मनोज तिवारी
अयोध्या। नंदीग्राम भरतकुंड में आयोजित की जा रही तीन दिवसीय श्री भरत जी चरित्र कथा के दूसरे दिन कथा व्यास पंडित अमरनाथ पांडे ने गोस्वामी तुलसीदास जी के राम चरित मानस के सन्दर्भ को अपनी सरल व सहज भावाभिव्यक्ति से उपस्थित श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। संगीतमय कथा के दौरान बताया गया कि योगिराज भरत के चरित्र के द्वारा गोस्वामी जी ने रामचरित मानस मे परिवार व समाज के लिए जो भाव प्रस्तुत किए हैं। उसकी व्याख्या विभिन्न दृष्टांतों के द्वारा करते हुए वर्तमान समय मे हमारे लिए कितना अनुकरणीय व प्रासंगिक है, इसकी विवेचना व्यास द्वारा बड़े ही सहज भाव से किया गया। अयोध्या से भरत की यात्रा का वर्णन, श्रृंगवेरपुर के गंगा तट पर रामघाट तक के कथा प्रसंगों मे निषादराज का लक्ष्मण के साथ के गुरु शिष्य भाव को भरत और राम के अनूठे भातृत्व प्रेम का मार्मिक विश्लेषण ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। धार्मिक कार्यक्रम में अयोध्या से पधारे गुरु वशिष्ठ पीठाधीश्वर महंत गिरीश पति त्रिपाठी द्वारा आशीर्वचन तथा अयोध्या के संत मिथिला विहारी दास के द्वारा प्रस्तुत संकीर्तन व भजन पर श्रद्धालु झूमते रहे। कथा के दौरान तमाम श्रद्धालु शामिल रहे।
