गोंडा के ग्राम पंचायत मरगूबपुर में जनसहभागिता से होगा 5100 पौधों का रोपण
अटल वन में रोपित होंगे त्रिवेणी वन, पंचवटी क्षेत्र, औषधीय वनस्पति वाटिका व नवग्रह वाटिका
जानकी शरण द्विवेदी
गोंडा! अटल वन को लेकर गोंडा में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया जा रहा है। जिलाधिकारी नेहा शर्मा की इस अनूठी सोच ने अटल वन को केवल एक पौधारोपण परियोजना नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन बना दिया है। इसकी शुरुआत ग्राम पंचायत मरगूबपुर में की जा रही है, जहां 3.3680 हेक्टेयर भूमि पर यह वन आकार लेगा।
अटल वन की अवधारणा भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की स्मृति में तैयार की गई है। इसमें हरिशंकरी प्रजाति के पौधे, त्रिवेणी वन, पंचवटी क्षेत्र, औषधीय वनस्पति वाटिका, नवग्रह वाटिका और फलदार तथा इमारती वृक्ष शामिल किए जाएंगे। इस संरचना से अटल वन केवल हरियाली ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और पारिस्थितिक दृष्टिकोण से भी बेहद समृद्ध नजर आएगा।
वन की खास बात यह है कि इसमें जनसहभागिता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। जिलाधिकारी नेहा शर्मा का मानना है कि यह वन समाज को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने का सबसे प्रभावी माध्यम बनेगा। उनका कहना है कि अटल वन एक ऐसा प्रयास है जिसमें हर व्यक्ति पौधों से भावनात्मक रूप से जुड़ सकेगा। वन में 21 जुलाई को विशेष कार्यक्रम के दौरान 5100 पौधे एक साथ लगाए जाएंगे। इस कार्यक्रम में 5100 नागरिक भाग लेंगे और हर व्यक्ति एक पौधा लगाएगा। अटल वन के इस आयोजन को केवल संख्या के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे जनचेतना और हरित भविष्य का संदेश माना जा रहा है।
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अटल वन के रखरखाव की जिम्मेदारी मनरेगा योजना से जोड़ी गई है। पौधों की निराई, गुड़ाई, सिंचाई और सफाई जैसे कार्य नियमित रूप से श्रमिकों द्वारा किए जाएंगे। वन की सुरक्षा के लिए तारबंदी की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है। जिलाधिकारी नेहा शर्मा स्वयं इसकी निगरानी कर रही हैं ताकि अटल वन को स्थायी और सफल बनाया जा सके। वन की इस पहल से गोंडा में पर्यावरण के प्रति सकारात्मक माहौल बना है। कई लोग इसे हरित क्रांति की ओर एक निर्णायक कदम मान रहे हैं। अटल वन के माध्यम से लोगों में यह संदेश फैलाया जा रहा है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है।
जिलाधिकारी नेहा शर्मा ने बताया कि अटल वन का उद्देश्य सिर्फ पौधे लगाना नहीं, बल्कि लोगों में दीर्घकालीन जागरूकता पैदा करना भी है। अटल वन आने वाले वर्षों में गोंडा का हरित पहचान बनेगा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायक मिसाल के रूप में सामने आएगा। इस वन को लेकर पूरे जिले में उत्साह का माहौल है और लोग इस ऐतिहासिक कार्यक्रम का हिस्सा बनने के लिए आतुर हैं। अटल वन के जरिए गोंडा जिले में हरियाली की लहर दौड़ने जा रही है और यह पहल भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक अनमोल तोहफा साबित होगी।
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