उसके बाद हवन और भंडारे के साथ संपन्न हुआ भागवत कथा
मनोज तिवारी
अयोध्या। बीकापुर विकास खंड क्षेत्र के पुहंपी पूरे देव तिवारी का पुरवा गांव में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के दौरान कथा के छठवें दिन शनिवार को रुक्मणी विवाह का रोचक वर्णन कथा व्यास अरविंद मिश्र ने किया। कथा व्यास ने भगवान श्री कृष्ण के सोलह हजार एक सौ आठ विवाह में से रुक्मणी मंगल का सजीव झांकी के माध्यम से चित्रण किया। अपने प्रवचनों में कथा व्यास ने बताया कि श्री कृष्ण के पास जब रुक्मणी ने संदेश भेजा था कि रुक्मणी के घर वाले इनका विवाह कहीं और करना चाहते हैं। तब उन्होंने श्री कृष्ण से कहा कि वह श्री कृष्ण से ही विवाह करना चाहती हैं क्योंकि विश्व में उनके जैसा अन्य कोई पुरुष नहीं है। भगवान श्री कृष्ण के गुणों और उनकी सुंदरता पर मुग्ध होकर रुक्मणी ने मन ही मन निश्चय किया कि वह श्रीकृष्ण को छोड़कर किसी को भी पति के रूप में वरण नहीं करेंगी। उधर श्री कृष्ण भगवान को भी इस बात का पता लग चुका था कि रुकमणी परम रूपवती तो है ही, इसके साथ-साथ परम सुलक्षणा भी हैं। उन्होंने बताया कि भीष्मक का बड़ा पुत्र रुकनी भगवान श्री कृष्ण से शत्रुता रखता था। वह अपनी बहन रुक्मणी का विवाह शिशुपाल से करना चाहता था। परंतु उसकी एक न चली और रुकमणी श्रीकृष्ण विवाह सकुशल सम्पन्न हुआ। कथा के मुख्य यजमान सुखदेव तिवारी ने बताया कि कथा का समापन सोमवार को होगा। समापन के बाद हवन तथा ब्रह्म भोज भंडारा का आयोजन किया जाएगा। कथा के दौरान भाजपा नेता शैलेंद्र पांडे मोनू, गया प्रसाद तिवारी, प्रेम नाथ तिवारी, अनिल उपाध्याय, राम जी तिवारी, गोमती प्रसाद तिवारी, शिव कुमार तिवारी, राज करन पांडेय, राम सुरेश शुक्ला, घनश्याम पांडेय, कृष्ण कुमार तिवारी सोनू, मनोज तिवारी, अंबिका प्रसाद तिवारी, विवेक तिवारी मोनू, मेवा लाल चौहान, रुद्र प्रताप सिंह, परमेश पांडेय, महेश तिवारी, भगवती प्रसाद तिवारी, सर्वजीत तिवारी, लालजी पांडेय समेत तमाम कथा श्रोताओं ने कथा का रसपान किया।
