गृह भ्रमण के दौरान काम आएगी कला, नवजात को मिलेगा सेहत का आशीष
संवाददाता
बहराइच। जीवन के शुरुआती एक हज़ार दिन नवजात शिशुओं के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान उचित देखभाल और सही पोषण की जानकारी शिशुओं को स्वस्थ रखने में मदद करती है। इसके लिए आशाओं को आशा माड्यूल 6-7 के तहत प्रशिक्षित किया जा रहा है। अचल प्रक्षिक्षण केंद्र में चल रहे पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में आशाओं को शिशु में खतरे के शुरुआती लक्षणों की पहचान और घर पर देखभाल के तरीके सिखाये गए। प्रशिक्षण का संचालन कर रहे डीसीपीएम मो. राशिद ने बताया कि बीमार शिशुओं के लक्षणों की पहचान के लिए आशाओं को टूल किट दिया गया है। इसमें तापमान नापने के लिए डिजिटल थर्मामीटर, वजन मशीन, साँसों की गिनती के लिए डिजिटल घड़ी, शिशुओं को लपेटने का तरीका सिखाने के लिए कंबल, टार्च, माँ को ऊपरी आहार देने के तरीकों को सिखाने के लिए कटोरी चम्मच, टूल किट बैग तथा स्टेशनरी के साथ अन्य पाठ्य सामग्री दी गयी है। इसका उपयोग आशाएं गृह भ्रमण के दौरान नवजात शिशु देखभाल के दौरान करेंगी।
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प्रशिक्षक चंदरेश्वर पाठक ने बताया कि संक्रमण न हो इसके लिए शिशु को छूने से पहले हाथों को साबुन पानी से अच्छी तरह साफ करना चाहिए। इसके लिए उन्होने आशाओं को सुमन-क के तरीके से हाथ धुलने के सभी आठ स्टेप के बारे में जानकारी दी। उन्होने आशाओं को बताया कि घर पर नवजात शिशु की देखभाल के दौरान हाथ धुलने के इन तरीकों से माँ अथवा परिवार के सभी सदस्यों को दक्ष कराना है। आयु के अनुसार कम वजन के शिशुओं की ज्यादा देखभाल की आवश्यकता होती है। ऐसे शिशुओं में संक्रमण होने की ज्यादा संभावना होती है। इसके लिए उन्होने आशाओं को शिशु का वजन लेने व संक्रमण से बचाव के गुर सिखाये। एचईओ व प्रशिक्षक जुगुल किशोर चौबे ने, आशाओं को नवजात शिशु को कंबल में लपेटने का तरीका व एक मिनट में सासों की गिनती लेने का तरीका सिखाया। उन्होने बताया कि उम्र के अनुसार एक मिनट में शिशु द्वारा ली गयी सांसों की गिनती से संक्रमण की पहचान की जा सकती है। शिशुओं में तेज सांस गंभीर संक्रमण का एक लक्षण है। ऐसे शिशुओं को तत्काल अस्पताल ले जाने की जरूरत होती है। उन्होने आशाओं को छह माह की आयु के शिशुओं को सिर्फ माँ का दूध और छह माह से अधिक आयु के शिशु को कटोरी चम्मच से ऊपरी आहार खिलाने के तारीकों की जानकारी दी। डीएचईआईओ बृजेश ने बताया कि जनपद की 335 आशाओं को 11 अलग अलग बैचों में प्रशिक्षित किया जा रहा है। एक बैच में 30 आशाओं को प्रशिक्षित किया जाता है। अभी तक दो बैच का प्रशिक्षण हो चुका है।
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