टिकट न मिलने से नाराज पार्टी के दिग्गज देंगे झटके पे झटका
हमीरपुर(हि.स.)। हमीरपुर जिले में विधानसभा की दो सीटों पर नए चेहरे को उम्मीदवार बनाए जाने के अखिलेश यादव के फैसले को लेकर यहां सपाई बौखला गए हैं। लम्बे अर्से से जमीन पर पसीना बहाने वाले बड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए यहां दोनों उम्मीदवार आंख की किरकिरी बन गए हैं। इसीलिए चुनावी दंगल में पार्टी के प्रत्याशी अपने ही लोगों के भितरघात के भंवरजाल में फंस गए हैं। एसपी के कई दिग्गज पार्टी के लिए बागी भी होते दिख रहे हैं, जिससे अबकी बार अखिलेश यादव के मिशन-2022 को तगड़ा झटका लगना तय है।
हमीरपुर विधानसभा क्षेत्र की सदर सीट पर अबकी बार एक दर्जन से अधिक संभावित प्रत्याशियों ने टिकट न मिलने के कारण अखिलेश यादव के फैसले का जमकर विरोध किया था। विरोध के चलते राठ विधानसभा क्षेत्र की सुरक्षित सीट से घोषित पूर्व विधायक गयादीन अनुरागी का तो टिकट काटकर राजपूत चन्द्रवती वर्मा को दे दिया गया है लेकिन हमीरपुर सदर सीट में पार्टी के बड़े नेताओं के हंगामा करने के बाद भी प्रत्याशी नही बदला जा सका। जिले की दोनों विधानसभा सीटों के लिए पहली बार एसपी ने नए चेहरे को उम्मीदवार बनाया है। इसे लेकर यहां पार्टी के तमाम नेता बागी होकर अब पार्टी के मिशन को ही झटका दे रहे है।
भितरघात से बिगड़ेगा जातीय समीकरण का खेल
एसपी के तमाम वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि हमीरपुर जिले की दोनों सीटों पर ऐसे उम्मीदवार बनाए गए हैं, जिन्हें राजनीति की एबीसीडी भी नहीं आती है। जिन लोगों ने पार्टी के लिए लम्बे समय से पसीना बहाकर गांव-गांव में संगठन को खड़ा किया है, उन्हीं को टिकट मांगने पर ठेंगा दिखाया गया है। बताया कि हमीरपुर सदर सीट में रिटायर्ड एसडीओ फारेस्ट रामप्रकाश प्रजापति कभी भी राजनीति में नहीं रहे हैं। इनका कोई जनाधार भी नहीं है, फिर भी चुनाव मैदान में उन्हें उतारा गया है। इससे लगता है कि बीजेपी को सीधे तौर पर लाभ पहुंचाने के लिए इस तरह से फैसला लिया गया है। इसी तरह से पूर्व विधायक अंबरेश कुमारी को भी पार्टी से मायूसी मिली है, जबकि ये एसपी से एक बार विधायक भी रह चुकी हैं। उन्हें उम्मीदवार न बनाए जाने की वजह से राठ विधानसभा क्षेत्र में भी इस बार साईकिल का पंचर होना तय है।
बागियों के कारण बिखर सकते हैं पिछड़ी जाति के वोट
हमीरपुर सदर विधानसभा क्षेत्र में करीब चार लाख, 01हजार, 497 मतदाता हैं, जिनमें छह फीसदी मुस्लिम, आठ फीसदी प्रजापति, 12 फीसदी निषाद, चार फीसदी कुशवाहा व चार फीसदी कुर्मी के अलावा अन्य पिछड़ी जाति के मतदाता हैं। वहीं 31हजार, 852 से अधिक यादव तथा साढ़े चार हजार लोधी मतदाता भी हैं। पिछड़ी जाति के मतदाता भी साईकिल से कभी जुड़ा रहा है लेकिन अबकी बार जमीन से जुड़े लोगों को टिकट न मिलने के कारण यह वोट बिखर सकता है। इस विधानसभा क्षेत्र में 14 फीसदी ब्राह्मण और 11 फीसदी क्षत्रिय मतदाता चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाते हैं लेकिन यहां एसपी के तमाम दिग्गजों की नाराजगी और उनके बागी होने से पार्टी को तगड़ा नुकसान होना तय माना जा रहा है। राठ विधानसभा क्षेत्र में भी पिछड़ी बिरादरी के मत भी भितरघात से बिखरेंगे।
पंकज
