प्रयागराज (हि.स.)। भूमि अधिग्रहण के मामले में आज कोर्ट में दाखिल सैकड़ों किसानों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा है कि एनएचए आई द्वारा अवार्ड की घोषणा के बाद मुआवजा राशि सक्षम अधिकारी के यहां जमा कर देने के बाद काश्तकारों को मुआवजा क्यों नहीं दिया गया।
चीफ जस्टिस राजेश बिन्दल व जस्टिस पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने की। खंडपीठ ने कई दर्जन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए आज यह आदेश पारित किया। कोर्ट ने सरकार से इस सम्बन्ध में सभी जिलों के सक्षम अधिकारियों से आवश्यक जानकारी लेकर कोर्ट को 17 दिसम्बर को बताने का निर्देश दिया है।
हाईकोर्ट ने इससे पूर्व एन एच ए आई से एक हलफ़नामा मांगा था कि वह बताए कि एन एच ए आई के लिए किसानों का भूमि अधिग्रहण कर लेने के बाद भी किसानों को मुआवजा क्यों नहीं दिया गया। कोर्ट के इस निर्देश के क्रम में एनएचएआई ने एक हलफनामा दाखिल कर बताया कि उसके यहां से उन सभी मामलों में मुआवजा राशि सक्षम अधिकारी के यहां जमा कर दिया गया है, जिसमें अवार्ड पारित है।
कास्तकारों को अवार्ड के बाद पैसा जमा हो जाने पर मुआवजा राशि देने की जिम्मेदारी सरकार व इसके सक्षम अधिकारियों की है। राज्य के अधिवक्ता रामानंद पाण्डेय ने कोर्ट को बताया कि अभी काश्तकारों को दिए गए मुआवजे की राशि की डिटेल नहीं आ पाई है। इस पर कोर्ट ने किन-किन कास्तकारों को राशि आवंटित की गई है, इसका विवरण पेश करने को कहा है। हाइकोर्ट इस मामले में कई याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई कर रहा है। याचिकाओं में कई जिले के किसानों ने हाईकोर्ट के सामने मुआवजे की मांग की गई है।
आरएन
