-विधानसभा क्षेत्र में बीएसपी और बीजेपी में हो सकता है सीधा मुकाबला, एसपी और कांग्रेस भी दे रही कड़ी चुनौती
हमीरपुर (हि.स.)। बुन्देलखंड क्षेत्र के हमीरपुर समेत विधानसभा की कई सीटों पर चुनावी घमासान मचा हुआ है। इस बार क्षत्रियों की नाराजगी से बीजेपी को बड़ा झटका लग सकता है। क्योंकि क्षत्रिय समाज के नेताओं की उपेक्षा कर दल-बदलू नेताओं को चुनाव मैदान में लाया गया है जिसके कारण चुनावी प्रचार अभियान में पार्टी के जमीनी लोग किनारा किए है।
कुछ सीटों पर बीएसपी और बीजेपी के बीच सीधी लड़ाई होने के आसार है। वहीं, कांग्रेस और एसपी भी इन दोनों को कड़ी चुनौती दे रहे हैं।
बुन्देलखंड के हमीरपुर जिले में विधानसभा की दो सीटें है जिसमें सदर सीट पर बीएसपी, बीजेपी में सीधी टक्कर होते दिख रही है। इसी बीच एसपी और कांग्रेस के उम्मीदवार जातीय जोड़तोड़ कर इन दोनों ही दलों के प्रत्याशियों को कड़ी चुनौती देने में जुटे है। जातीय समीकरणों पर नजर डाले को यहां सर्वाधिक करीब 65 हजार दलित मतदाता है जबकि 50 हजार से अधिक ब्राह्मण मतदाता और करीब 53 हजार निषाद बिरादरी के मतदाता है। यादव समाज के भी करीब 36 हजार, 42 हजार के करीब प्रजापति मतदाता है। इसके अलावा आरख और पाल बिरादरी के भी बारह-बारह हजार मतदाता है। वहीं, 22 कुशवाहा, करीब 20 हजार वैश्य व कोरी, खटीक, बसोर, धानुक, बाल्मीकि समाज के करीब 44 हजार मतदाता है।
हमीरपुर में एसपी और बीजेपी के उम्मीदवार सजातीय है जो दोनों अपनी ही प्रजापति बिरादरी पर मजबूत पकड़ रखते है। अबकी बार चुनाव में ये दोनों उम्मीदवारों के बिरादरी के वोटों का बंटवारा हो सकता है इसके लिए चुनावी दंगल में दोनों ही एक दूसरे के वोट बैंक में सेंध लगा रहे है।
अब जब मतदान के कुछ ही दिन रह गए है तब हमीरपुर के साथ ही बुन्देलखंड के अन्य विधानसभा क्षेत्रों में मुस्लिम मतदाताओं में भी इस बात को लेकर उठापटक शुरू हो गई है कि कौन पार्टी चुनाव मैदान में दूसरे नम्बर पर है। इस समाज का वोट वहीं जा सकता है जो बीजेपी को कड़ी टक्कर देगा। बता दे कि पूरे क्षेत्र में ब्राह्मण और मुस्लिम मतदाता चुनाव में निर्णायक होते है। लेकिन ये दोनों बिरादरी एक दूसरे के खिलाफ ही चुनाव में खड़े होते है।
चुनाव में उपेक्षा से क्षत्रिय समाज नाराज
बुन्देलखंड क्षेत्र में विधानसभा की 19 सीटें है जिसमें हमीरपुर सदर सीट से मौजूदा विधायक युवराज सिंह को किनारे करके दलबदलू नेता को चुनाव मैदान में लाया गया है जिससे यहां का क्षत्रिय समाज नाराज है। तमाम क्षत्रियों ने अपना दर्द सुनाते कहा कि अपनी ही सरकार में उपेक्षा बर्दाश्त नहीं हो रही है। यदि किसी को भी टिकट देना भी था तो साइकिल की सवारी छोड़कर आए दलबदलू की जगह किसी और को उम्मीदवार बनाया जाता तो शायद इतनी ठेस नहीं होती।
इसीलिए यहां क्षत्रिय समाज की बेरुखी से अब बीजेपी को अबकी बार चुनाव में झटका लग सकता है। अभी तक के चुनाव प्रचार से यहीं लगता है कि यहां बीएसपी और बीजेपी के बीच मुकाबला हो सकता है लेकिन एसपी और कांग्रेस के उम्मीदवार निर्णायक मतदाताओं के बलबूते बीएसपी और बीजेपी को भी कड़ी चुनौती देने में जुटे है।
राठ विधानसभा क्षेत्र में तो एसपी और बीजेपी के बीच कड़ा मुकाबला होने के आसार दिखने लगे है। यहां कांग्रेस और बीएसपी आपस में ही संघर्ष कर रही है जबकि महोबा में बीजेपी, एसपी और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होना तय माना जा रहा है। बुन्देलखंड के अन्य कई सीटों पर भी बीजेपी और एसपी के बीच सीधी लड़ाई होने के आसार है। लेकिन कुछ सीटों को छोड़ दिया जाए तो बीजेपी को अबकी बार अपनों से ही भितरघात के कारण झटका खाना पड़ रहा है।
पंकज
