Wednesday, April 1, 2026
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 हाईकोर्ट के फैसले के बाद सक्रिय हुए निकाय टिकट के नए दावेदार

मेरठ (हि.स.)। निकाय चुनावों के आरक्षण पर हाईकोर्ट के निर्णय से सभी राजनीतिक दलों के समीकरण बदल गए हैं। इससे ओबीसी दावेदारों को झटका लगा है तो अब नए सिरे से अन्य वर्गों के दावेदारों ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। मेरठ में अब महापौर पद के निष्क्रिय हुए टिकट दावेदारों ने अपनी पैरवी शुरू कर दी है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने उप्र में निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण पर निर्णय सुना दिया है। इससे पूरे प्रदेश में नगरीय निकायों का आरक्षण बदल जाएगा। इसका सीधा असर मेरठ नगर निगम में महापौर के पद पर भी पड़ेगा। इस निर्णय से ओबीसी वर्ग के टिकट दावेदारों को करारा झटका लगा है। प्रदेश सरकार ने मेरठ में महापौर का पद ओबीसी के लिए आरक्षित किया गया था, जबकि 2017 में यह पद अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित था। अब हाईकोर्ट के फैसले से नगर निगम के महापौर, नगर पालिका और नगर पंचायतों के अध्यक्ष पदों का आरक्षण बदलने से पुराने टिकट के दावेदारों की हलचल शुरू हो गई है। मेरठ में महापौर का पद ओबीसी में जाने पर सामान्य वर्ग के दावेदार फिर से सक्रिय हो गए हैं। उनका मानना है कि महापौर का पद अब अनारक्षित हो जाएगा।

भाजपा से टिकट चाहने वालों में पंजाबी समाज के दावेदार सबसे ज्यादा है। इनमें नवीन अरोड़ा, धर्मवीर नारंग, हरिकांत अहलूवालिया, महेश बाली आदि ने भाजपा आलाकमान से फिर से तार जोड़ने शुरू किए हैं। इसी तरह से नगर पालिका और नगर पंचायतों में भी दावेदारों ने अपनी गतिविधि तेज कर दी है। भाजपा का टिकट चाहने वालों में सबसे ज्यादा खलबली मची है। इसी तरह से दूसरे राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी अपनी कदमताल शुरू कर दी है। हाईकोर्ट के फैसले से नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों के वार्डों का आरक्षण भी प्रभावित होगा।

कुलदीप

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