– पूर्व मंत्री के प्रोफेसर पुत्र बनाए गए उम्मीदवार
-दो बार विधानसभा के चुनाव में बीजेपी को दे चुके है कड़ी टक्कर
-तीन दिन पहले ही टिकट न मिलने से छोड़ी थी अखिलेश यादव की साइकल
-दलबदलू को उम्मीदवार बनाए जाने से बीजेपी के नेताओं में छायी मायूसी
हमीरपुर (हि.स.)। हमीरपुर विधानसभा की सदर सीट से अब अखिलेश यादव की पार्टी छोड़कर आए प्रोफेसर डा. मनोज कुमार प्रजापति बीजेपी के उम्मीदवार बनाए गए है। पिछले कई दिनों से मंथन के बाद पार्टी ने जातीय समीकरणों को देखते हुए दलबदलू पर दांव लगाया है जिसे लेकर बीजेपी के तमाम दिग्गजों में मायूसी छा गई है।
हमीरपुर जिले के सुमेरपुर ब्लाक क्षेत्र के पौथियां गांव निवासी डा. मनोज कुमार प्रजापति औरैया में एक निजी महाविद्यालय के प्रोफेसर है। इनके पिता शिवचरण प्रजापति हमीरपुर सदर विधानसभा क्षेत्र से चार बार विधायक रहे है साथ ही वह मायावती की सरकार में राज्यमंत्री भी बनाए गए थे। शिवचरण प्रजापति ने वर्ष 2012 में टिकट न मिलने से नाराज होकर बीएसपी छोड़ एसपी ज्वाइन की थी। वर्ष 2014 में सदर सीट के उपचुनाव में शिवचरण प्रजापति को अखिलेश यादव ने उम्मीदवार बनाया था और तत्कालीन कबीना मंत्री गायत्री प्रजापति ने उन्हें जीताने के लिए यहां चुनावी मैदान में पूरी ताकत लगाई थी। जिसके चलते यहां की सीट के खाते में आई थी।
जातीय समीकरण में दो बार चुनाव में दे चुके है कड़ी टक्कर
प्रोफेसर डा. मनोज कुमार प्रजापति राजनीति में पुराने खिलाड़ी है जिनकी अपनी ही बिरादरी में मजबूत पकड़ है। इन्होंने वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में पूर्व सांसद व बीजेपी प्रत्याशी अशोक सिंह चंदेल जैसे दिग्गज से पहली बार कड़ी टक्कर लेते हुए अखिलेश यादव की साइकिल दौड़ाई थी। हालांकि ये 62233 मत पाकर दूसरे स्थान पर रहे थे। जबकि बीएसपी 60543 मत पाकर तीसरे स्थान पर रही। वर्ष 2019 में सदर सीट के उपचुनाव में फिर डाँ.मनोज प्रजापति ने साइकिल को रफ्तार देते हुए बीजेपी से कड़ा संघर्ष किया लेकिन उन्हें मोदी की लहर में पराजय का सामना करना पड़ा। उन्हें 29.29 फीसदी मत मिले थे।
उपचुनाव में कुछ हजार मतों के अंतर से हारे थे प्रोफेसर
पूर्व मंत्री शिवचरण प्रजापति के पुत्र प्रोफेसर डा. मनोज कुमार प्रजापति हमीरपुर सदर विधानसभा क्षेत्र से वर्ष 2019 के उपचुनाव में एसपी के टिकट से चुनाव मैदान में आए थे। उन्होंने बारिश और बाढ़ के बीच चुनावी दंगल में बीजेपी प्रत्याशी युवराज सिंह को कड़ी टक्कर दी थी। लेकिन वह 17867 मतों के अंतर से चुनाव हार गए थे। चुनावी जानकारों की माने तो हमीरपुर विधानसभा क्षेत्र के एसपी के मजबूत गढ़ वाले आधा दर्जन से अधिक गांवों में समस्याओं को लेकर ग्रामीणों ने वोट नही डाले थे। खराब मौसम के बीच मतदान का प्रतिशत भी बहुत कम रहा जिससे एसपी प्रत्याशी को तगड़ा झटका लगा था।
सदर सीट के चुनाव में अब होगा त्रिकोणीय मुकाबला
हमीरपुर सदर सीट के लिए जहां बीजेपी ने पिछड़ी जाति से नए चेहरे को उम्मीदवार बनाया है वहीं कांग्रेस ने सामूहिक हत्याकांड के सजायाफ्ता अशोक सिंह चंदेल की पत्नी राजकुमारी चंदेल पर दांव लगाया है। इसके अलावा बीएसपी से रामफूल निषाद, एसपी से रामप्रकाश प्रजापति व आम आदमी पार्टी से राजेश कुमार बाजपेई चुनाव मैदान में है। यहां 14 ब्राम्हण, 11 फीसदी से अधिक क्षत्रिय मतदाता है जो जातीय प्रत्याशियों के समर्थन में वोट बंट सकता है। प्रजापति वोट बैंक भी सजातीय प्रत्याशियों के कारण बिखर सकता है। चुनावी पंडितों की माने तो यहां सदर की सीट पर अब त्रिकोणीय मुकाबला होना तय है।
पंकज
