-पार्षदों ने लगाया विकास न कराने का आरोप
– वित्तीय वर्ष 2022-23 का पुनरीक्षित बजट पारित
गाजियाबाद(हि.स.)। नगर निगम के वर्तमान बोर्ड की अंतिम बैठक शनिवार को हंगामेदार रही। इस अंतिम बैठक में जहां पार्षदों ने निगम अधिकारियों पर जमकर भड़ास निकाली, वहीं अधिकारियों ने भी पार्षदों की हर सवाल का माकूल जवाब दिया। इस दौरान नगर आयुक्त डॉ. नितिन गौड़ तथा पार्षद अनिल स्वामी के बीच निगम में भ्रष्ट सिस्टम को लेकर जमकर नोकझोंक भी हुई। कई पार्षदों ने सवाल उठाया कि आखिरकार अनिल स्वामी को अंतिम बैठक में ही भ्रष्ट सिस्टम की याद क्यों आई । इसके अलावा पार्षदों ने बैठक में निगम अधिकारियों पर विकास कार्य करने का आरोप भी लगाया।
बैठक में वित्तीय वर्ष 2022 23 के पुनरीक्षित चर्चा के बाद पारित कर दिया गया। इस बजट में 1414 करोड़ आय तथा 13 सौ करोड़ व्यय दर्शाया गया है। महापौर आशा शर्मा की अध्यक्षता में बैठक 11 बजे के करीब निगम सभागार में वंदे मातरम के साथ शुरू हुई । कोरम पूरा नहीं होने के कारण बैठक को 15 मिनट के लिए स्थगित कर दिया गया। इसके बाद बैठक पुनः शुरू हुई, जिसमें कांग्रेस पार्षद मनोज चौधरी ने निगम बोर्ड से 60 लाख के विकास कार्य के न होने पर सवाल उठाया।
भाजपा पार्षद सुनील यादव ने उनके सुर में सुर मिलाते हुए काम न होने के साथ-साथ जल निगम द्वारा तोड़ी जा रही सड़कों का मामला उठाया। उन्हें नगर आयुक्त पर आरोप लगाया कि वह पार्षदों का फोन नहीं उठाते हैं और कम्युनिकेशन गैप बहुत बढ़ रहा है । जाकिर सैफी ने बेहतरीन कार्य करने के लिए एक तरफ जहां निगम अधिकारियों को बधाई दी, वहीं विकास कार्यों को तरजीह देने पर आक्रोश व्यक्त किया। इसी दौरान नगर आयुक्त नितिन गौड़ ने पार्षदों के सवालों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि नगर निगम में फंड की कमी है इसमें कोई दो राय नहीं है। लेकिन संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा रहा है और विकास कार्य भी चल रहे हैं। प्रत्येक वार्ड में जरूरत के हिसाब से काम लगातार चल रहे हैं । इसी बीच पार्षद अमित स्वामी ने नगर आयुक्त के जवाब से असंतुष्ट होते हुए कहा कि एक तरफ तो नगर निगम आर्थिक स्थिति कमजोर होने की बात कर रहा है और दूसरी ओर ठेकेदारों से पेमेंट भुगतान के मामले में सिस्टम यानी 30 फीसदी तक कमीशन के रूप में वसूला जा रहा है । जो नहीं देता है उसकी फाइल को रोक दिया जाता है। इस पर नगर आयुक्त ने कहा कि अनिल स्वामी ने एक पत्रिका में 30 हजार रुपये का विज्ञापन देने के लिए उनसे कहा था, जिस पर आर्थिक स्थिति को देखते हुए उन्होंने असमर्थता जताई थी। इसी के चलते उन पर दबाव बनाया जा रहा है। इसके बाद अनिल स्वामी तैश में आ गए । उन्होंने इसे अपना अपमान माना और बैठक का बहिष्कार कर जाने लगे लेकिन पार्षदों ने उन्हें रोक लिया।
नगर आयुक्त ने कहा कि सब कुछ निगम के नियमों के मुताबिक किया जा रहा है। उनका व्यवहार सभी के साथ एक समान है। उन्होंने कहा कि उन पर व्यक्तिगत रूप से जो आरोप लगाया गया है, वह गलत है । इसके बाद महापौर ने किसी तरह से मामले को हस्तक्षेप कर शांत किया। नगर आयुक्त ने बताया कि इंदौर की तर्ज पर समस्याओं के हल करने की व्यवस्था की जा रही है और बहुत जल्द निगम की कार्यप्रणाली में सुधार आएगा। उन्होंने कहा कि ऐसी योजना बनाई जा रही है कि वार्डों की जरूरत के हिसाब से धन आवंटित किया जाए। न कि एक समान। इस दौरान नगर आयुक्त ने पार्षदों संसदीय भाषा का प्रयोग न करने करने का आग्रह किया । बैठक मेंअन्य मुद्दों को लेकर भी कई बार हंगामा हुआ।
फरमान
