिवार के पास ज्यादा गुब्बारे थे, वह इसे नहीं सम्हाल पा रहे थे। नतीजन गुब्बारे जमीन पर गर रहे थे। जबकि जिनके पास कम गुब्बारे थे, वह इसे आसानी से खेल रहे थे। इस खेल से परिवार के लोगों ने सीखा “बच्चे दो ही अच्छे” होते हैं। परिवार का आकार कितना हो इसके निर्णय में सास, बहू के साथ बेटे की राय भी महत्वपूर्ण होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए जरवल ब्लॉक के सात उपकेन्द्रों पर सास ,बेटा-बहू सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में सभी गतिविधियों का आयोजन प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ निखिल के दिशा निर्देशन में एएनएम, सीएचओ, आशा और आंगनवाड़ी द्वारा किया गया। तपेसिपाह उपकेंद्र में कार्यक्रम का संचालन करते हुये एएनएम रुचि वर्मा ने बताया कि कम अंतराल पर जन्में अधिक बच्चों का पालन-पोषण छोटे परिवारों की अपेक्षा कम हो पाती है। वहीं दो बच्चों के बीच अंतर न होने से माँ के साथ बच्चे भी कुपोषित हो जाते हैं । इसके लिए जरूरी है कि बच्चों में कम से कम तीन साल का अंतर रखने के लिए परिवार नियोजन के आधुनिक साधनों का उपयोग किया जाय। उन्होने बताया कि गुब्बारे के खेल से छोटे परिवार के महत्व को समझाने का प्रयास किया गया है। इस मौके पर नवदंपत्ति को सगुन किट भेट की गयी। सम्मेलन में श्यामकला अपने बेटे जगप्रसाद और बहू रेनू के साथ आयी थी। श्यामकला का कहना था ज्यादा गुबारे हवा में उछालने पर सबको सम्हालना कठिन था। एक को पकड़ो तो दूसरा गिर जाता था। उन्होने कहा इस उम्र में बच्चों के खेल खेलने में झिझक थी लेकिन यह तो बच्चों को सम्हालने का ही खेल था। बहू रेनू ने बताया कि कम बच्चे होने से उनकी देखभाल अच्छे से हो जाती है और अपना भी स्वास्थ्य ठीक रहता है। जगप्रसाद ने कहा कि यदि परिवार की सहमति है तो उन्हे परिवार नियोजन के साधन से कोई समस्या नहीं है।

इन परिवारों को किया गया शामिल :

विगत एक वर्ष के दौरान नव विवाहित दंपत्ति। विगत एक वर्ष के अंदर उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिला। ऐसे दंपत्ति जिन्होने परिवार नियोजन का कोई भी साधन नहीं अपनाया है। ऐसे दंपत्ति जिनके तीन या तीन से अधिक बच्चे हैं। ऐसे आदर्श दंपत्ति जिनका विवाह के दो वर्ष बाद पहला बच्चा हुआ है और जिनके पहले बच्चे से दूसरे बच्चे में तीन साल का अंतर है या दंपत्ति ने दो बच्चे के बाद स्थायी साधन अपनाया है। यूनिसेफ के डीएमसी संदीप सक्सेना ने बताया कि आज हमारे सामने कई तरह के आधुनिक साधन मौजूद हैं। इनमें अस्थायी साधनों में तिमाही अंतरा इंजेक्शन, साप्ताहिक छाया गोली, कंडोम, कॉपर टी, प्रसव पश्चात कॉपर टी, माला एन तथा स्थायी साधनों में महिला व पुरुष नसबंदी हैं।

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