09 अप्रैल को प्रदेश व्यापी रैली की तैयारी में संघर्ष समिति
पूरे प्रदेश में 125वें दिन भी जारी रहा बिजली कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन
प्रादेशिक डेस्क
लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने बिजली के निजीकरण की मंशा पर सवाल खड़ा करते हुए आगामी 09 अप्रैल को लखनऊ में बिजली कर्मचारियों और उपभोक्ताओं की विशाल रैली की तैयारी शुरू कर दी है। आज लगातार 125वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में विरोध प्रदर्शन जारी रखा। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि निजीकरण के पीछे यदि बिजली व्यवस्था में सुधार है तो यह सुधार बिजली कर्मी बहुत तीव्र गति से कर रहे हैं। लेकिन निजीकरण के पीछे कोई और मंशा दिखाई देती है ।उन्होंने कहा कि प्रारंभ से ही निजीकरण की प्रक्रिया में कोई पारदर्शिता नहीं है और भ्रष्ट आचरण अपनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में जब योगी आदित्यनाथ की सरकार आई थी, तब ए, टी एंड सी हानियां 40 फीसद से अधिक थी जो 31 मार्च 2024 तक घटकर 16.5 फीसद रह गई हैं। राष्ट्रीय मानक 15 फीसद लाइन हानियों का है। कुछ ही महीनों में बिजली कर्मी लाइन हानियां 15 फीसद से नीचे ले आएंगे। संघर्ष समिति ने कहा कि यह सब आंकड़े समय-समय पर उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा जी स्वयं ट्वीट कर कर देते रहे हैं। अतः जब लाइन हानियां राष्ट्रीय मानक से नीचे आने जा रही है तो उत्तर प्रदेश की 42 जनपदों की लाखों करोड़ रुपए की परिसंपत्तियों को कौड़ियों के दाम निजी घरानों को बेचने की कोशिश क्यों की जा रही है।
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संघर्ष समिति ने कहा कि यह पता चला है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु नियुक्त किए गए ट्रांजैक्शन कंसलटेंट मेसर्स ग्रांट थॉर्टन के लोग पावर कारपोरेशन के निदेशक वित्त के कमरे से ही काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि यह सही है तो उत्तर प्रदेश सरकार की योगी आदित्यनाथ की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस और पारदर्शिता की नीति की खुल्लम-खुल्ला धज्जियां उड़ाई जा रही है। संघर्ष समिति ने कहा कि इसके पहले ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति के डॉक्यूमेंट में कनफ्लिक्ट आफ इंटरेस्ट (हितों के टकराव) के प्रावधान को हटा दियागया था। निजीकरण हेतु नियुक्त किए गए ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन मध्यांचल विद्युत वितरण निगम में आरडीएसएस स्कीम के अंतर्गत स्मार्ट मीटरिंग का काम कर रही है। यह सीधे-सीधे कनफ्लिक्ट आप इंटरेस्ट का मामला है। संघर्ष समिति ने कहा कि जिस स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट के आधार पर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण किया जा रहा है उस ड्राफ्ट डॉक्यूमेंट को आज तक केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने अप्रूव नहीं किया है। ड्राफ्ट डॉक्यूमेंट में प्रारंभ में ही लिखा हुआ है कि यह डॉक्यूमेंट भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय की नीति का प्रतिनिधित्व नहीं करता।
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संघर्ष समिति ने कहा कि यह तथा ऐसे अनेक सवाल है जिनसे निजीकरण की मंशा और तौर तरीकों पर प्रश्न चिन्ह खड़ा हो रहा है। संघर्ष समिति ने विगत चार माह में वाराणसी, आगरा, गोरखपुर, प्रयागराज, मेरठ, लखनऊ में बिजली महा पंचायत कर बिजली कर्मियों के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं और किसानों के बीच निजीकरण से होने वाले दुष्प्रभावों पर विस्तृत चर्चा की है। इन बिजली महा पंचायत से यह निष्कर्ष निकलकर सामने आया है कि आम उपभोक्ताओं और किसानों की यह सुविचारित राय है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े प्रांत में बिजली का निजीकरण आम जनता के हित में नहीं है। उन्होंने बताया कि आगामी 09 अप्रैल को लखनऊ में हो रही विशाल रैली में देश के सभी प्रांतों के बिजली कर्मियों का प्रतिनिधित्व होगा और भारी संख्या में आम उपभोक्ता भी सम्मिलित होंगे। आज राजधानी लखनऊ में संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने अलग-अलग कार्यालयों में जाकर बिजली कर्मचारियों से संपर्क कर 09 अप्रैल की रैली के लिए व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया। प्रदेश भर में सभी जनपदों और परियोजनाओं पर लोकसभा के साथ जनसंपर्क का अभियान चला।
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