Thursday, February 12, 2026
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17 साल की उम्र में बन गया 70 करोड़ रुपए का मालिक

प्रादेशिक डेस्क

बरेली। साइबर ठगी के लिए कुख्यात झारखंड के जामतारा के एक साइबर ठग का आडियो वायरल हो गया है। वह जिसे ठगी का शिकार बनाना चाहता था। उससे बातचीत में बता रहा है कि वह 17 साल की उम्र में 70 करोड़ का मालिक बन गया। दस करोड़ और कमाने के बाद ठगी का धंधा छोड़ देगा। उसका कहना है कि ठगी के दो तीन केस करने के बाद सिम तोड़कर फेंक देते हैं। नए सिम और नए मोबाइल से साइबर ठगी का नया शिकार फांसते हैं। बरेली में पिछले दिनों धंतिया में हुई साइबर ठगी से जोड़कर इसे देखा जा रहा है। इसकी जांच पड़ताल की जा रही है कि साइबर ठगों का धंतिया के ठगों से कोई कनेक्शन तो नहीं है।
डीआईजी राजेश पांडेय का कहना है कि साइबर ठगों को आपका नंबर किसी न किसी कंपनी से ही मिलता है। ऐसी कई कंपनियां हैं, जो कुछ पैसों के बदले लोगों की पर्सनल जानकारी इन ठगों के हाथों बेच देती हैं। बैंक, फोन पे, गूगल पे या पेटीएम कभी भी आपको केवाईसी या आपके खाते से जुड़ी समस्या के लिए कॉल नहीं करेगा। बैंक ने तो कभी किसी को कॉल नहीं किया। इस तरह की फोन काल धोखेबाज करते हैं। कई बार लोग आकर्षक ऑफर, लाखों की लॉटरी, लग्जरी कार के लालच में मोबाइल पर आये मैसेज का जवाब दे देते हैं। कॉल कर देते हैं। डीआईजी का कहना है कि आज के समय में मुफ्त कुछ नहीं मिलता। खासतौर पर ऐसे ऑफर्स से हमेशा सतर्क रहना चाहिए, जो आपको भी लगता हो कि अविश्वसनीय हैं और ऐसे कौन मुफ्त में इतने पैसे और कार दे देगा। कभी कोई क्यूआरकोड स्कैन न करें, ओटीपी न बतायें। कोई कहे कि वह बैंक या पेटीएम से बोल रहा है, तो तुरंत फोन रख दें। चाहें तो उससे कह दें कि आपका बैंक खाता ब्लॉक है तो आप खुद ही बैंक और पेटीएम में कॉल कर लेंगे या ब्रांच चले जाएंगे। फ्री में कहीं कुछ नहीं मिलता, इसलिए ऐसा कोई ऑफर आये तो एक रुपया भी देने की हामी न भरें। कार या गिफ्ट का लालच दे रहा हो तो कह दीजिए आप घर आइए लेकर, यहीं टोकन मनी का पेमेंट कर देंगे। साइबर ठगों ने कुछ ऐप्स के जरिए फोन हैक करने के तरीके निकाले हैं। कभी एकाउंट, पेटीएम, गूगल पे से जुड़ी हेल्पलाइन के नाम पर कोई कॉल करके आपसे टीम व्यूवर, ऐनीडेस्क जैसी ऐप इंन्सटॉल करने को कहे तो तुरंत फोन काट दें।
एसीएस होम अवनीश अवस्थी ने मंगलवार को प्रदेश के 16 रेंज कार्यालय में खोले गये साइबर थानों के नंबर जारी कर दिये हैं। बरेली के साइबर क्राइम थाने का नंबर 7839876671 भी जारी किया है, हालांकि अभी ये नंबर एक्टिव नहीं है। उन्होंने कहा कि थाने खुले दो माह से ज्यादा हो गये हैं, लेकिन प्रचार प्रसार न होने की वजह से उनकी सक्रियता प्रभावी नहीं है। जबकि लाकडाउन में पीएम केयर फंड, रोजगार के नाम पर आये दिन ठगी हो रही है। उन्होंने रेंज के सभी डीआईजी को साइबर थाने में प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिये हैं। रेंज मुख्यालय के साइबर थाने में विश्वविद्यालय के प्रोफेसर की ओर से साइबर ठगी का एक मुकदमा दर्ज कराया गया था। बाद में उसे भी बारादरी थाने ट्रांसफर कर दिया गया। वर्तमान में थाने में एक भी मुकदमा दर्ज नहीं है।

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