Friday, January 16, 2026
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Bahraich News : कतर्निया घाट में बनेगा गैंडा संरक्षण केंद्र

संवाददाता

बहराइच। हिमालय की तलहटी में आबाद कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग अपनी विविधता के लिए विख्यात है। अब यह प्रभाग एक और उपलब्धि हासिल करने जा रहा है। यहां गैंडों के प्रवास के लिए बाड़ा बनाने की योजना है। इसके लिए वन्यजीव विशेषज्ञों की टीम यहां आकर स्टडी करेगी। स्टडी के आधार पर कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग, प्रदेश का दूसरा गैंडा संरक्षण केन्द्र बनेगा। भारत-नेपाल सीमा से सटा बहराइच का कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग 551 वर्ग किमी परिक्षेत्र में फैला हुआ है। यह प्रभाग वन्यजीव, वन संपदा व जैव संपदा से भी धनी है। यह प्रदेश का एक मात्र ऐसा वन्यजीव प्रभाग है, जहां वन्यजीवों की संख्या में साल दर साल वृद्धि हो रही है। इसकी खूबसूरती व आबोहवा की ही देन है कि यहां गैंडों का कुनबा बढ़ रहा है। वर्तमान में पांच से छह गैंडे कतर्नियाघाट में विचरण कर रहे हैं। यह गैंडा स्थाई प्रवास कर रहे या फिर नेपाल के बर्दिया नेशनल पार्क से खाता कॉरिडोर के जरिए आ रहे हैं। इस पर अध्ययन किया जाएगा। डब्ल्यू-डब्ल्यू एफ व यूपी फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के बीच एक साल का करार हुआ है। दोनों संस्थाओं के समन्वय से वन्यजीव विशेषज्ञों की टीम स्टडी करेगी। स्टडी में गैंडों के कतर्निया घाट में माकूल प्रवास, भोजन, पानी व सुरक्षा के दृष्टिगत सभी बिंदुओं पर विशेषज्ञ काम करेंगे। शासन के इस कदम से वन महकमा गदगद है। इसका सीधा फायदा पर्यटन को होगा। यहां विदेशों से आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी। इससे राजस्व की वृद्धि भी होगी। बहराइच के कतर्नियाघाट को एक और पहचान मिलेगी।

प्रभाग में 23 फीसद क्षेत्र ग्रासलैंड

बताते हैं कि 551 वर्ग किलोमीटर में फैले कतर्नियाघाट का 23 फीसदी हिस्सा ग्रासलैंड है। ग्रासलैंड के लिहाज से यह सबसे बड़ा वन्यजीव प्रभाग है। ट्रांस गेरुआ से लगा हुआ पूरा हिस्सा गैंडों के लिए मुफीद है। संरक्षण के लिए माकूल आबोहवा को देखते हुए डब्ल्यूडब्ल्यूएफ व यूपी फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने यह फैसला किया है। कतर्नियाघाट में गैंडों की सटीक गणना व उनके प्रवास से जुड़ी जानकारी के लिए वन्यजीव विशेषज्ञ रेडियो कॉलर की मदद लेंगे। छह माह तक इन पर नजर रखकर गतिविधियों की रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसी के आधार पर बाड़ा बनाने को अंतिम रूप दिया जाएगा। कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग में गैंडों की उपस्थिति देखी जा रही है। इस पर स्टडी के लिए करार हुआ है। अध्ययन के आधार पर गैंडा संरक्षण के लिए कदम उठाए जाएंगे।

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