महाराजगंज (हि.स.)। सरकार ने गन्ना मूल्य बकाया भुगतान को लेकर चीनी मिलों पर शिकंजा कसना शुरू किया है। जिले के गडौरा चीनी मिल पर भी शिकंजा कसा गया है। पिछले दो सीजन से गन्ना मूल्य भुगतान कराने वाली इस मिल के नीलामी की तिथि तय कर दी गई है। 27 जून को नीलामी की तिथि निर्धारित की गई है। निचलौल तहसील परिसर में होने वालीं नीलामी से मिले धन से ही अब गन्ना किसानों और गन्ना समितियों के बकाया का भुगतान सम्भव है।
पिछले दो सीजन में किसानों से गन्ना खरीदने के बाद भी गडौरा चीनी मिल ने गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं किया है। इतना ही नहीं, गन्ना समितियों का बकाया कमीशन भी भुगतान की राह देख रहा है। अब जिला प्रशासन ने चीनी मिल की जमीन बेचने का निर्णय लिया है और उसकी तिथि भी निर्धारित कर दिया है। दीवालिया हो चुकी गडौरा चीनी मिल ने वर्ष 2020-21 में गन्ना किसानों से कुल 08 लाख 15000 कुंतल गन्ना खरीदा था। इसका मूल्य लगभग 26 करोड़ 16 लाख रूपए हुआ था, लेकिन चीनी मिल ने सिर्फ 12 करोड़ 16 लाख रुपया ही किसानों को भुगतान किया। जिससे हजारों किसानों को अब तक गन्ना मूल्य भुगतान नहीं मिल सका है। इसी तरह से वर्ष 2021-22 में 02 लाख 14000 कुंतल गन्ना खरीद कर चीनी मिल ने पेराई की और चीनी का उत्पादन किया। बावजूद इसके इस सत्र में भी किसानों के बैंक खाते में एक पाई भी नहीं भेजा गया। किसान अपने खून पसीने की कमाई के पैसे के लिए तरस रहे हैं। इतना ही नहीं, गन्ना समितियों को भी अभी उनके कमिशन का एक करोड़ रुपया बकाया चाला आ रहा है। इस देनदारी का भुगतान भी चीनी मिल के नीलाम होने के बाद ही किया जा सकेगा।
भुगतान का आश्वासन देता रहा चीनी मिल
किसानों के गन्ना मूल्य भुगतान को लेकर सरकारें काफी संजीदा हुई। इसके बाद जिला प्रशासन ने भी गन्ना मूल्य भुगतान के लिए चीनी मिल पर दबाव बनाना शुरू किया। कई राउंड की बातचीत हुई। बावजूद इसके नतीज़ा सिफर रहा। केवल भुगतान संबंधी कोरा आश्वासन ही मिलता रहा। फिर, आजिज आकर जिला प्रशासन ने चीनी मिल प्रबंधन को नीलामी का नोटिस थमा दिया है। शायद, किसानों के गन्ना मूल्य भुगतान का एकमात्र यही रास्ता बच गया था।
बोले जिला गन्ना अधिकारी
जिला गन्ना अधिकारी जगदीश चंद्र यादव ने कहा है कि गन्ना मूल्य भुगतान नहीं होने से किसानों की परेशानियां बढ़ गई हैं। जिला प्रशासन के पास चीनी मिल की जमीन को नीलामी करने का रास्ता ही बच गया था। अब चीनी मिल कि जमीन को नीलाम कर भुगतान का प्रयास हो रहा है। समितियों के कमीशन के मद में बकाए धनराशि का भुगतान भी होगा।
आमोद
