गलत इतिहास से हमारी संस्कृति को विकृत करने का प्रयास किया गया
बलिया (हि. स.)। जनपद में स्वाधीनता का अमृत महोत्सव के शुभारंभ के अवसर पर 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के प्रथम शहीद मंगल पांडेय का पैतृक गांव नगवा वंदेमातरम और भारत माता के जयकारों से गूंज उठा। शनिवार को मंगल पाण्डेय की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करने के बाद गोरक्ष प्रान्त के प्रचारक सुभाष ने कहा कि देश और संस्कृति को बचाने के लिए मंगल पाण्डेय ने विद्रोह किया था। वे देश के सच्चे सपूत थे।
अपने सम्बोधन की शुरुआत सुभाष ने खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी… से किया। उन्होंने कहा कि 1947 में स्वाधीन हुआ था। उस समय जो पैदा हुए थे, उनकी उम्र आज 75 वर्ष होगी। आज की पीढ़ी स्वातंत्र्य समर के सेनानियों के बारे में सिर्फ सुनी है। हमें उन सेनानियों के बारे में जन-जन को बताना है।
कहा कि क्या 1857 से पहले 1757 में बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला से जो लड़ाई हुई, जिसके बाद अंग्रेजों का शासन हुआ। उसमें लड़ने वाले नहीं थे ? अंग्रेजों ने हमारे स्वतंत्रता समर के इतिहास को कम कर के दिखाया। वीर सावरकर के बारे में भी कम कर के बताया जाता है। अंग्रेजों का आक्रमण सिर्फ राजनीति और आर्थिक व्यवस्था और ही नहीं था, बल्कि हमारी शिक्षा पर भी था। अंग्रेज इस देश में धर्मान्तरण के लिए आए थे और इस देश का विभाजन कर के गए। पढ़ाया जाता है कि भारत की खोज वास्कोडिगामा ने किया था।
सुभाष जी सवाल किया कि उससे पहले भारत नहीं था क्या ? भारत अनादि काल से है। गलत इतिहास से हमारी संस्कृति को विकृत करने का प्रयास किया गया। कहा कि भारतवर्ष वह है जो ऋषियों का देश है। मेरा भारत महान था। 1857 की क्रांति में इसी महान देश के लिए अंग्रेज को गोलियों से भून दिया था। वे पहले सिपाही थे, जिन्होंने जिसके यहां नौकरी की, उसे ही गोली मार दी। क्योंकि वे गोवध के खिलाफ थे। वे भारत माता के महान सपूत थे। पूरे देश को उन पर गर्व होना चाहिए। इसके पहले कार्यक्रम की शुरुआत मंगल पांडेय की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर हुई।
इस अवसर पर भृगु , मुन्ना राम, डा. रामकृष्ण उपाध्याय, विधायक सुरेन्द्र सिंह, बब्बन सिंह रघुवंशी, नागेन्द्र पाण्डेय, रवि राय, मारुतिनंदन आदि थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वतंत्रता सेनानी रामविचार पाण्डेय और संचालन अरुणमणि ने किया।
खूब लहराया तिरंगा, हिलोरें मारने लगी देशभक्ति
स्वाधीनता का अमृत महोत्सव में नगवा की धरती देशभक्ति के जज्बे से भर गई। अमर शहीद मंगल पाण्डेय स्मारक सोसायटी परिसर में आयोजित कार्यक्रम में नागा जी सरस्वती विद्या मंदिर और सरस्वती बालिका विद्या मंदिर के छात्र-छात्राएं हाथों में तिरंगा लेकर आए थे। यह दृश्य देख उपस्थित सभी लोग भारत माता की जय बोलने लगे। कई बच्चियां भारत माता के वेश में आईं थीं। नागा जी सरस्वती विद्या मंदिर के संगीतज्ञ पंडित राजकुमार मिश्रा और उनके शिष्यों ने देशभक्ति गीत गाकर समा बांध दिया। छात्राओं ने जब ऐ मेरे वतन के लोगों… गाया तो सभी की आंखें नम हो गईं। इसके बाद सेनानी परिवार के शिवकुमार कौशिकेय ने जब मंगल पांडेय समेत जिले के सभी शहीद सेनानियों की वीरगाथा सुनाई तो भी लोग गमगीन हो गए।
सेनानियों के परिवार का हुआ सम्मान
प्रान्त प्रचारक सुभाष जी ने जिले के 56 शहीद सेनानियों के परिजनों में से कुछ लोगों को मंच पर सम्मानित किया। उन्होंने मंगल पाण्डेय के परिवार के सदस्यों रघुनाथ पाण्डेय और शैलेश पाण्डेय, 1942 की क्रांति के नायक चित्तू पाण्डेय के प्रपौत्र विनय पाण्डेय, सरदार स्वर्ण सिंह, शिवप्रसाद के प्रपौत्र संजय मौर्य, रामसुभग राम के मुन्ना राम, रामाशीष सिंह के प्रपौत्र शिवकुमार कौशिकेय, गोवा क्रांति के नायक सेनानी रामविचार पाण्डेय को अंगवस्त्र और माल्यार्पण कर सम्मानित किया।
गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों को किया जाएगा सम्मानित
मंगल पांडेय के पैतृक गांव नगवा में शनिवार को स्वाधीनता का अमृत महोत्सव की शुरूआत के बाद 19 दिसम्बर तक उन स्वतंत्रता सेनानियों के परिजनों को सम्मानित किया जाएगा, जो अब तक गुमनाम हैं। इसके अलावा गांव-गांव रथयात्रा निकाली जाएगी और लोगों को स्वाधीनता के 75 वर्ष पूरे होने पर देश के प्रति जागरूक किया जाएगा।
