मेरठ (हि.स.)। संस्कार भारती द्वारा आयोजित काव्य गोष्ठियों में कवियों ने अपनी रचनाओं से माहौल जीवंत बना दिया। इस दौरान श्रृंगार और वीर रस की कवियों ने अपनी कविताएं पढ़ीं।
संस्कार भारती की साहित्यिक स्वामी विवेकानंद इकाई द्वारा रविवार को केशव भवन में काव्य गोष्ठी एवं कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विजय प्रेमी ने की। मुख्य अतिथि ईश्वर चंद्र गंभीर और डॉ. सुधाकर आशावादी रहे। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नवोदित रचनाकारों को स्थापित रचनाकारों से कविता लिखने और उसे सुधारने के गुर से अवगत कराना था। कार्यक्रम की शुरुआत अलका गुप्ता की सरस्वती वंदना से हुई। नीलम मिश्रा ने सुनाया कि ’हमको बहुत याद आती है, तुम्हारी चिट्ठियां।’ रचना सिंह वानिया ने सुनाया कि ’मां ने दिया है जीवन, मां ने है हमको पाला, मां का दुलार तू है, अमृत से भरा प्याला।’ मीनाक्षी शंकर ने ’कभी अर्थ देखती हूं, कभी फर्श देखती हूं।’ कविता सुनाई। डॉ. सुदेश यादव दिव्य ने ’तुम बिन क्या जीवन है, एक बार चले आओ। मिलने का बहुत मन है, एक बार चलके आओ।’ सुनाई। जबकि अरुणा पंवार ने ’बहुत सुनी है अमर कहानी पूजा नमाज और अमृतवाणी।’ सुनाई। कवि आदिल अहमद ने कहा कि ’जब तक पलड़ा भारी है तब तक जग आभारी है।’ धर्मपाल आर्य वेद पथिक ने कहा कि ’मिटाने से नीति नहीं है, निशानी हर बात की लिखी जा रही है कहानी।’ कवि रामअवतार त्यागी ने पढ़ा ’भूतों ने फरमाया, हिंसा का साया हमसे है बड़ा।’
पूनम शर्मा ने ’कोख में मत मारो बेटी को’ कविता सुनाई। माला ने सुनाया ‘हमने दुनिया को बड़े करीब से देखा है’, शोभा रतूडी ने सुनाया ’जीवन के शब्दकोष में मिला न कोई शब्द ऐसा’। वहीं कवि संजीव त्यागी ने सुनाया ’सुनो देश के गद्दारों तुम, तुमको सबक सिखायेंगे’।
