-सात माह की अवधि में प्रधानमंत्री का दूसरा दौरा
कुशीनगर (हि.स.)। 2566 वीं त्रिविध पावन बुद्ध जयंती के दिन अपने बीच देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पाकर बुद्ध की निर्वाण भूमि पूरे दिन हर्ष, उल्लास व उत्साह में डूबी रही। सात माह के भीतर दूसरी बार प्रधानमंत्री को अपने बीच पाकर स्थानीय जनमानस सहित बौद्ध भिक्षुओं के चेहरे गर्व से दमकते दिखे। वातावरण में बुद्ध के संदेश व विचार गूंजते रहे।
इस अवसर विशेष को ऐतिहासिक बनाने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने महापरिनिर्वाण मन्दिर व स्तूप की विशेष साज सज्जा की थी। गेंदा, गुलाब, डहेलिया समेत भिन्न भिन्न प्रजाति के खुशबूदार फूलों से मन्दिर को सजाया गया था। मन्दिर के चारों तरफ पंचशील ध्वज लहरा रहे थे। यहां स्थित मित्र देश थाईलैंड, जापान, म्यांमार, श्रीलंका, कोरिया, वियतनाम के बौद्ध मॉनेस्ट्री समेत होटल्स व सरकारी भवनों की साफ सफाई, रंग-रोगन कर चमका दिया गया था। भवनों पर रंगीन झालरे व पताका लगाए गए थे। नगरपालिका व वन विभाग ने संयुक्त रूप से पूरे महापरिनिर्वाण पथ को नीट क्लीन एन्ड पॉल्यूशन फ्री जोन के रुप में तब्दील कर दिया था। पथ के दोनों तरफ डिजाइनर गमलों में अशोक, पाम समेत विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए थे। पाथ-वे के साथ लोक निर्माण विभाग ने पथ की टैंकर से पानी मंगा विशेष रूप से धुलाई करवाई थी। स्थानीय लोगों ने भी प्रधानमंत्री के स्वागत में अपने अपने भवनों के रंग रोगन साफ सफाई पर ध्यान देते हुए पंचशील ध्वज लगाए।
20 अक्टूबर को प्रधानमंत्री इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उद्घाटन के वक्त महापरिनिर्वाण मन्दिर आए थे। बुद्ध जयंती के दिन पुनः आने की चर्चाएं जब शुरू हुई तो सहसा किसी को विश्वास नही हो रहा था कि देश के शीर्षस्थ नेता का दौरा पुनः इतनी जल्दी हो सकता है। परन्तु प्रशासनिक तैयारियां व पक्के तौर पर कार्यक्रम आया देख लोगों की धारणाएं टूट गई।
देश के नामचीन उद्योगपति बिरला समूह के गेस्ट हाउस का प्रबंधन संभालने वाले वीरेंद्र तिवारी का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इतिहास रच दिया है। जवाहरलाल नेहरू से लगायत मनमोहन सिंह तक कभी किसी प्रधानमंत्री ने बुद्धभूमि पर मत्था टेकने की आवश्यकता नहीं समझी। प्रधानमंत्री का सात माह में दूसरी बार दौरा देश व दुनिया के लिए सन्देश है कि विश्व शांति का मार्ग बुद्ध और सिर्फ बुद्ध हैं।
गोपाल
