Tuesday, March 17, 2026
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हापुड़ में नहीं रुक रहा फसल अवशेष जलाने का सिलसिला, प्रशासन हुआ सख्त

हापुड़ (हि. स.)। सरकार की अपील और न्यायालय द्वारा फसल अवशेष जलाने पर दंड निर्धारित कर दिए जाने के बावजूद में जनपद में फसल अवशेष जलाने का सिलसिला रुक नहीं रहा है। जनपद में सेटेलाइट के माध्यम से खेतों में फसल अवशेष जलाए जाने की जानकारी प्रशासन को मिली है। लेखपाल और कृषि विभाग की टीम ने इन मामलों की जांच करने के बाद आर्थिक दंड लगाने के लिए तहसील प्रशासन को रिपोर्ट भेज दी है। उपकृषि निदेशक ने भी दो गांवों के प्राविधिक सहायकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
उपकृषि निदेशक डॉ. वीबी द्विवेदी ने बताया कि वायु प्रदूषण को नियंत्रण करने के लिए फसल अवशेष अथवा कूड़ा जलाने पर रोक है। फसल अवशेष जलाए जाने के कारण वायुमंडल प्रदूषित होता है। इससे मनुष्य, पशुओं और पक्षियों में संक्रामक रोग फैल जाते हैं। इस कारण जनपद में प्रदूषण को रोकने के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण के निर्देश के अनुसार कार्रवाई की जा रही है। इसके लिए पिछले तीन वर्षों से सेटेलाइट के माध्यम से भी निगरानी की जा रही है। 
उपकृषि निदेशक ने कहा कि जनपद में किसी को भी फसल अवशेष अथवा कूड़ा जलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने बताया कि रविवार को गांव भटियाना में दो खेतों में और गढ़ तहसील क्षेत्र के गांव मुकीमपुर में एक खेत में फसल अवशेष जलाने की जानकारी मिली थी। इन तीनों मामलों की जांच कराई गई। जांच के बाद जानकारी सत्य पाई गई। इसके बाद लेखपाल और प्राविधिक सहायक ने किसानों पर जुर्माना लगाने के लिए तहसील प्रशासन को रिपोर्ट भेज दी है। तहसीलदार द्वारा जुर्माना लगाने के बाद जुर्माना वसूला जाएगा। उन्होंने बताया ग्रामीणों को जागरूक नहीं करने के आरोप में दोनों गांवों के प्राविधिक सहायकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है। 
उपकृषि निदेशक ने किसानों से अपील की कि वह फसल अवशेष को जलाएं नहीं। इससे मिट्टी की उर्वरा क्षमता प्रभावित होती है। पराली या गन्ने की पत्ती को खेत में ही कृषि यंत्रों जैसे रोटावेटर, मल्चर, एमबी प्लो आदि का प्रयोग करके दो किलो प्रति बीघा के हिसाब से यूरिया का छिड़काव कर दें। इस क्रिया के बाद यह फसल अवशेष जल्द ही सड़ जाएंगे और आगामी फसल को पोषक तत्व प्रदान करेंगे। इससे अगली फसल के उत्पदन में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि कृषि यंत्र जनपद में 20 सहकारी समितियों, तीन गन्ना समितियों, दो ग्राम पंचायतों पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जो किसान के लिए न्यूनतम किराये पर उपलब्ध रहेंगे।

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