Sunday, March 29, 2026
Homeउत्तर प्रदेश11वीं मुहर्रम पर पूरी अकीदत के साथ निकला लुटे काफिले का जुलूस

11वीं मुहर्रम पर पूरी अकीदत के साथ निकला लुटे काफिले का जुलूस

– ऊंट पर बैठे दो नगाड़ेबाज लयबद्ध स्वर में डंका बजाते रहे, तकरीर सुन शिया मुसलमान रो पड़े

वाराणसी (हि.स.)। मुहर्रम की 11वीं तारीख बुधवार को दालमंडी से लुटे काफिले का जुलूस (चुप का डंका) पूरी अकीदत के साथ निकला।

दालमंडी स्थित डॉ. नाजीम जाफरी के आवास से निकले लुटे काफिले के जुलूस में सबसे आगे ऊंट चल रहा था। उस पर बैठे दो नगाड़ेबाज लयबद्ध स्वर में डंका बजा रहे थे। जगह-जगह लोग फरहरा को छूते तो दुलदुल को दुपट्टा, फूल चढ़ाते और दूध, मिठाई, काजू आदि खिला रहे थे। रास्ते में महिलाएं घरों की छतों से जुलूस देख रही थीं। जुलूस निकलने के पूर्व मौलाना ने नूरानी तकरीर पेश की। तकरीर में जब उन्होंने लुटे हुए काफिले का मंजर बयां किया तो काले कपड़े पहने गम में शिया समुदाय के लोग रो पड़े। रास्ते में सैयद फरमान हैदर ने कलाम पेश किया। अशरे को भी शब्बीर का जो गम नहीं करते, वो पैरवी-ए-सरवरे आलम नहीं करते, हिम्मत हो तो महशर में पयंबर से भी कहना, हम जिंदा-ए-जावेद का मातम नहीं करते।

जुलूस नई सड़क से आगे बढ़ा तो लोगों ने रास्ते में अपने कलाम पेश किये। इस दौरान पूरा काफिला खामोश होकर चल रहा था। अंजुमन हैदरी के नौजवान अलम का फरहरा लहराते हुए चल रहे थे। जुलूस नई सड़क, शेख सलीम फाटक, कालीमहल, पितरकुण्डा, लल्लापुरा होते हुए दरगाहे फातमान पहुंचा जहां पर इमाम हुसैन के कुनबे के रौजे पर खेराज-ए-अकीदत पेश किया गया।

हाजी फरमान हैदर ने बताया कि इमाम हुसैन की शहादत के बाद यजीदियों ने शहीदों के काफिले लूट लिए थे। यही नहीं ख्वातीन (महिलाओं) के सिर से चादरें छीन ली थीं और उनके खेमे जला दिए गए थे। यही नहीं उन्हें कैदी बना लिया गया था। इसी की याद में ग्यारहवीं मुहर्रम को निकलने वाले जुलूस को लुटे हुए काफिले का जुलूस कहते हैं।

श्रीधर

RELATED ARTICLES

Most Popular